सीतापुर: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में सोमवार की सुबह एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल देखने को मिली। जिला प्रशासन ने एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के तहत टाउन हॉल परिसर में स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय पर बुलडोजर चलाकर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। सुबह तड़के लगभग 5 बजे जब पूरा शहर सो रहा था, तब भारी पुलिस बल और आला प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पांच बुलडोजर एक साथ मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते करीब 3000 वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैली सपा दफ्तर की दो मंजिला इमारत को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया। इस औचक और बड़ी कार्रवाई के बाद जिले का सियासी पारा अचानक बेहद गर्म हो गया है।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ था प्रशासन का कड़ा रुख
इस बड़ी कार्रवाई के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि समाजवादी पार्टी का यह जिला कार्यालय पूरी तरह से सरकारी भूमि पर निर्मित था। टाउन हॉल कॉम्प्लेक्स की इस बेशकीमती और प्राइम लोकेशन वाली जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन काफी समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था। राजस्व विभाग और नगर पालिका के अभिलेखों की जांच के बाद यह जमीन पूरी तरह नजूल/सरकारी घोषित की गई थी। इसके बाद प्रशासन ने नियमानुसार भूमि को वापस अपने कब्जे में लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और सपा संगठन को कार्यालय खाली करने के लिए बार-बार कानूनी नोटिस भी तामील कराए थे।
जिलाधिकारी के ’15 दिनों के अल्टीमेटम’ के बाद खाली हुई थी इमारत
सीतापुर के जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बीती 6 जून को समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष छत्रपाल सिंह यादव को एक अंतिम आदेश जारी किया था। इस बेदखली नोटिस में सपा नेतृत्व को स्पष्ट रूप से 15 दिनों के भीतर पूरी इमारत को खाली करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया था। प्रशासन की ओर से बढ़ते कानूनी दबाव और नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने के बाद, समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों ने अपनी रणनीति बदलते हुए दो दिन पहले ही गुपचुप तरीके से कार्यालय के भीतर रखा अपना सारा संगठनात्मक सामान, दस्तावेज और फर्नीचर वहां से हटाकर इमारत को पूरी तरह खाली कर दिया था।
सपा जिलाध्यक्ष की दलील: “हमने प्रशासन के आदेश का सम्मान करते हुए 18 जून को ही दफ्तर की बिल्डिंग को पूरी तरह खाली कर दिया था और इसकी लिखित सूचना जिला प्रशासन को दे दी थी। चूंकि इस भव्य इमारत का निर्माण पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के चंदे से हुआ था, इसलिए हमने जिलाधिकारी से सिर्फ इतनी मांग की थी कि हमें खुद इस इमारत का मलबा और कीमती निर्माण सामग्री हटाने की अनुमति दी जाए। लेकिन प्रशासन ने हमें मौका दिए बिना ही तड़के बुलडोजर चला दिया।”
सुरक्षा का कड़ा पहरा: विरोध की आशंका के बीच तड़के अंजाम दिया गया ऑपरेशन
सोमवार सुबह जब पांच बुलडोजरों ने एक साथ इमारत पर प्रहार करना शुरू किया, तो किसी भी संभावित राजनीतिक विरोध या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए टाउन हॉल परिसर को छावनी में बदल दिया गया था। पीएसी (PAC) और कई थानों की पुलिस फोर्स ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर रखा था। तड़के सुबह की गई इस कार्रवाई के चलते विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के किसी भी बड़े नेता या कार्यकर्ता को संभलने का मौका नहीं मिला। ध्वस्तीकरण की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौके पर सपा का कोई भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराने के लिए मौजूद नहीं था। प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी से कुछ ही घंटों में सरकारी जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराकर अपने नियंत्रण में ले लिया।





















































