उत्तर प्रदेश की बेहद जटिल और पल-पल रंग बदलती राजनीति में सत्ता के कई दौर आए और चले गए। दर्जनों मुख्यमंत्री आए, सरकारें बदलीं और कई राजनीतिक समीकरण बने व बिगड़े। परंतु, वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सियासत में एक ऐसा नया इतिहास रच दिया है जो अद्वितीय है। वे उत्तर प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में लगातार सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने वाले एकमात्र राजनेता बन चुके हैं। उनके 54वें जन्मदिवस के विशेष अवसर पर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच उनके इस अभूतपूर्व सफर और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स की चर्चा एक बार फिर से बेहद तेज हो गई है।
गोरक्षपीठ से देश की सबसे बड़ी संसद तक का सफर
योगी आदित्यनाथ की शुरुआती पहचान गोरखपुर स्थित ऐतिहासिक गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर और एक प्रखर धार्मिक गुरु के रूप में रही है। अध्यात्म के रास्ते से निकलकर उन्होंने जब राजनीति की मुख्यधारा में कदम रखा, तो वहां भी अपनी कार्यशैली से एक बहुत बड़ी और अमिट लकीर खींच दी। साल 1998 में उन्होंने पहली बार देश की संसद में कदम रखा, जब वे गोरखपुर लोकसभा सीट से भारी बहुमत के साथ चुनाव जीतकर देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार पांच बार गोरखपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में अपनी जगह पक्की कर ली। मार्च 2017 में जब भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, तो आलाकमान ने उत्तर प्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में सौंप दी।
कड़े प्रशासनिक फैसले और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प
मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने कानून-व्यवस्था को अपनी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता बनाया और अपराधियों के खिलाफ अत्यंत सख्त रवैया अपनाया। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य के आर्थिक विकास के लिए बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स (Infrastructure Projects) पर तेजी से काम शुरू किया। उनके शासनकाल में बने शानदार एक्सप्रेस-वे, नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स, डिफेंस कॉरिडोर, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और विशाल औद्योगिक परियोजनाओं ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकालकर विकासशील राज्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया है।
तीन दशकों का मिथक तोड़ा और रचा नया इतिहास
साल 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। लगभग तीन दशकों के बाद उत्तर प्रदेश की जनता ने किसी एक दल को लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत देकर सत्ता की चाबी सौंपी और योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए।
अपने इस निरंतर कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वतंत्र भारत में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे महान स्वतंत्रता सेनानी गोविंद बल्लभ पंत के सबसे लंबे समय तक लगातार मुख्यमंत्री रहने के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। इस मील के पत्थर को छूने के साथ ही उनका नाम उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। आज योगी आदित्यनाथ के नाम लगातार सबसे अधिक समय तक यूपी का मुख्यमंत्री रहने का कीर्तिमान दर्ज है।
अजेय सफर और 2027 की सियासी तैयारियां
एक तरफ जहां उनके समर्थक उन्हें बेहतर सुशासन, भारी विदेशी निवेश लाने वाले और अपराध पर पूर्ण नियंत्रण लगाने वाले एक सशक्त राजनेता के रूप में देखते हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष उनकी कड़े फैसलों वाली कार्यशैली और प्रशासनिक नीतियों पर लगातार सवाल उठाता रहा है। इन तमाम राजनीतिक वैचारिक मतभेदों के बावजूद यह बात पूरी तरह से सच है कि यूपी की धरती पर योगी ने जो कीर्तिमान स्थापित किया है, उसे आने वाले समय में पार कर पाना किसी भी दल के नेता के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
गोरक्षपीठ के साथ लगभग ढाई दशकों से जुड़े वरिष्ठ जानकार गिरीश कुमार पांडेय का इस संदर्भ में कहना है कि योगी आदित्यनाथ ने सूबे की सियासत की पूरी परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है। विकास का कोई भी क्षेत्र हो, उन्होंने अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों की तुलना में बहुत लंबी लकीर खींची है। वास्तव में, योगी को शीर्ष स्थान यानी ‘नंबर वन’ से कम कुछ भी पसंद नहीं है और इसे हासिल करने के लिए वे स्वयं को पूरी तरह से काम में झोंक देते हैं। सांसद रहने के दौरान भी देश की एक प्रतिष्ठित पत्रिका ने उन्हें देश के सबसे रसूखदार लोगों की सूची में शामिल किया था। मठ की गौरवशाली परंपरा के अनुसार अंधविश्वास और रूढ़िवादी मिथकों को तोड़ना उनकी पुरानी आदत रही है। वर्ष 1998 में राजनीति में प्रवेश करने के बाद से वे अपने मूल नाम ‘अजय’ की तरह ही अब तक पूरी तरह से ‘अजेय’ बने हुए हैं। फिलहाल, वर्ष 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच योगी आदित्यनाथ आज भी भारतीय जनता पार्टी के सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय नेताओं की सूची में शीर्ष पर गिने जा रहे हैं।





















































