उत्तर प्रदेश में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले दवा माफियाओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की गई है। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कदम उठाते हुए, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने आगरा को केंद्र बनाकर एक महा-अभियान को अंजाम दिया है। इस चौंकाने वाली कार्रवाई में 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नकली, मियाद पूरी कर चुकी (एक्सपायर्ड) और सरकारी सप्लाई वाली दवाइयां बरामद की गई हैं। यह रेड इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनस्वास्थ्य से समझौता करने वाले किसी भी काले सिंडिकेट को बख्शा नहीं जाएगा।
ऑपरेशन की रूपरेखा और आला अधिकारियों का नेतृत्व
लगातार मिल रही गुप्त सूचनाओं के आधार पर, एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने इस पूरे हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन की कमान स्वयं संभाली। लखनऊ मुख्यालय द्वारा 25 अनुभवी औषधि निरीक्षकों (ड्रग इंस्पेक्टर्स) की विशेष टीमें गठित की गईं। इस प्रवर्तन अभियान को दो चरणों में बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। पहला चरण 22 से 24 मई 2026 के बीच चला, जबकि दूसरे और निर्णायक चरण का नेतृत्व 12 से 14 जून 2026 के बीच सीधे तौर पर डॉ. रोशन जैकब ने किया। इस दौरान आगरा शहर में फैले अवैध दवा कारोबार के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने का काम किया गया।
शहर के प्रमुख ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे और जब्ती
कार्रवाई के दौरान आगरा के उन सभी पॉश और प्रमुख व्यावसायिक इलाकों को खंगाला गया, जिन्हें दवा व्यापार का सुरक्षित गढ़ माना जाता था। खत्री गली, फव्वारा, संजय प्लेस, कमला नगर, झूलेलाल मार्केट और दयालबाग जैसे क्षेत्रों में स्थित 20 से अधिक दवा फर्मों और 12 बड़े गोदामों पर एक साथ दबिश दी गई। कई संदिग्ध आवासीय परिसरों की भी सघन तलाशी ली गई।
जांच टीमों ने मौके से भारी मात्रा में ऐसी दवाएं जब्त कीं, जिन्हें खुले बाजार में बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी है। इनमें शामिल हैं:
- सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित दवाएं
- डिफेंस सप्लाई के मेडिसिन बॉक्स
- ‘नॉट फॉर सेल’ (Not for Sale) वाले फिजिशियन सैंपल्स
- मरीजों की जान जोखिम में डालने वाली एक्सपायर्ड और नकली औषधियां
इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के परिणामस्वरूप अब तक 8 बड़े अवैध गोदामों को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।
6 एफआईआर दर्ज, आरोपियों पर कसता शिकंजा
इस बड़े भंडाफोड़ के बाद प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अब तक 6 अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट किया है कि प्रदेशवासियों को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले कुछ सप्ताहों के भीतर चले इस सघन जांच अभियान ने न केवल आगरा, बल्कि पूरे प्रदेश के दवा माफियाओं की नींद उड़ा दी है।
आगरा कैसे बना अवैध दवाओं का सबसे बड़ा ‘ट्रांजिट हब’?
जांच में यह भी बड़ा खुलासा हुआ है कि नकली दवाओं का यह जानलेवा नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। इसके तार देश के कई अन्य राज्यों से गहराई से जुड़े हुए हैं, जहां से ये संदिग्ध दवाएं यूपी में धकेली जाती हैं।
डॉ. रोशन जैकब के अनुसार, उत्तर प्रदेश अपनी विशाल आबादी के कारण देश का सबसे बड़ा दवा बाजार है। बेहतरीन एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से निकटता और थोक व खुदरा दवा वितरण का मजबूत नेटवर्क अवैध कारोबारियों को यहां अपना बेस बनाने के लिए आकर्षित करता है। इसी भौगोलिक लाभ के चलते आगरा इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य ‘ट्रांजिट और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर’ बन चुका था। यहीं से दवाओं की यह जहरीली खेप लखनऊ, कानपुर सहित प्रदेश के अन्य बड़े शहरों के बाजारों तक धड़ल्ले से पहुंचाई जा रही थी। इसी रणनीति को समझते हुए एफएसडीए पिछले लंबे समय से आगरा पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए था, जिसके परिणामस्वरूप इस काले साम्राज्य को ध्वस्त किया जा सका।





















































