रामनगरी में भव्य आयोजन की उल्टी गिनती शुरू
धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी अयोध्या में एक बार फिर से इतिहास रचने की तैयारी पूरी शिद्दत के साथ चल रही है। भगवान श्रीराम की पावन भूमि पर इस बार 10वें दीपोत्सव को लेकर प्रशासनिक अमला और विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। इस साल सरयू तट के आंचल को रोशन करने के लिए रिकॉर्ड संख्या में दीप प्रज्ज्वलित करने का भव्य लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसकी तैयारियां युद्धस्तर पर आरंभ हो चुकी हैं। हर साल की भांति इस बार का दीपोत्सव न केवल भव्य होगा, बल्कि इसकी दिव्यता और दिव्यता के आयाम भी नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।
30 लाख दीपों के लक्ष्य के लिए मंगाए जा रहे 33 लाख दीये
इस बार के दीपोत्सव समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी (दीपोत्सव) संत शरण मिश्र ने रूपरेखा साझा की है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष सरयू तट के कुल 56 घाटों पर 30 लाख दीप जलाने का वृहद लक्ष्य तय किया गया है। किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने और दीयों की टूट-फूट की भरपाई के लिए 30 लाख के मुकाबले कुल 33 लाख दीये मंगाए जा रहे हैं, ताकि दीपों की संख्या में कोई कमी न आए।
तैयारियों के औपचारिक शुभारंभ के रूप में शुक्रवार की सुबह साढ़े सात बजे सरयू तट के घाट संख्या 10 पर पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य भूमि पूजन का अनुष्ठान संपन्न होगा। यह पावन अनुष्ठान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न कराया जाएगा, जिसके बाद घाटों पर सजावट का काम और तेजी से आगे बढ़ेगा।
56 घाटों पर बनाए जा रहे चार वर्ग फुट के ब्लॉक
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस बार दीपोत्सव का दायरा बढ़ाया गया है। पिछले वर्षों में जहां 55 घाटों पर इस पर्व का आयोजन होता था, वहीं इस बार विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल समेत कुल 56 घाटों को दीपों की रोशनी से नहलाया जाएगा।
दीपों की सजावट में अद्भुत कलात्मकता और एकरूपता बनाए रखने के लिए घाटों पर चार वर्ग फुट के विशेष ब्लॉक तैयार किए जा रहे हैं। इन तय ब्लॉकों पर मार्किंग का कार्य अगले तीन से चार दिनों के भीतर पूरा करने का सख्त लक्ष्य रखा गया है, ताकि दीयों को करीने से व्यवस्थित किया जा सके।
35 हजार स्वयंसेवकों की फौज संभालेगी कमान
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर मानव संसाधन का उपयोग किया जा रहा है। अवध विश्वविद्यालय की ओर से इस बार दीपों की सजावट और उनके प्रज्ज्वलन के लिए लगभग 35 हजार स्वयंसेवकों को मैदान में उतारा जाएगा। इन स्वयंसेवकों में विभिन्न डिग्री कॉलेजों और इंटरमीडिएट संस्थानों के मेधावी छात्र-छात्राएं शामिल होंगे।
प्रत्येक स्वयंसेवक को उनकी दक्षता और योजना के अनुसार घाटवार विशेष जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं, जिसके लिए उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं को पारदर्शी और सुरक्षित रखने के लिए सभी स्वयंसेवकों को क्यूआर कोड से लैस आधुनिक पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। इन डिजिटल कार्ड्स में स्वयंसेवक का नाम, हालिया तस्वीर, मोबाइल नंबर और उनकी तैनाती वाले घाट का पूरा विवरण दर्ज होगा, जिससे सुरक्षा प्रबंधों में भी पुख्ता मदद मिलेगी।











































