उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक कोचिंग सेंटर में भड़की भीषण आग ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) का ट्रॉमा सेंटर चीख-पुकार और अपनों को खोने के मातम से भरा हुआ है। 15 मासूम छात्रों की दम घुटने से दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि घायल हुए 8 छात्रों में से 5 को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वहीं, अपनी जान बचाने के लिए इमारत की ऊपरी मंजिल से छलांग लगाने वाले छात्र जयंत सहित गंभीर रूप से घायल अन्य छात्रों का सघन चिकित्सा कक्ष में इलाज अभी भी जारी है। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर तीखे सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
दम घुटने से गई 15 जानें, हर पल की मॉनिटरिंग कर रहा KGMU प्रशासन
अलीगंज अग्निकांड के बाद समूचा स्वास्थ्य महकमा और केजीएमयू (KGMU) प्रशासन हाई अलर्ट मोड पर काम कर रहा है। अस्पताल की वाइस चांसलर (वीसी) प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद खुद पूरे हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने इस भयावह घटना पर दुख व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि अस्पताल प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य हर हाल में घायल बच्चों की जान बचाना है। वीसी ने बताया कि जिन 15 छात्रों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो चुकी है, उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के सटीक कारणों की आधिकारिक और विधिक पुष्टि हो सके।
वहीं, केजीएमयू के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रेम राज सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान एक दर्दनाक सच साझा किया। उन्होंने बताया कि मारे गए 15 छात्रों को जब अस्पताल लाया गया था, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। प्रारंभिक चिकित्सीय जांच में यह बात सामने आई है कि आग की लपटों से ज्यादा दम घुटने (सफोकेशन) के कारण इन मासूमों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा है।
खौफनाक छलांग और लोहे की रॉड: गंभीर घायलों का ताजा हेल्थ बुलेटिन
मौत के इस तांडव के बीच कुछ छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए खौफनाक कदम उठाए। केजीएमयू के आधिकारिक प्रवक्ता के.के. सिंह ने घायलों का विस्तृत हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि कुल 8 घायल छात्रों को ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। इनमें से 5 छात्रों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें आवश्यक चिकित्सा के बाद सुरक्षित उनके घर भेज दिया गया है।
हालांकि, दो छात्रों की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। इनमें एक छात्रा लवप्रीत है, जिसकी बाईं जांघ में चोट आई है। राहत की बात यह है कि एक्स-रे रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली से उसके परिजनों के आने के बाद उसे भी डिस्चार्ज या किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया जा सकता है।
दूसरी ओर, सबसे दर्दनाक स्थिति छात्र जयंत की है। आग से बचने के लिए उसका ऊपरी मंजिल से कूदने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। जान बचाने के लिए लगाई गई यह छलांग उसके लिए बेहद घातक साबित हुई। वह सीधे एक लोहे की रॉड पर जा गिरा, जो उसकी पीठ के निचले हिस्से में गहराई तक घुस गई। इस भयंकर हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिसके चलते उसके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह से सुन्न पड़ गया है। रात में हुए सीटी स्कैन में नसों और रीढ़ में भारी सूजन और चोट के निशान मिले हैं। अब जयंत का एमआरआई (MRI) किया जाना है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर न्यूरोसर्जन यह तय करेंगे कि इलाज दवाओं से संभव है या फिर तत्काल किसी जटिल सर्जरी की आवश्यकता होगी।
संजय सिंह ने पीड़ितों से की मुलाकात, फायर ब्रिगेड की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
इस भीषण त्रासदी के बाद सियासी पारा भी गरमा गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आनन-फानन में केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर अग्निकांड के पीड़ितों और उनके बेहाल परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक करार देते हुए जान गंवाने वाले 15 छात्रों की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
संजय सिंह ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए स्थानीय प्रशासन और बचाव कार्य की गति पर गंभीर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने कहा कि मीडिया और चश्मदीदों के माध्यम से ऐसी खबरें लगातार सामने आ रही हैं कि घटना के वक्त फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंच सकीं। आप सांसद ने इस पूरे मामले और बचाव कार्य में हुई कथित देरी की एक उच्च स्तरीय जांच की पुरजोर मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो और दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।





















































