उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दिल्ली-हावड़ा रेल रूट पर सोमवार देर शाम एक बहुत बड़ा रेल हादसा होने से बाल-बाल बच गया। करछना इलाके के हरदुआ रामपुर गांव के पास अत्यधिक गर्मी की वजह से रेलवे का मुख्य ट्रैक बीच से चटक गया था, जिससे वहां से गुजरने वाली ट्रेनों के बेपटरी होने का पूरा खतरा बना हुआ था। लेकिन ऐन वक्त पर दो स्थानीय ग्रामीण युवकों की सूझबूझ और अदम्य साहस ने एक भीषण तबाही को टाल दिया। दोनों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए समय रहते ट्रेन को रुकवा दिया और सैकड़ों लोगों की जिंदगी सुरक्षित बचा ली।
मालगाड़ी गुजरते ही आई तेज आवाज, मौके पर पहुंचे ग्रामीण
यह पूरी घटना प्रयागराज के औद्योगिक थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डीएफसी (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) अपलाइन की है। सोमवार की शाम को जब ट्रैक से एक भारी-भरकम मालगाड़ी गुजरी, तो पटरियों से अचानक बहुत तेज और असामान्य आवाज सुनाई दी।
इस डरावनी आवाज को सुनकर पास में ही रहने वाले सुनील कुमार शर्मा नाम के युवक का माथा ठनका। वह किसी अनहोनी की आशंका के चलते तुरंत रेलवे ट्रैक की तरफ भागे। वहां पहुंचने पर सुनील ने देखा कि भीषण गर्मी के दबाव के कारण रेलवे ट्रैक की कई स्लीपर क्लिप्स टूटकर दूर जा गिरी थीं और लोहे की पटरी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी।
लाल रुमाल बना ‘लाइफ सेवर’: मौत के मुंह में जाने से बची ट्रेन
पटरी की यह खतरनाक स्थिति देखकर सुनील के होश उड़ गए। इसी बीच शोर सुनकर उनका एक और साथी सुरेश भी दौड़ता हुआ मौके पर पहुंच गया। उस वक्त दोनों युवकों ने देखा कि इसी क्षतिग्रस्त ट्रैक पर दूर से एक और ट्रेन तेजी से आगे बढ़ रही थी। समय बहुत कम था और कोई भी तकनीकी संपर्क साधन उपलब्ध नहीं था।
ऐसे में दोनों दोस्तों ने तुरंत अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने अपनी जेब से लाल रंग का रुमाल निकाला और उसे हवा में लहराते हुए पटरियों के बीच दौड़ पड़े। लाल रंग का इशारा और पटरी पर लड़कों को इस तरह भागते देख लोको पायलट ने खतरे को भांप लिया और तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। ट्रेन क्षतिग्रस्त हिस्से से कुछ ही दूरी पर सुरक्षित खड़ी हो गई, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते रह गया।
अलर्ट मोड पर आया रेलवे प्रशासन, 1 घंटे में दुरुस्त हुआ ट्रैक
जैसे ही ट्रेन सुरक्षित खड़ी हुई, वहां मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस सहायता नंबर ‘डायल 112’ पर फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे के वरिष्ठ तकनीकी इंजीनियरों की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई।
रेलवे की मेंटेनेंस टीम ने तुरंत कमान संभाली और युद्धस्तर पर काम शुरू किया। महज एक घंटे के भीतर ही पूरी टीम ने क्षतिग्रस्त पटरी को बदलकर उसे पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया।
अधिकारियों ने दी तकनीकी खराबी की पुष्टि, रूट पर यातायात बहाल
इस पूरे मामले पर डीएफसीसीआईएल (DFCCIL) के महाप्रबंधक (संचालन एवं व्यवसाय विकास) मन्नू प्रकाश दुबे ने आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि करछना के समीप डीएफसी अप लाइन की पटरी में अत्यधिक तापमान के कारण तकनीकी समस्या (गैप) आने की शुरुआती रिपोर्ट मिली थी।
उन्होंने कहा कि जैसे ही कंट्रोल रूम को अलर्ट मिला, रेलवे की आपातकालीन टीम को तुरंत मौके पर रवाना किया गया था। अब क्षतिग्रस्त ट्रैक की पूरी तरह मरम्मत कर ली गई है और सुरक्षा प्रमाणन के बाद इस रूट पर मालगाड़ियों सहित अन्य ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से सुरक्षित ढंग से दोबारा बहाल कर दिया गया है। स्थानीय लोग अब सुनील और सुरेश की बहादुरी की जमकर तारीफ कर रहे हैं।





















































