मुजफ्फरनगर – उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक ऐसी पहल की शुरुआत हुई है, जिसने धार्मिक आस्था और राजनीतिक चेतना को एक मंच पर ला खड़ा किया है। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने ‘गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा’ का शुभारंभ करते हुए गोमाता की सुरक्षा के लिए सशक्त कानून बनाने की मांग को प्रमुखता दी है। इस यात्रा के माध्यम से वे प्रदेश भर के मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं और उन्हें इस न्यायपूर्ण मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं।
कानून की कमी पर साधा निशाना
शंकराचार्य महाराज ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान देश के राजनीतिक दलों और नेतृत्व पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमने अपने मताधिकार का उपयोग करके जिन नेताओं को सत्ता सौंपी, उन्होंने गोमाता की रक्षा के लिए कोई ठोस और प्रभावी कानून नहीं बनाया। यह हम सभी के लिए अत्यंत निराशाजनक है।” उनका यह बयान उस समय आया है, जब देशभर में गोहत्या और गो तस्करी की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है।
शंकराचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी विशेष राजनीतिक दल के विरोध में नहीं है, बल्कि गोमाता के प्रति समर्पण और उनकी सुरक्षा के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “हम किसी दल से नहीं, बल्कि उस विचारधारा से लड़ रहे हैं, जिसने गौ रक्षा को अनदेखा किया है।”
सियासी समीकरणों से परे एक मिशन
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उनकी यह यात्रा किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित नहीं है। उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक रूप से इस यात्रा का समर्थन नहीं किया है, लेकिन पार्टी से जुड़े हिंदू सदस्य और गौमाता के भक्त अपनी आस्था और नैतिक मूल्यों के कारण इसमें शामिल हो रहे हैं।” यह बयान एक ऐसे समय में आया है, जब धार्मिक आंदोलनों को राजनीतिक रंग देने की कोशिशें की जाती रही हैं।
गो संरक्षण : सिर्फ धर्म नहीं, जीवनशैली
अपनी यात्रा के दौरान शंकराचार्य महाराज ने गो संरक्षण को एक बहुआयामी मुद्दा बताया। उन्होंने कहा, “गोमाता की रक्षा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।” उन्होंने सभी हिंदू समाज से अपील की कि वे अपनी आस्था को बनाए रखते हुए इस मिशन में शामिल हों और गोमाता की सुरक्षा के लिए एकजुट हों।
अयोध्या विवाद पर सीधी प्रतिक्रिया
शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर में हाल ही में हुए चंदा विवाद पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “अयोध्या में चोरी की घटनाएं नई नहीं हैं; राम मंदिर के निर्माण के दौरान भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं। चंपत राय ने भी कहा था कि इसमें असामान्य कुछ भी नहीं है।” उन्होंने इसे एक गंभीर विसंगति बताते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटनाओं को सामान्य मान लिया गया।
प्रदेशव्यापी जनसंपर्क अभियान
गोरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा के तहत शंकराचार्य महाराज पूरे उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं और आम जनता से संवाद कर रहे हैं। यह यात्रा आने वाले दिनों में और भी जिलों में पहुंचेगी, जहां वे लोगों से गो संरक्षण कानून के समर्थन में आवाज उठाने की अपील करेंगे। उनकी यह पहल न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को भी जगाने का प्रयास कर रही है।





















































