धर्मनगरी अयोध्या में दैनिक रूप से संचालित होने वाली ऐतिहासिक रामकोट परिक्रमा ने अपनी निरंतरता का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस विशेष उपलब्धि के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अयोध्या धाम में एक भव्य और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें शीर्ष साधु-संतों, आचार्यों और हजारों देशव्यापी श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धाभाव से सहभागिता की। भोर के समय 5:30 बजे प्रारंभ हुई इस परिक्रमा यात्रा में भक्तों का अद्वितीय उत्साह और भक्तिमय उल्लास देखने योग्य था।
भव्य राम मंदिर निर्माण के साथ पुनर्जीवित हुई प्राचीन परंपरा
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण के उपरांत दैनिक रामकोट परिक्रमा की परंपरा को औपचारिक रूप से निरंतर स्वरूप में बहाल किया गया था। सनातन संस्कृति और पौराणिक मान्यताओं में इस यात्रा को ‘अंतर्गृही परिक्रमा’ के नाम से अभिहित किया जाता रहा है। प्राचीन काल से ही तपस्वी, ऋषि-मुनि और संत समाज इस परिक्रमा को अपनी दैनिक साधना का आवश्यक अंग मानते आए हैं। इसी पुरातन परंपरा को निरंतरता प्रदान करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसे नियमित दिनचर्या के रूप में व्यवस्थित किया, जो अब रामनगरी के आध्यात्मिक वैभव का मुख्य केंद्र बन चुकी है।
प्रमुख मंदिरों के दर्शन और परिक्रमा का दैनिक स्वरूप
दैनिक रूप से आयोजित होने वाली इस एक घंटे की अंतर्गृही परिक्रमा के मार्ग में प्रभु श्रीरामलला का भव्य मंदिर और सिद्धपीठ श्री हनुमानगढ़ी सहित रामकोट क्षेत्र में स्थित एक दर्जन से अधिक अत्यंत प्रतिष्ठित व पौराणिक मंदिर सम्मिलित हैं। श्रद्धालु इन सभी देवालयों की परिक्रमा पूर्ण करने के पश्चात अंत में प्रभु श्रीरामलला के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सामान्य दिनों में रोजाना लगभग 5,000 श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा में भाग लेते हैं, किंतु एक वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर यह संख्या कई गुना अधिक दर्ज की गई।
संत समाज और ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने किया आह्वान
इस अवसर पर राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े रहे अनिल मिश्रा ने कहा कि रामकोट परिक्रमा को सदियों से तपस्वी साधु-संत अंतर्गृही परिक्रमा के रूप में करते आए हैं। मंदिर निर्माण के बाद इसे नियमित रूप से आरंभ किया गया, जिसके तहत संत और भक्तजन परिक्रमा उपरांत प्रभु रामलला के दर्शन का लाभ प्राप्त करते हैं। उन्होंने एक वर्ष पूर्ण होने पर सभी प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए इस पुण्य परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य और राम वल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास ने बताया कि आज के पावन दिन ठाकुर श्रीरामलला, हनुमान जी और रामकोट के अन्य सभी पवित्र देवालयों की परिक्रमा में संत, महंत, धर्माचार्य व जनसामान्य विशाल समूह के रूप में एकत्र हुए। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश 14 कोसी या पंचकोसी जैसी विस्तृत परिक्रमाएं संपन्न नहीं कर पाते हैं, उन्हें अयोध्या आगमन पर पुण्य लाभ हेतु इस एक घंटे की सुलभ अंतर्गृही (रामकोट) परिक्रमा में अवश्य सम्मिलित होना चाहिए।





















































