उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार सुबह एक बड़ा हवाई हादसा होते-होते रह गया। दुबई से उड़ान भरकर लखनऊ पहुंचे फ्लाईदुबई के एक यात्री विमान से हवा में ही एक पक्षी टकरा गया। हालांकि, पायलट की सूझबूझ और कड़े सुरक्षा मानकों के चलते विमान को हवाई अड्डे पर पूरी तरह सुरक्षित उतार लिया गया, जिससे विमान में सवार सभी १६४ यात्रियों की जान पर मंडरा रहा संकट टल गया। हवाई अड्डा प्रशासन ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस बर्ड हिट के बावजूद विमान के संचालन या यात्रियों की सुरक्षा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
सुबह के वक्त हुआ हादसा: रनवे पर सुरक्षित उतरा विमान
हवाई अड्डे के आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, फ्लाईदुबई की अंतरराष्ट्रीय उड़ान संख्या एफजेड४४३ (FZ443) शनिवार सुबह अपने निर्धारित समय पर लखनऊ के आसमान में थी। विमान में कुल १६४ यात्री सवार थे, जो अपने गंतव्य पर पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। सुबह ठीक ७ बजकर ११ मिनट पर विमान ने लखनऊ हवाई अड्डे के रनवे पर लैंड किया। विमान के सुरक्षित तरीके से नीचे उतरने के बाद ही यात्रियों और हवाई अड्डा कर्मचारियों ने चैन की सांस ली। सभी यात्रियों को विमान से बिना किसी असुविधा के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
तकनीकी निरीक्षण में हुआ खुलासा: बर्ड हिट के मिले पुख्ता निशान
हवाई अड्डा प्रशासन ने बताया कि लैंडिंग के वक्त किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि हवा में कोई अनहोनी हुई है। विमान के रनवे पर सफलतापूर्वक रुकने के बाद जब तय सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत उसका नियमित तकनीकी निरीक्षण (रूटीन टेक्निकल इंस्पेक्शन) शुरू किया गया, तब इंजीनियरिंग टीम की नजर विमान के बाहरी हिस्से पर पड़ी। गहन जांच के दौरान विमान के एक हिस्से पर पक्षी के टकराने के स्पष्ट और पुख्ता संकेत पाए गए। इसके बाद तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल को सक्रिय किया गया।
सुरक्षा मानकों के तहत गहन जांच जारी: यात्रियों को नहीं हुई कोई परेशानी
विमानन विशेषज्ञों और हवाई अड्डे के सूत्रों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह घटना पूरी तरह से लैंडिंग के बाद किए गए रूटीन चेक के दौरान ही सामने आई। इससे पहले उड़ान के दौरान विमान के सुरक्षित संचालन पर इसका तनिक भी विपरीत असर नहीं पड़ा था। हवाई अड्डा अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में नागरिक उड्डयन के मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। विमान को आगे की उड़ानों के लिए हरी झंडी देने से पहले उसका बेहद बारीकी से आवश्यक तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है ताकि किसी भी सूक्ष्म खराबी की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके।





















































