लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने न जाने कितने हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है, लेकिन इस त्रासदी के बीच से एक ऐसी प्रेम कहानी भी सामने आई है जिसका अंत बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला रहा। एक ही दफ्तर में काम करते हुए चार साल पहले शुरू हुआ दो दिलों का सफर, जो जल्द ही पवित्र विवाह के बंधन में बंधने वाला था, वह आग की बेकाबू लपटों और धुएं के गुबार में हमेशा-हमेशा के लिए थम गया। इस खौफनाक हादसे में 29 वर्षीय प्रतिभावान 3D डिजाइनर नीलेश और उनकी मंगेतर की एक साथ मौत हो गई। जिस घर में कुछ दिनों बाद शादी की शहनाइयां गूंजने वाली थीं, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा हुआ है।
शादी की तैयारियों के बीच पसरा सन्नाटा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
नीलेश अपने पूरे परिवार की उम्मीदों का मुख्य आधार थे। उनके असमय चले जाने से बूढ़ी मां की आंखों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं, पिता गहरे सदमे में बेसुध हैं और लाडली बहन बार-बार अपने भाई की पुरानी यादों को समेटकर फूट-फूटकर रो रही है।
नीलेश के बड़े भाई ने अत्यंत भावुक मन से उस खौफनाक रात को याद करते हुए बताया, “मेरे पास किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से एक अंजान फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने सिर्फ इतना कहा कि कोई बड़ी अप्रिय घटना हो गई है, लेकिन वे पूरी बात बताने की हिम्मत नहीं जुटा सके। जब हम बदहवास हालत में अस्पताल पहुंचे, तो वहां डॉक्टरों ने हमें बताया कि नीलेश अब इस दुनिया में नहीं रहा।”
3D डिजाइनिंग में बना रहे थे करियर, एक ही दफ्तर में हुआ था प्यार
नीलेश के भाई ने रोते हुए बताया कि उनका भाई एक बेहद होनहार 3D डिजाइनर था, जो गेमिंग इंडस्ट्री के लिए विभिन्न प्रकार के कैरेक्टर्स और प्रॉप्स तैयार करता था। उसकी मंगेतर भी उसी संस्थान में एक कुशल डिजाइनर के रूप में कार्यरत थी। दोनों पिछले चार वर्षों से एक ही ऑफिस में साथ काम कर रहे थे। इसी दौरान दोनों में प्यार हुआ और परिवारों की रजामंदी के बाद दोनों की शादी तय हो चुकी थी।
हादसे के वक्त व्यावसायिक इमारत के निचले हिस्से में अचानक आग भड़क उठी, जिसके कारण ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता भी बंद हो गया। दम घुटने और आग की चपेट में आने से नीलेश और उनकी होने वाली जीवनसंगिनी दोनों ने एक साथ दम तोड़ दिया।
“10 साल पहले अवैध घोषित थी बिल्डिंग, फिर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?”
इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतक नीलेश के परिजनों ने स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए हैं। भाई का आरोप है कि जिस व्यावसायिक परिसर में यह अवैध गतिविधियां चल रही थीं, उसे प्रशासनिक फाइलों में लगभग 10 वर्ष पहले ही अवैध घोषित किया जा चुका था।
परिजनों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “अगर यह इमारत एक दशक पहले ही अवैध पाई गई थी, तो इतने सालों तक इस पर सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई क्यों नहीं की गई? बहुमंजिला इमारत के भीतर आग बुझाने का एक भी चालू उपकरण मौजूद नहीं था।” इसके अलावा, परिजनों ने दमकल विभाग पर भी लेती-लतीफी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर पानी लेकर पहुंच जातीं, तो नीलेश समेत कई बेकसूर युवाओं को जिंदा बचाया जा सकता था।
प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी मौत का मंजर: “बायोमेट्रिक मशीन लॉक हो गई और फैल गया धुआं”
इस भीषण अग्निकांड में बाल-बाल बचे एक प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद आसिफ ने उस भयावह मंजर की आंखों देखी हकीकत बयां की। आसिफ ने बताया, “हम रोज की तरह दफ्तर के अंदर अपना काम कर रहे थे। तभी अचानक कुछ सहकर्मियों ने शोर मचाया कि नीचे शॉर्ट सर्किट की वजह से भयंकर आग लग गई है। हम सभी जान बचाने के लिए मुख्य दरवाजे की तरफ भागे, लेकिन तभी अचानक पूरी इमारत की बिजली गुल हो गई। बिजली कटते ही मुख्य द्वार पर लगी बायोमेट्रिक मशीन ने काम करना बंद कर दिया और दरवाजा पूरी तरह लॉक हो गया।”
आसिफ ने आगे बताया कि देखते ही देखते पूरी सीढ़ियों में घने काले धुएं का गुबार भर गया, जिससे सांस लेना असंभव हो गया था। कुछ लोगों ने सूझबूझ दिखाई और गीले तौलिए से अपना मुंह ढककर, कांच की खिड़कियां तोड़कर नीचे छलांग लगाई, जिससे उनकी जान बच सकी।
परिवार का इकलौता सहारा भी छिना, पीड़ितों ने की समाज से भावुक अपील
इस हादसे की एक और दर्दनाक दास्तां एक अन्य पीड़ित ने बयां की, जिसने इस अग्निकांड में अपनी सगी बहन को हमेशा के लिए खो दिया। रोते हुए भाई ने बताया, “दो साल पहले ही हमारे पूजनीय पिता का साया सिर से उठ गया था। उसके बाद मेरी बहन ही पूरे घर में अकेली कमाने वाली सदस्य थी, जो पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रही थी। अब हमारे घर का वह एकमात्र सहारा भी इस आग की भेंट चढ़ गया।”
इस झकझोर देने वाले हादसे के बाद सभी पीड़ित परिवारों ने आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स से एक बेहद मार्मिक और जरूरी अपील की है। परिजनों ने कहा है कि जब भी कभी ऐसा कोई बड़ा हादसा या संकट आए, तो लोग तमाशाबीन बनकर सिर्फ अपने मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त न हों, बल्कि स्थानीय स्तर पर घायलों को निकालने और राहत पहुंचाने के लिए आगे आएं। आपकी एक छोटी सी मानवीय मदद किसी तड़पते हुए व्यक्ति को जीवनदान दे सकती है।





















































