उत्तर प्रदेश में जून 2026 से बिजली उपभोक्ताओं पर लगने वाले 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज को लेकर सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस फैसले को जनता की जेब पर डाका करार देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक शिकायती पत्र भेजा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि भीषण गर्मी और रिकॉर्डतोड़ महंगाई से त्रस्त जनता पर यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिजली की कीमतों पर यूपी में नया सियासी घमासान
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही बड़ा आर्थिक झटका लगने वाला है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा जून 2026 से बिजली बिलों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) वसूलने की तैयारी की जा रही है। इस फैसले ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कदम को आम आदमी और किसानों के खिलाफ बताते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
अजय राय ने सीएम योगी को लिखा पत्र: फैसले को बताया जनविरोधी
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने शनिवार को इस मुद्दे पर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक आधिकारिक पत्र भेजा। अपने पत्र में उन्होंने सरकार के इस निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। अजय राय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी राज्य के किसानों और आम उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने मांग की है कि इस जनविरोधी फैसले को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, क्योंकि यह मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ने वाला कदम है।
महंगाई की मार और ऊपर से फ्यूल सरचार्ज का नया ‘करंट’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य के आर्थिक हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता पहले से ही आसमान छूती महंगाई से त्रस्त है। देश और प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस सिलेंडर और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, बिजली जैसी मूलभूत सुविधा पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त सरचार्ज थोपना आम जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों के किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट पर पड़ेगा।
24 घंटे बिजली का दावा बनाम अघोषित कटौती का सच
योगी सरकार पर निशाना साधते हुए अजय राय ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ मंचों से 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति (Uninterrupted Power Supply) के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। खुद राज्य की राजधानी लखनऊ के कई इलाकों में रोजाना घंटों अघोषित बिजली कटौती हो रही है। वीवीआईपी इलाकों का यह हाल है तो ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों की बदहाली का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है, जहां लोग इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद बिजली को तरस रहे हैं।
स्मार्ट मीटर विवाद और बुनियादी ढांचे की विफलता
अजय राय ने अपने बयान में यूपी की बिजली वितरण व्यवस्था (Power Distribution System) की कमियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि पूरे सूबे में ट्रांसफार्मर का समय पर न बदलना, फीडर फेल होना और जर्जर तारों के चलते आए दिन आपूर्ति बाधित रहना एक आम बात हो गई है। इसके साथ ही, राज्य भर में चल रहे स्मार्ट मीटर विवाद (Smart Meter Dispute) ने उपभोक्ताओं को मानसिक रूप से परेशान कर रखा है। लोग गलत और बढ़े हुए बिलों की शिकायतों को लेकर बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
विद्युत नियामक आयोग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) की कार्यशैली भी कांग्रेस के निशाने पर रही। अजय राय ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस संस्था का मुख्य उद्देश्य बिजली कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। परंतु, ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग केवल बिजली कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों और उपभोक्ताओं की वाजिब शिकायतों पर आयोग द्वारा अब तक कोई ठोस या अपेक्षित राहत नहीं दी जा सकी है।
यूपी में 10% फ्यूल सरचार्ज का यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक बड़ा जन-आंदोलन और राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतें किफायती दरों पर मिलना जनता का अधिकार है। सरकार को केवल कागजी घोषणाओं और दावों से आगे बढ़कर बिजली विभाग में पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक सुधार लाने की जरूरत है। यदि समय रहते इस अतिरिक्त भार को वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा सड़क से लेकर सदन तक सरकार के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।



















































