अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी से उपजे विवाद का सीधा और नकारात्मक असर अब अयोध्या के स्थानीय व्यापार पर दिखने लगा है। धर्मनगरी के प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है, जिससे स्थानीय दुकानदार, प्रसाद विक्रेता और होटल व्यवसायी बेहद चिंतित हैं। व्यापारियों का साफ तौर पर कहना है कि जब से मंदिर से जुड़ा यह विवाद सुर्खियों में आया है, तब से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आमद में अप्रत्याशित रूप से बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके चलते अयोध्या की धार्मिक अर्थव्यवस्था को भारी आर्थिक चपत लग रही है।
श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट से छोटे दुकानदार और हस्तशिल्पी बेहाल
अयोध्या के विश्वप्रसिद्ध हनुमानगढ़ी परिसर के निकट वर्षों से प्रसाद की दुकान संचालित करने वाले स्थानीय कारोबारी दीपक चौरसिया ने मीडिया से बात करते हुए बाजार की जमीनी हकीकत बयां की। उन्होंने कहा कि मंदिर से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे तौर पर अयोध्या के पूरे कारोबारी तंत्र को हिलाकर रख देता है। दीपक के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम इस पूरे प्रकरण में घसीटा जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकि उनकी इस कुप्रबंधन में कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।
हालांकि, उन्होंने यह भी मांग की कि ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होंने बताया कि पहले जहां रोजाना देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बेहद सीमित रह गई है। इस मंदी की मार सबसे ज्यादा फूल-प्रसाद, माला, धार्मिक साहित्य और हस्तशिल्प बेचने वाले छोटे रेहड़ी-पटरी दुकानदारों पर पड़ रही है।
आजीविका का संकट: बाहरी राज्यों के पर्यटकों ने मोड़ा मुंह, स्थानीय लोगों के भरोसे बाजार
अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की श्रद्धा केवल मंदिर के दर्शन और अनुष्ठान तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके आगमन से यहां के हजारों स्थानीय परिवारों की आजीविका का चक्र चलता है। एक अन्य प्रमुख प्रसाद विक्रेता विकास गुप्ता ने इस संकट पर अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभालने में नाकाम रहने के चलते ही चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से त्यागपत्र दिया है, जो कि एक स्वागत योग्य कदम है।
लेकिन, इस प्रशासनिक फेरबदल और विवाद के चलते बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के मन में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कई तरह की आशंकाएं घर कर गई हैं। नतीजतन, पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश के बाहर जैसे सुदूर दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, गुजरात और बंगाल से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई है। वर्तमान में जो भी भीड़ दिखाई दे रही है, उसमें केवल अयोध्या के आसपास के जिलों या स्थानीय क्षेत्रों के लोग ही शामिल हैं, जो अमूमन बाजार में ज्यादा खरीदारी या होटलों में ठहराव नहीं करते।
नई प्रबंधन टीम से उम्मीदें: जल्द लौटेगा पुराना भरोसा और व्यापार में आएगी तेजी
इस कठिन दौर के बीच अयोध्या के व्यापारिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने उम्मीद की किरण नहीं छोड़ी है। बाजार के वरिष्ठ व्यापारियों का मानना है कि मंदिर प्रशासन के संबंध में जो भी नए और सुधारात्मक निर्णय लिए गए हैं, वे पूरी तरह स्वागत योग्य हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि ट्रस्ट में शामिल होने वाली नई प्रशासनिक टीम और नए पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी पारदर्शिता और कुशलता के साथ करेंगे।
व्यापारियों ने सामूहिक रूप से कहा कि अयोध्या की पूरी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से धार्मिक पर्यटन (स्पिरिचुअल टूरिज्म) पर टिकी हुई है। ऐसे में राम मंदिर से जुड़े किसी भी छोटे-बड़े विवाद की सीधी मार यहां के स्थानीय निवासियों के पेट पर पड़ती है। व्यापारियों ने सरकार और नवगठित प्रशासनिक टीम से अपील की है कि वे जल्द से जल्द ठोस कदम उठाकर देश-विदेश में रह रहे रामभक्तों का विश्वास दोबारा जीतें, ताकि अयोध्या का व्यापार एक बार फिर अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ सके।





















































