उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आलोक राय के बेटे विनीत राय की सनसनीखेज हत्या के बाद कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस जघन्य हत्याकांड ने न सिर्फ पूरे इलाके में भारी जन-आक्रोश पैदा कर दिया है, बल्कि पीड़ित परिवार के सब्र का बांध भी तोड़ दिया है। न्याय की गुहार लगाते हुए मृतक के पिता ने अब उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को एक बेहद सख्त अल्टीमेटम दिया है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में खलबली मचा दी है।
पिता का अल्टीमेटम: ‘सात दिन में एनकाउंटर हो, वरना सीएम दफ्तर के बाहर देंगे जान’
विनीत राय की बेरहमी से की गई हत्या के बाद उनके पिता आलोक राय का दर्द और गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनके बेटे के हत्यारों को मुठभेड़ (एनकाउंटर) में ढेर नहीं किया गया, तो वे अपने पूरे परिवार के साथ लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह कर लेंगे। पीड़ित पिता ने यह भी ऐलान किया है कि जब तक आरोपियों को उनके अंजाम तक नहीं पहुंचाया जाता और परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, तब तक वे अपने बेटे का तेरहवीं संस्कार भी संपन्न नहीं करेंगे। इस दृढ़ संकल्प और आक्रोश ने मामले की संवेदनशीलता को अत्यधिक बढ़ा दिया है।
‘कटरा गैंग’ का खौफ और खाकी पर लगे गंभीर आरोप
गौरतलब है कि शुक्रवार की रात विनीत राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के पीछे कुख्यात ‘कटरा गैंग’ का हाथ बताया जा रहा है, जिसका सरगना शंकर पांडेय अपने साथियों के साथ घटना के बाद से ही फरार है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस अपराधी गिरोह को स्थानीय पुलिस के कुछ कर्मियों का सीधा संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण इनके हौसले बुलंद हैं। आलोक राय ने गोरा बाजार चौकी प्रभारी और पूर्व सर्विलांस प्रभारी शिवाकांत मिश्रा पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उनके मुख्य आरोपी शंकर पांडेय के साथ बेहद करीबी संबंध हैं। गाजीपुर में यह बात भी सामने आई है कि ‘कटरा गैंग’ जैसे आपराधिक समूह वॉट्सऐप और अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेकर स्थानीय युवाओं को बरगलाते हैं और उन्हें संगठित अपराध के दलदल में धकेलते हैं।
पुलिस महकमे में हड़कंप: चार टीमें दे रहीं दबिश, कोतवाली प्रभारी लाइन हाजिर
इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के बाद शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। शनिवार को खुद अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पीयूष मोर्डिया और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) वैभव कृष्ण ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और स्थानीय अधिकारियों की क्लास लगाई। लापरवाही बरतने के आरोप में कोतवाली प्रभारी महेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। फिलहाल, पुलिस की चार विशेष टीमें मुख्य आरोपियों की तलाश में बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में लगातार छापेमारी कर रही हैं। अब तक पुलिस ने इस मामले में आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।
सत्ता पक्ष के एमएलसी ने उठाए सवाल, लखनऊ तक गूंजेगा मामला
इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एमएलसी धर्मेंद्र सिंह ने भी स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगलियां उठाई हैं। उन्होंने कहा कि परिवार ने घटना से पहले ही पुलिस को इस गैंग की आपराधिक गतिविधियों और अपनी जान के खतरे के बारे में अवगत करा दिया था। इसके बावजूद उच्च अधिकारियों द्वारा समय रहते कोई ठोस कदम न उठाना बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है। एमएलसी धर्मेंद्र सिंह ने साफ किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपराधियों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश बेहद स्पष्ट है। इस पूरे मामले की कड़ियों और पुलिस की कथित लापरवाही को वे लखनऊ में उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रमुखता से उठाएंगे ताकि दोषियों को ऐसी सजा मिले जो नजीर बन सके।





















































