वैश्विक तनाव के बीच देश में ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल आया है, जिसने आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाला है। लगातार बढ़ते दामों से जहां एक तरफ नाराजगी है, वहीं दूसरी तरफ देशहित और सुरक्षा को सर्वोपरि मानकर जनता का एक वर्ग सरकार के फैसलों के साथ भी खड़ा नजर आ रहा है।
- दामों में भारी बढ़ोतरी: पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा।
- 10 दिनों का संकट: पिछले महज 10 दिनों के भीतर ईंधन के दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
- राजधानी का हाल: दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
- वैश्विक कारण: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध व अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल को बताया जा रहा है मुख्य वजह।
- जनता की राय: कीमतों में बढ़ोतरी पर जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया, कुछ ने जताया विरोध तो कुछ ने कहा- ‘संकट में सरकार का साथ जरूरी’।
वैश्विक महासंकट के बीच आम जनता पर बढ़ा आर्थिक बोझ
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव और वैश्विक राजनीतिक संकट का सीधा असर अब भारत के आम नागरिकों की जेब पर दिखने लगा है। शनिवार की सुबह देश के मध्यमवर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बार फिर महंगाई का झटका लेकर आई। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया है।
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें अपने नए शिखर पर पहुंच गई हैं। पिछले 10 दिनों का गणित देखें तो जनता पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त भार डाला जा चुका है, जिससे परिवहन से लेकर रोजमर्रा की अन्य आवश्यक वस्तुओं के महंगे होने का खतरा भी मंडराने लगा है।
वैश्विक युद्ध और पीएम मोदी की गंभीरता: यूपी सरकार के मंत्री का दावा
ईंधन की इस बेलगाम होती रफ्तार पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने आईएएनएस से खास बातचीत की। उन्होंने इस संकट के पीछे के अंतरराष्ट्रीय कारणों को रेखांकित करते हुए कहा कि पूरा देश इस बात से वाकिफ है कि इस समय अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी गंभीर स्थिति बनी हुई है। इस वैश्विक तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।
मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने जनता को भरोसा दिलाते हुए आगे कहा:
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे घटनाक्रम और देश की आर्थिक स्थिति को लेकर बेहद गंभीर हैं। वे लगातार हालातों पर नजर बनाए हुए हैं और निश्चित तौर पर ऐसी पुख्ता व्यवस्था करेंगे, जिससे देश के भीतर कोई बड़ा आर्थिक संकट खड़ा न हो।”
‘देश के साथ खड़ा होने का वक्त’: आम जनता के बदले सुर
आमतौर पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर सड़कों पर तीखा विरोध देखने को मिलता है, लेकिन इस बार लखनऊ के पेट्रोल पंपों पर पहुंचे आम नागरिकों की राय थोड़ी जुदा और चौंकाने वाली रही। पेट्रोल लेने आए चंदन पांडेय ने इस वैश्विक संकट को स्वीकार करते हुए कहा कि पेट्रोल के दाम बढ़ने से लोगों पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है।
चंदन पांडेय के मुताबिक, “जिस तरह का वैश्विक संकट इस समय बना हुआ है, उसे देखते हुए कुछ दिन पहले लोग काफी घबराए हुए थे कि कहीं ईंधन मिलना ही बंद न हो जाए। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय दबाव और ऊपर से ही दाम बढ़ाए जा रहे हैं, तो हमें सरकार की मजबूरी को समझना चाहिए और इसका समर्थन करना चाहिए। यह वक्त राजनीति का नहीं, बल्कि सरकार और देश के साथ मजबूती से खड़े होने का है।”
मजबूरी, सुरक्षा और जनता की सहूलियत का सवाल
वहीं, इस मामले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देते हुए विनय कुमार शर्मा ने थोड़ी असहमति जरूर जताई, लेकिन फैसले को स्वीकार भी किया। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में इस तरह बार-बार बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए थी, क्योंकि इससे आम बजट बिगड़ता है। लेकिन अगर वैश्विक हालातों के कारण दाम बढ़ ही रहे हैं तो आम जनता कर भी क्या सकती है? विनय ने उम्मीद जताई कि सरकार जो भी कदम उठा रही है, वह देश और जनता के व्यापक हित में ही होगा। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि सरकार को अब आम जनता की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली आर्थिक राहत के बारे में भी गंभीरता से सोचना चाहिए।
दूसरी तरफ, ईंधन भराने आए अमन पासवान ने सीधे तौर पर जनता की सहूलियत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक संकट से निपटे, लेकिन कोई भी नया नियम या नीति बनाते समय इस बात का खास ख्याल रखा जाना चाहिए कि उससे जमीन पर रहने वाले आम आदमी की सहूलियतें प्रभावित न हों। वहीं विवेक नाम के एक अन्य नागरिक ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए कहा कि दाम चाहे जो भी हों, अगर किसी को काम से बाहर जाना है तो उसे गाड़ी में तेल डलवाना ही पड़ेगा। इस मजबूरी पर ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।
आंकड़ों की जुबानी: 10 दिनों में ₹5 का बड़ा झटका
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो शनिवार को सरकारी तेल कंपनियों द्वारा की गई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर आ गया है। इस बार पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की एकमुश्त वृद्धि की गई है।
शहर पेट्रोल की नई कीमत (प्रति लीटर) डीजल की नई कीमत (प्रति लीटर)
दिल्ली 99.51 रुपये 92.49 रुपये
पिछले 10 दिनों के भीतर लगातार हुए बदलावों के कारण यह कुल बढ़ोतरी लगभग 5 रुपये प्रति लीटर तक जा पहुंची है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय खुदरा बाजार पर पड़ेगा।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आई यह हालिया तेजी केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम आदमी की रसोई और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। हालांकि, इस बार जनता का एक बड़ा हिस्सा वैश्विक युद्ध और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को समझते हुए परिपक्वता दिखा रहा है। अब गेंद पूरी तरह से केंद्र सरकार के पाले में है कि वह एक तरफ वैश्विक मोर्चे पर देश के हितों की रक्षा कैसे करती है, और दूसरी तरफ घरेलू बाजार में टैक्स में कटौती या अन्य उपायों के जरिए अपने नागरिकों को महंगाई के इस तगड़े झटके से कैसे राहत पहुंचाती है।




















































