नोएडा: चलती बस में छात्रा के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात के बाद गौतम बुद्ध नगर प्रशासन और परिवहन विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के कड़े रुख के बाद जिले की सड़कों पर डग्गामार और गैर-कानूनी ढंग से दौड़ने वाले वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान ‘ऑपरेशन कवच 2.0’ का आगाज किया गया है। यात्रियों, विशेषकर महिला मुसाफिरों की हिफाजत को ताक पर रखकर संचालित हो रही बसों के खिलाफ परिवहन विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त प्रवर्तन अभियान छेड़ा है। जिलेभर में की गई इस व्यापक घेराबंदी के दौरान कुल 46 बसों के चालान काटे गए, जबकि 25 बसों को मौके पर ही जब्त (सीज) कर डिपो भेज दिया गया।
पांच प्रवर्तन दस्तों ने व्यस्त चौराहों पर की सघन नाकेबंदी
सड़कों पर मनमाने तरीके से चल रही प्राइवेट बसों पर नकेल कसने के लिए एआरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पाण्डेय के नेतृत्व में एक बेहद आक्रामक रणनीति तैयार की गई। विभाग की ओर से कुल पांच विशेष प्रवर्तन दस्तों का गठन कर मैदान में उतारा गया, जिसमें तीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) और दो यात्री कर अधिकारी (पीटीओ) शामिल थे। इन टीमों ने जिले के सबसे व्यस्त और संवेदनशील ट्रांजिट प्वाइंट्स—जैसे परी चौक, महामाया फ्लाईओवर, सेक्टर-37 और सूरजपुर गोलचक्कर पर अचानक नाकेबंदी कर दी। हर आने-जाने वाली बस को रोककर उसके रूट, फिटनेस, परमिट, इंश्योरेंस और टैक्स दस्तावेजों का बारीकी से सत्यापन किया गया।
परमिट का उल्लंघन, टैक्स चोरी और अवैध माल ढुलाई उजागर
जांच अभियान के दौरान सार्वजनिक परिवहन के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले कई चौंकाने वाले मामले सामने आए। कई बसें बिना वैध परमिट या निर्धारित रूट से हटकर अवैध रूप से दौड़ाई जा रही थीं। इसके अलावा, दर्जनों वाहन मालिकों ने कई महीनों से सरकार को देय रोड टैक्स जमा नहीं कराया था। सबसे गंभीर उल्लंघन यह पाया गया कि जिन बसों का पंजीकरण केवल यात्रियों के आवागमन के लिए था, उनमें गैर-कानूनी ढंग से भारी व्यावसायिक सामान और माल ढुलाई की जा रही थी, जिससे मुसाफिरों की जान को सीधा खतरा बना हुआ था। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर अधिकारियों ने तुरंत मौके पर जब्ती और चालान की कार्रवाई पूरी की।
10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना और टैक्स वसूली
नियम-कायदों को ठेंगा दिखाने वाले इन गैर-जिम्मेदार बस ऑपरेटरों के खिलाफ विभाग ने भारी वित्तीय चोट भी पहुंचाई है। प्रवर्तन टीमों ने नियमों की अनदेखी पर सात लाख रुपये से अधिक का शमन शुल्क (कंपाउंडिंग फीस) लगाया। साथ ही, लंबे समय से दबाए बैठे करीब तीन लाख रुपये के बकाया टैक्स की वसूली भी मौके पर आरोपित की गई। इस प्रकार एक ही अभियान के भीतर परिवहन विभाग ने कुल 10 लाख रुपये से अधिक का राजस्व वसूलने और पेनल्टी लगाने की सीधी वित्तीय कार्रवाई को अंजाम दिया, जिससे अवैध परिवहन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ पर जेल और सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
एआरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पाण्डेय ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई महज औपचारिक चेकिंग तक सीमित नहीं है। हालिया दिल दहला देने वाली वारदात ने यह साबित किया है कि अनियंत्रित और अवैध बसें अपराध की शरणगाह बन सकती हैं। शासन के सख्त आदेश हैं कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉ. पाण्डेय ने चेतावनी दी कि यदि कोई बस संचालक बिना वैध कागजात, अनधिकृत रूट या तय मानकों के विपरीत वाहन चलाता मिला, तो केवल चालान या सीज ही नहीं, बल्कि संचालक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। जिले में ‘ऑपरेशन कवच 2.0’ का यह औचक निरीक्षण अभियान आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामकता से जारी रहेगा।





















































