उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, चुस्त और पारदर्शी बनाने के मकसद से पुलिस प्रशासन में एक व्यापक बदलाव किया है। शासन के गृह विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आदेश के मुताबिक, प्रदेश भर में प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के 206 अधिकारियों के तत्काल प्रभाव से तबादले कर दिए गए हैं। हाल के दिनों में इसे पुलिस महकमे का सबसे बड़ा प्रशासनिक स्थानांतरण माना जा रहा है, जिसका सीधा असर राज्य के 65 जिलों की पुलिसिंग व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।
डिप्टी एसपी और सीओ स्तर के अधिकारियों में भारी बदलाव
शासन की ओर से जारी इस विस्तृत तबादला सूची में मुख्य रूप से पुलिस उपाधीक्षक (डिप्टी एसपी) और विभिन्न जनपदों में तैनात क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है। सरकार की स्पष्ट मंशा है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्यकुशलता को और अधिक धारदार बनाया जाए। इस बड़े फेरबदल के तहत कई तेज-तर्रार अफसरों को चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कई अन्य अधिकारियों को उनके वर्तमान कार्यक्षेत्र से हटाकर नई इकाइयों में भेजा गया है।
कमिश्नरेट, पीएसी और सीआईडी तक व्यापक फेरबदल
इस स्थानांतरण प्रक्रिया के तहत केवल जिलों के थानों या सर्किल प्रभारियों में ही फेरबदल नहीं हुआ है, बल्कि पुलिस विभाग की अन्य अति-महत्वपूर्ण इकाइयों के ढांचे में भी बदलाव किया गया है। शासन ने कई अधिकारियों को सामान्य जिला पुलिस के ढांचे से निकालकर आधुनिक पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में तैनात किया है। वहीं, दूसरी ओर पीएसी (PAC) की विभिन्न बटालियनों, सीआईडी (CID), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और अन्य विशेष सुरक्षा इकाइयों में भी नई और अहम नियुक्तियां की गई हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री सुरक्षा घेरे, राज्य पुलिस मुख्यालय, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों (ट्रेनिंग सेंटर्स) और खुफिया तथा विशेष शाखाओं में भी अफसरों को नई जिम्मेदारी दी गई है।
लखनऊ, नोएडा और वाराणसी समेत इन वीआईपी जिलों पर फोकस
जिन 65 जनपदों में अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है, उनमें प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख महानगर, कमिश्नरेट और संवेदनशील जिले शामिल हैं। राजधानी लखनऊ, औद्योगिक शहर कानपुर नगर, धर्मनगरी वाराणसी और अयोध्या के साथ-साथ ताजनगरी आगरा, गाजियाबाद, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, झांसी, बरेली और हाई-टेक सिटी नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) जैसे वीआईपी जिलों में तैनात अधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं।
कानून-व्यवस्था को अभेद्य बनाने की रणनीति
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि राज्य में अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति को बनाए रखने और प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से यह व्यापक कदम उठाया गया है। इस बदलाव से पुलिस की कार्यप्रणाली में तेजी और नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। गृह विभाग की ओर से सभी स्थानांतरित 206 पीपीएस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी विलंब के अपने-अपने नए तैनाती स्थलों पर पहुंचकर तत्काल अपना कार्यभार ग्रहण करें।













































