उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में किसानों और पशुपालकों के हित में एक अत्यंत कल्याणकारी कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और मवेशियों की असमय मृत्यु से होने वाले घाटे से बचाने के लिए ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ के वित्तीय खाके को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के जरिए प्रदेश के लाखों डेयरी संचालकों और सीमांत किसानों को एक बड़ा सुरक्षा कवच मिलेगा, जिससे मवेशियों की बीमारी या दुर्घटना में मौत होने पर उन्हें आर्थिक तबाही का सामना नहीं करना पड़ेगा।
संकट के समय ढाल बनेगी योजना; पशुधन मंत्री ने दी अहम जानकारी
मंत्रिमंडल के इस बड़े फैसले की विस्तृत जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाना है। कई बार महामारियों, प्राकृतिक आपदाओं या अचानक होने वाले हादसों के कारण दुधारू और अन्य कीमती पशु दम तोड़ देते हैं।
ऐसी स्थिति में छोटे किसानों की पूरी पूंजी डूब जाती है। इस जोखिम को कम करने के लिए लाई गई इस योजना के तहत यदि किसी बीमित पशु की महामारी, दैविक आपदा अथवा किसी आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु होती है, या वह पूरी तरह अनुपयोगी हो जाता है, तो नुकसान की भरपाई सीधे बीमा क्लेम के जरिए की जाएगी।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹60 करोड़ का बजट मंजूर, 2.28 लाख से अधिक मवेशियों का होगा बीमाकैबिनेट द्वारा स्वीकृत किए गए नए प्रस्ताव में इस कल्याणकारी योजना को धरातल पर उतारने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026−27 के वास्ते 60 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया गया है।पशुधन मंत्री के मुताबिक, आवंटित की गई इस वित्तीय राशि की मदद से पूरे उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक चरण में कुल 2,28,350 पशुओं को सीधे तौर पर बीमा कवर के दायरे में लाया जाएगा। इस पहल से प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में श्वेत क्रांति और दुग्ध उत्पादन को एक नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रीमियम का गणित: 85% बोझ उठाएगी सरकार, लाभार्थी को देना होगा मात्र 15% अंशदान
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका बेहद किफायती और लोक-कल्याणकारी प्रीमियम मॉडल है। अमूमन महंगे प्रीमियम के डर से छोटे किसान अपने मवेशियों का बीमा कराने से कतराते हैं, लेकिन योगी सरकार ने इस समस्या का भी स्थाई समाधान कर दिया है।
- सरकारी हिस्सेदारी: कुल बीमा प्रीमियम की कुल लागत का 85 प्रतिशत भारी-भरकम हिस्सा सीधे राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
- किसान का अंशदान: पशुपालक या डेयरी संचालक को अपनी जेब से कुल प्रीमियम का केवल 15 प्रतिशत मामूली अंशदान ही जमा करना होगा।
किसे और कैसे मिलेगा इस योजना का सीधा लाभ?
पशुधन विभाग के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्रता के दायरे को काफी व्यापक और समावेशी बनाया गया है। योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित वर्गों को प्राथमिकता के आधार पर लाभान्वित किया जाएगा:
१. प्रदेश के सभी लघु एवं सीमांत किसान। २. ऐसे भूमिहीन ग्रामीण परिवार जिनका जीवनयापन पूरी तरह पशुपालन पर निर्भर है। ३. छोटे और मध्यम स्तर के डेयरी फार्म संचालक। ४. अन्य सभी आर्थिक रूप से कमजोर पात्र पशुपालक।
योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालकों को अपने नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय या दुग्ध समितियों के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके बाद पशुपालन विभाग की टीम मवेशियों का स्वास्थ्य परीक्षण और टैगिंग कर बीमा प्रक्रिया को पूरा करेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल पशुपालकों की आय को सुरक्षित करेगा बल्कि राज्य में दुग्ध उत्पादन के बुनियादी ढांचे को भी एक नया संबल देगा।





















































