उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हाल ही में घटित हुए हृदयविदारक और भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रशासनिक अमले को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक हादसे से कड़ा सबक लेते हुए अब गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट और सख्त नजर आ रहा है। जिले के भीतर अवैध और असुरक्षित तरीके से संचालित हो रहे शैक्षणिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नकेल कसने के लिए एक विशेष महा-अभियान की शुरुआत की गई है। इसी कड़ी में नोएडा के पॉश इलाके सेक्टर-104 में धड़ल्ले से चल रहे ‘ओम कोचिंग सेंटर’ पर प्रशासनिक हंटर चला है। नियमों को ताक पर रखकर हजारों बच्चों के भविष्य और जीवन से खिलवाड़ करने वाले इस संस्थान को संयुक्त जांच टीम ने तत्काल प्रभाव से तालाबंदी करते हुए पूरी तरह सील कर दिया है।
सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां: न वैध रजिस्ट्रेशन, न ही फायर विभाग की मंजूरी
गौतमबुद्ध नगर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, औचक निरीक्षण के दौरान ‘ओम कोचिंग सेंटर’ के भीतर सुरक्षा और वैधानिकता की घोर अनदेखी पाई गई। यह संस्थान बिना किसी अनिवार्य और वैध सरकारी पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के अवैध रूप से चलाया जा रहा था। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह सामने आई कि कोचिंग संचालक के पास मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) कार्यालय द्वारा जारी किया जाने वाला अनिवार्य ‘फायर एनओसी’ (अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र) भी मौजूद नहीं था। संस्थान के भीतर आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम न होने और किसी भी आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था न मिलने पर छात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए प्रशासन ने इस पर ताला जड़ने का कड़ा फैसला लिया।
डीआईओएस, सिटी मजिस्ट्रेट और फायर ब्रिगेड की टीम ने संयुक्त रूप से की छापेमारी
इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए जिला प्रशासन की एक संयुक्त और उच्च स्तरीय टीम का गठन किया गया था। इस विशेष टीम में जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), सिटी मजिस्ट्रेट और मुख्य अग्निशमन विभाग के चुनिंदा अधिकारी और पुलिस बल शामिल थे। अधिकारियों की टीम ने जब अचानक सेक्टर-104 स्थित ओम कोचिंग सेंटर के परिसर में दस्तक दी, तो वहां हड़कंप मच गया। टीम ने मौके पर मौजूद प्रबंधकों से संस्थान के संचालन और फायर सेफ्टी से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज तलब किए, लेकिन संचालक कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहे। इसके बाद बारीकी से किए गए भौतिक निरीक्षण में भी सुरक्षा मानकों की कई गंभीर खामियां उजागर हुईं, जिसके बाद विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए संस्थान को सील कर दिया गया।
‘मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’: प्रशासन की दोटूक चेतावनी
जांच का नेतृत्व कर रहे आला अधिकारियों ने इस कार्रवाई के बाद सख्त रुख अख्तियार करते हुए मीडिया से कहा:
- किसी भी कोचिंग संस्थान, स्कूल या शैक्षणिक केंद्र का संचालन बिना निर्धारित कानूनी नियमों और तय सुरक्षा मानकों के नहीं किया जा सकता।
- जिन जगहों पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई और सुनहरे भविष्य के लिए आते हैं, वहां अग्नि सुरक्षा के न्यूनतम उपकरण और वैध लाइसेंस होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- सुरक्षा मानकों और कागजी अनुमति पत्रों की अनदेखी करना सीधे तौर पर निर्दोष विद्यार्थियों के जीवन को जानबूझकर खतरे में डालने जैसा गंभीर कृत्य है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिलेभर में जारी रहेगा औचक निरीक्षण का दौर, संचालकों को आखिरी अल्टीमेटम
गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सेक्टर-104 में हुई यह कार्रवाई महज एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऐसे तमाम छोटे-बड़े कोचिंग सेंटरों, निजी स्कूलों, प्ले-वे और व्यावसायिक बहुमंजिला प्रतिष्ठानों की सघन और औचक जांच का दौर निरंतर जारी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि जिस भी संस्थान के पास वैध पंजीकरण दस्तावेज या फायर विभाग की एनओसी नहीं पाई जाएगी, उनके खिलाफ भी बिना किसी रियायत के इसी प्रकार की कठोर और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही, प्रशासन ने सभी निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों से यह पुरजोर अपील की है कि वे समय रहते अपने सभी आवश्यक मानकों को पूरा कर लें और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।





















































