उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर से एक बेहद हैरान करने वाला और रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है, जहां दोस्ती के पावन रिश्ते को कलंकित करते हुए एक शख्स ने चंद गहनों की खातिर अपने ही सबसे करीबी मित्र की बेरहमी से हत्या कर दी। नवाबगंज थाना क्षेत्र में हुए इस हाई-प्रोफाइल और पेचीदा ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी को कानपुर पुलिस ने महज 4 दिनों के भीतर सुलझाकर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कातिल ने अपनी पहचान छिपाने और कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए बाकायदा महिला का वेश धारण कर बुर्का पहना था, लेकिन पुलिस की पैनी नजरों और वैज्ञानिक जांच के आगे उसकी यह शातिराना चाल धरी की धरी रह गई।
बीच रात में वारदात और पुलिस कमिश्नर का एक्शन
इस खूनी वारदात की पटकथा 30 और 31 मई की दरमियानी रात को लिखी गई थी, जब नवाबगंज इलाके के रहने वाले मशहूर कोचिंग संचालक प्रकाश चन्द्र गुप्ता की उनके ही ठिकाने पर बेहद क्रूरता के साथ हत्या कर दी गई। सुबह जब इस घटना की जानकारी आम हुई, तो पूरे शहर में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता और वीभत्सता को भांपते हुए कानपुर के पुलिस आयुक्त ने बिना किसी देरी के सख्त कदम उठाए। उन्होंने डीसीपी सेंट्रल की सीधी देखरेख में पुलिस महकमे के सबसे काबिल अफसरों को मिलाकर कुल 10 विशेष कमेटियों व टीमों का गठन किया, जिन्हें हर हाल में जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचने का अल्टीमेटम दिया गया था।
500 से अधिक कैमरों की जांच और पुलिस की मैराथन दौड़
यह पूरी तरह से एक अंधा कत्ल (Blind Murder) था, जहां शुरुआत में पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली थे और कातिल का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। जांच टीमों ने तफ्तीश का दायरा बढ़ाते हुए इलाके के चप्पे-चप्पे को खंगालना शुरू किया। पुलिस ने नवाबगंज और उसके आसपास के रास्तों पर लगे 500 से ज्यादा सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की रिकॉर्डिंग्स और फुटेज को बारीकी से देखा।
कई रातों तक बिना सोए पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट्स, सर्विलांस डेटा और वैज्ञानिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। आखिरकार, तकनीकी सबूतों की कड़ियों को एक-दूसरे से जोड़ने के बाद कत्ल के इस घिनौने खेल के पीछे छिपे असली चेहरे का पर्दाफाश हो गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्या के मुख्य सूत्रधार मोहित द्विवेदी (उम्र 43 वर्ष) को धर दबोचा।
15 साल पुरानी दोस्ती पर भारी पड़ा सोने का लालच
पुलिसिया पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों को भी स्तब्ध कर दिया। पकड़ा गया कातिल मोहित द्विवेदी कोई अजनबी नहीं, बल्कि मृतक प्रकाश चन्द्र गुप्ता का पिछले 15 सालों से सबसे भरोसेमंद और जिगरी दोस्त था। वह अक्सर प्रकाश के साथ समय बिताता था और उसकी हर गतिविधि से वाकिफ था। काफी समय से मोहित की नीच नजर प्रकाश चन्द्र गुप्ता द्वारा पहने जाने वाले कीमती आभूषणों, विशेषकर उनकी सोने की भारी-भरकम चेन और ब्रेसलेट पर टिकी हुई थी।
कर्ज या विलासिता की वजह से उन आभूषणों को हड़पने के लिए मोहित ने एक खौफनाक और सुनियोजित साजिश रची। उसने सोचा कि अगर वह पुरुष के वेश में जाएगा, तो पकड़ा जाएगा। इसलिए उसने बाजार से एक बुर्का, लेडीज दुपट्टा, दस्ताने और महिलाओं वाला बैग खरीदा। वारदात वाली रात उसने महिला का रूप धारण किया, बुर्का ओढ़ा और कोचिंग संचालक के पास पहुंचकर उनका कत्ल कर दिया। इसके बाद वह शव के पास से सोने की चेन और ब्रेसलेट लूटकर बड़ी आसानी से फरार हो गया था।
हत्या में प्रयुक्त सामान बरामद और पुलिस टीम को इनाम
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी मोहित द्विवेदी के पास से लूटी गई शत-प्रतिशत संपत्ति यानी मृतक प्रकाश चन्द्र गुप्ता की सोने की चेन और ब्रेसलेट सकुशल बरामद कर लिए हैं। इसके अलावा, पुलिस ने उसके गुप्त ठिकाने से वह बुर्का, लेडीज बैग, दस्ताने और दुपट्टा भी जब्त कर लिया है, जिसे पहनकर वह वारदात करने गया था। कातिल के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया एक अवैध तमंचा, जिंदा कारतूस और अन्य आपत्तिजनक सामान भी हाथ लगा है।
कानपुर पुलिस के आला अफसरों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ हत्या, लूट और आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजने की विधिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इस पेचीदा और सनसनीखेज हत्याकांड का इतनी तेजी से सफल अनावरण करने पर पुलिस आयुक्त ने जांच में शामिल सभी 10 टीमों की पीठ थपथपाई है। उन्होंने पूरी पुलिस टीम के उत्साहवर्धन के लिए 50 हजार रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा भी की है। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक के बेहतरीन तालमेल की वजह से ही इस शातिर अपराधी को समय रहते सलाखों के पीछे पहुंचाना मुमकिन हो सका।





















































