समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्ताधारी भाजपा पर ‘आरक्षण व्यवस्था’ को खोखला करने का गंभीर आरोप लगाते हुए एक बड़ा सियासी दांव चला है। बुधवार को ‘पीडीए ऑडिट रिपोर्ट’ जारी करते हुए अखिलेश ने कहा कि मौजूदा सरकार में ‘NFS’ (Not Found Suitable) जैसे भ्रामक नारों की आड़ में पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के हक छीने जा रहे हैं। उनका यह सीधा हमला बताता है कि आगामी चुनावों में सामाजिक न्याय और आरक्षण सबसे बड़े मुद्दे बनने जा रहे हैं।
दस्तावेज जारी: सपा प्रमुख ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘आरक्षण की लूट पर पीडीए ऑडिट’ नामक विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
NFS का खेल: अखिलेश ने आरोप लगाया कि योग्य उम्मीदवारों को ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ बताकर पिछले दरवाजे से चहेतों को नौकरियां बांटी जा रही हैं।
न्यायपालिका की शरण: संवैधानिक अधिकारों के हनन के चलते युवाओं और छात्रों को मजबूरन अदालतों का रुख करना पड़ रहा है।
बुलडोजर पर तंज: सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि बुलडोजर चलाना ही है, तो असमानता की खाई को पाटने के लिए चलाएं।
PDA का विस्तार: जून 2023 में गढ़े गए ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के आंकड़े भविष्य में और भी पुख्ता किए जाएंगे।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को उत्तर प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला। लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने ‘आरक्षण की लूट पर पीडीए ऑडिट’ नाम से एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की। अखिलेश ने रोजगार और नियुक्तियों में हो रही धांधली की ओर इशारा करते हुए कहा कि वर्चस्ववादी ताकतें एक सोची-समझी साजिश के तहत आरक्षण को खत्म करने पर आमादा हैं।
उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में ‘NFS’ यानी ‘उपयुक्त नहीं पाया गया’ (Not Found Suitable) के बढ़ते इस्तेमाल को एक बड़ा घोटाला करार दिया। सपा अध्यक्ष के मुताबिक, जानबूझकर यह भ्रामक नारा फैलाया जा रहा है ताकि आरक्षित वर्गों की सीटें खाली छोड़ी जा सकें और बाद में वैचारिक रूप से करीब लोगों को पिछले दरवाजे (बैकडोर) से नौकरियां दी जा सकें। उन्होंने इसे भाजपा का सबसे बड़ा ‘छल’ बताया।
संविधान के बजाय अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर युवा
मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था और शासन की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को समानता और न्याय का अधिकार देता है। लेकिन आज हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि छात्रों और बेरोजगार युवाओं को अपने ही संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर किसी भी युवा को अपने हकों के लिए अदालत का रुख करना पड़े, तो यह समझ लेना चाहिए कि सरकार पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है। और जो सत्ता पक्षपाती होती है, वह जनता के लिए विश्वासघाती भी होती है।” अखिलेश ने यह भी चिंता जताई कि सरकार अब न्यायपालिका जैसे तीसरे और स्वतंत्र पक्ष को भी प्रभावित करने की हद तक जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
‘पीडीए’ की ताकत और सामाजिक न्याय की लड़ाई
जून 2023 में अखिलेश यादव द्वारा गढ़ा गया ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) शब्द अब सपा की कोर रणनीति का हिस्सा बन चुका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर जोर दिया गया कि भाजपा असमानता के खिलाफ सदियों पुरानी इस लड़ाई को अनुचित और गैर-लोकतांत्रिक तरीकों से जीतना चाहती है। अखिलेश ने वादा किया कि इस ‘पीडीए ऑडिट रिपोर्ट’ को लगातार अपडेट किया जाएगा और भविष्य में इसमें और भी अधिक चौंकाने वाले आंकड़े शामिल किए जाएंगे, ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके।
बुलडोजर का सही इस्तेमाल करे सरकार
संसद में अपनी पार्टी का नेतृत्व कर रहे अखिलेश यादव ने आरक्षण को महज एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि ‘सामाजिक न्याय, सुरक्षा और समानता’ का सबसे बड़ा साधन बताया। यूपी सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर गहरा तंज कसते हुए उन्होंने एक नया नैरेटिव पेश किया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार को बुलडोजर का इतना ही शौक है, तो उन्हें इसका इस्तेमाल समाज में फैली असमानता की खाई को पाटने और हर वर्ग को उनका उचित आरक्षण दिलाने के लिए करना चाहिए, न कि लोगों को डराने के लिए।
अखिलेश यादव द्वारा जारी यह ‘पीडीए ऑडिट रिपोर्ट’ केवल कागजों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह उन तमाम युवाओं और आरक्षित वर्गों के असंतोष को स्वर देने का एक बड़ा राजनीतिक प्रयास है, जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। जिस तरह से सपा प्रमुख ने रोजगार, न्यायपालिका और संविधान के मुद्दे को एक साथ पिरोया है, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘आरक्षण की रक्षा’ एक निर्णायक और सबसे ज्वलंत मुद्दा बनी रहेगी। अब देखना यह है कि भाजपा सपा के इन गंभीर आरोपों और इस आक्रामक ‘पीडीए’ रणनीति का क्या काट निकालती है।





















































