उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के शहरी परिवहन ढांचे में एक बड़ी और ऐतिहासिक क्रांति लाने का फैसला किया है। प्रदेश के शहरों को स्मार्ट, सुरक्षित और इको-फ्रेंडली (पर्यावरण के अनुकूल) बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, यूपी कैबिनेट ने 18 प्रमुख शहरों में 1725 नई वातानुकूलित (एसी) इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को हरी झंडी दे दी है। बीते बुधवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई अहम कैबिनेट बैठक में इस महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य आम जनता के सफर को न केवल अत्याधुनिक और आरामदायक बनाना है, बल्कि प्रदेश के बढ़ते प्रदूषण स्तर पर भी प्रभावी लगाम कसना है।
इन 18 प्रमुख शहरों को मिलेगी यह बड़ी सौगात
परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की इस महायोजना का लाभ राज्य के 18 अहम शहरों को मिलेगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस सूची में ताजनगरी आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, औद्योगिक शहर कानपुर, राजधानी लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, धर्मनगरी वाराणसी और नोएडा (जेवर सहित) शामिल हैं। इन सभी शहरों की सड़कों पर 9 मीटर और 12 मीटर की श्रेणी वाली कुल 1725 अत्याधुनिक एसी इलेक्ट्रिक बसें उतारी जाएंगी, जिससे दैनिक यात्रियों को वर्ल्ड-क्लास सफर का अनुभव मिलेगा।
निजी ऑपरेटरों के हाथ होगी कमान, लागू होगा जीसीसी (GCC) मॉडल
कैबिनेट बैठक के बाद प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकार ने कुल 24 प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दी है, जिनमें यह ई-बस प्रोजेक्ट सबसे अहम है। इन नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन ‘सकल लागत अनुबंध’ यानी ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल के तहत निजी ऑपरेटरों द्वारा किया जाएगा। इस अनुबंध की समय-सीमा बसों के कमर्शियल संचालन की तारीख से अगले 12 वर्षों तक निर्धारित की गई है।
जीसीसी (GCC) मॉडल की खासियत यह है कि इसमें बसों की खरीद से लेकर उनके चार्जिंग स्टेशन बनाने, कुशल चालकों व तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति, और बसों के दैनिक संचालन व रखरखाव (मेंटेनेंस) की पूरी जिम्मेदारी संबंधित निजी संचालक (Private Operator) की ही होगी।
डिपो के लिए मिलेगी मुफ्त जमीन, सरकार देगी बंपर सब्सिडी
योजना को आकर्षक और व्यावहारिक बनाने के लिए योगी सरकार निजी ऑपरेटरों को भारी भरकम आर्थिक अनुदान (सब्सिडी) भी मुहैया कराएगी। तय मानकों के अनुसार, 12 मीटर लंबी ई-बस पर 40 लाख रुपये और 9 मीटर लंबी ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस की दर से अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा, बस ऑपरेटरों को उनके संचालन और रखरखाव के तय मानकों के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
इस पूरी परियोजना के लिए सबसे जरूरी चीज यानी डिपो के निर्माण के लिए संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा ऑपरेटरों को बिल्कुल मुफ्त (निःशुल्क) जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, यात्रियों की जेब पर बेवजह का बोझ न पड़े, इसके लिए बसों का किराया (Fare) और उपयोगकर्ता शुल्क तय करने का पूरा अधिकार राज्य सरकार के ही पास सुरक्षित रहेगा।
प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति, सरकारी खजाने पर भी घटेगा बोझ
इस योजना के दूरगामी परिणाम बेहद सकारात्मक होने वाले हैं। एक तरफ जहां भारी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों के चलने से शहरों में कार्बन उत्सर्जन घटेगा और हवा साफ होगी, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों को समयबद्ध, सुरक्षित और आरामदायक सफर की गारंटी मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इस योजना में निजी क्षेत्र के निवेश (Private Investment) से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला वित्तीय भार काफी हद तक कम हो जाएगा और शहरों में एक मजबूत आधुनिक परिवहन तंत्र विकसित होगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के 15 नगर निगम क्षेत्रों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा फिलहाल 743 इलेक्ट्रिक बसों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है, और अब 1725 नई बसों के जुड़ने से यूपी का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह से हाईटेक हो जाएगा।













































