अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस चर्चित कांड में मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा की मुश्किलें अब उसके परिवार तक पहुंच गई हैं। बुधवार को अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने आरोपी की पत्नी सुप्रिया मिश्रा को उनके निर्माणाधीन मकान से संबंधित वैधानिक दस्तावेज जमा करने के लिए कड़ी चेतावनी दी है। प्राधिकरण ने दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए केवल एक सप्ताह की मोहलत दी है, जबकि आरोपी की पत्नी ने पूरे एक महीने का समय मांगा था। यह कार्रवाई सहादतगंज स्थित उस निर्माणाधीन संपत्ति के खिलाफ की जा रही है, जो कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कर बनाई जा रही है।
अंतिम नोटिस के बाद ADA दफ्तर पहुंचीं आरोपी की पत्नी
बुधवार को सुप्रिया मिश्रा अपनी बेटी और पिता के साथ अयोध्या विकास प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने वहां एक औपचारिक आवेदन सौंपा, जिसमें उन्होंने बनवीरपुर स्थित अपनी संपत्ति के लिए कागजी कार्रवाई पूरी करने हेतु अतिरिक्त समय की याचना की। गौरतलब है कि प्राधिकरण ने इससे एक दिन पहले ही सुप्रिया को अंतिम नोटिस जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि 15 जुलाई तक संबंधित निर्माण कार्य के वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किए गए, तो इस संपत्ति को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्राधिकरण की इस सख्ती से आरोपी पक्ष में हड़कंप मचा हुआ है।
एक महीने की मांग खारिज, केवल 7 दिन का समय
यद्यपि सुप्रिया मिश्रा ने अपनी दलील में एक महीने की मोहलत की गुहार लगाई थी, किंतु प्राधिकरण ने प्रशासनिक कठोरता दिखाते हुए उस मांग को खारिज कर दिया है। एडीए के अधिकारियों ने उन्हें सख्त हिदायत दी है कि अब सिर्फ सात दिनों के भीतर उन्हें निर्माण का स्वीकृत नक्शा, भूमि के स्वामित्व के दस्तावेज और अन्य संबंधित फाइलें जमा करनी होंगी।
यह भूखंड सुप्रिया मिश्रा के नाम पर दर्ज है, जिस पर किए जा रहे निर्माण को लेकर प्राधिकरण ने सबसे पहले 3 जुलाई को नोटिस जारी किया था। जब उस नोटिस का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो प्रशासन ने संपत्ति पर दूसरा नोटिस चस्पा करते हुए इसे ‘अंतिम मौका’ करार दिया है।
1973 के एक्ट के तहत शुरू हुई कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि में राम मंदिर में चढ़ाए गए दान में कथित हेराफेरी का मामला है। अयोध्या विकास प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी महेंद्र कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि यह ध्वस्तीकरण या सीलिंग की कार्रवाई ‘उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973’ के सख्त प्रावधानों के तहत अमल में लाई जा रही है।
आरोपी लवकुश मिश्रा उन आठ संदिग्धों में शामिल है, जिन्हें मंदिर में चंदा गिनती की प्रक्रिया के दौरान हुई धांधली के आरोप में एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को गिरफ्तार किया गया था। मंदिर के चढ़ावे में की गई इस कथित हेराफेरी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अब प्रशासन द्वारा आरोपी के करीबियों के अवैध निर्माणों पर की जा रही यह कार्रवाई इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ कड़े संदेश के रूप में देखी जा रही है।





















































