लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में हुए हालिया भीषण अग्निकांड के संदर्भ में प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सीधा प्रहार किया है। हादसे में अपने मासूम बच्चे को खो देने वाली एक पीड़ित मां के साथ कथित रूप से किए गए अभद्र व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए सपा प्रमुख ने तीखा जुबानी हमला बोला। उन्होंने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो सत्तासीन लोग आपदा की घड़ी में दुखी जनता के प्रति संवेदना नहीं रख सकते, उनसे किसी भी प्रकार के अच्छे आचरण और शिष्टता की उम्मीद रखना पूरी तरह व्यर्थ है।
संवेदनाहीन व्यवहार पर खड़े किए गंभीर सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया साझा करते हुए अखिलेश यादव ने लिखा कि लखनऊ अग्निकांड में अपने कलेजे के टुकड़े को गंवाने वाली लाचार मां के साथ कैमरे के सामने जिस प्रकार की भाषा और व्यवहार का प्रदर्शन किया गया, वह बेहद निंदनीय है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से ऐसी संवेदनहीनता और बदजुबानी पर उतर आए, तो उससे सद्वचनों और नैतिक व्यवहार की आस लगाना बेमानी हो जाता है। सपा प्रमुख के अनुसार, सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को कम से कम उन संवैधानिक और प्रतिष्ठित पदों की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए जिन पर वे विराजमान हैं।
‘इहलोक और परलोक दोनों बिगड़ गए’
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मर्यादा और आचरण का विषय उठाते हुए अखिलेश यादव ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में वाणी को मां सरस्वती का रूप माना गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग दुख से पीड़ित मां की चीख-पुकार और आंसुओं का आदर नहीं कर सकते, वे न तो इस लोक (इहलोक) में किसी मां का सम्मान जानते हैं और न ही परलोक की अवधारणा को समझते हैं। सपा प्रमुख ने तंजिया लहजे में टिप्पणी की कि ऐसे आचरण से ऐसे लोगों के दोनों ही लोक पूरी तरह से बिगड़ चुके हैं।
‘बेसुध को सब माफ, लेकिन जनता नहीं करेगी क्षमा’
अपने संदेश में तल्खी को और बढ़ाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि “बेसुध को सब माफ!” उन्होंने कहा कि हमने तो व्यक्तिगत रूप से इन्हें मन से क्षमा कर दिया है, क्योंकि ये अपनी विवेकशीलता खो चुके हैं और किसी अन्य के प्रभाव या दबाव में कार्य कर रहे हैं। जाते हुए लोगों से किसी प्रकार की शिकवा या शिकायत रखना बेमतलब है। हालांकि, अखिलेश ने स्पष्ट संदेश दिया कि भले ही विपक्षी दल के रूप में हम इन्हें माफ कर दें, लेकिन उत्तर प्रदेश की आम जनता ऐसे संवेदनहीन रवैये को बिल्कुल भी भूलने या माफ करने के मूड में नहीं है। अपने राजनीतिक प्रहार का समापन उन्होंने बेहद रणनीतिक शब्द ‘अलविदा!’ के साथ किया।





















































