मेरठ में भारतीय किसान यूनियन (बीआर आंबेडकर) के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी और उनके साथी मोहित जाटव की पुलिस हिरासत में कथित बेरहमी से पिटाई का मामला अब बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो चुका है। विपक्षी दलों ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन की मांग की है। वहीं दूसरी ओर, मेरठ पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे तथ्यहीन और मनगढ़ंत करार दिया है।
अखिलेश यादव का तीखा हमला: ‘किसान का अपमान, देश का अपमान’
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिग्विजय भाटी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “किसान का अपमान, देश का अपमान है।” अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा पूरे देश के अन्नदाताओं को डराने-धमकाने की साजिश कर रही है, जो बिल्कुल अक्षम्य है। उन्होंने कहा कि पुलिस कस्टडी में किसान नेताओं को थर्ड डिग्री टॉर्चर देना सत्ता की बौखलाहट और पराजय के डर का स्पष्ट संकेत है।
सपा प्रमुख ने सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य), खाद संकट, फसलों की सरकारी खरीद, भूमि अधिग्रहण और किसान आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष को घेरा। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त कर उनके खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
कांग्रेस ने लगाया ‘जंगलराज’ का आरोप, मानवाधिकार हनन का उठाया मुद्दा
कांग्रेस पार्टी ने भी प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को ताक पर रख दिया गया है। मेरठ की इस घटना को ‘जंगलराज’ का क्रूर चेहरा बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि किसान नेता को घंटों बंद कमरे में प्रताड़ित किया गया, बेरहमी से पीटा गया और गानों पर जबरन नचाकर बेइज्जत किया गया।
कांग्रेस ने भाटी के वीडियो का हवाला देते हुए बताया कि उनकी सूजी हुई आंखें और शरीर पर लगी गंभीर चोटें पुलिस की बर्बरता की गवाही दे रही हैं। पार्टी ने दो टूक कहा कि भाजपा का यह तानाशाही रवैया किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की मांग: CCTV फुटेज हों सुरक्षित, NHRC ले संज्ञान
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग किया। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य पुलिसिंग नहीं, बल्कि खाकी की आड़ में हिरासत में किया गया अमानवीय अत्याचार है। किसी भी पुलिस अधिकारी को संविधान और कानून हाथ में लेने का हक नहीं है।
चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश शासन से मांग की कि एसएसपी कार्यालय व संबंधित थानों के सीसीटीवी फुटेज तुरंत सुरक्षित किए जाएं और पीड़ितों का किसी स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि वर्दी कानून से ऊपर नहीं हो सकती और आम जनता की आवाज दबाने वाली पुलिसिया तानाशाही के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।
पीड़ित किसान नेता का दावा: एसएसपी दफ्तर से एसओजी तक हुआ टॉर्चर
इंटरनेट पर वायरल वीडियो में दिग्विजय सिंह भाटी ने मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत कई पुलिसकर्मियों पर संगीन आरोप लगाए हैं। भाटी के अनुसार, वह और मोहित जाटव 19 अगस्त को गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में निष्पक्ष जांच की गुहार लगाने एसएसपी कार्यालय गए थे।
भाटी का दावा है कि एसएसपी के पहुंचने पर उन्हें अंदर बुलाया गया और वहीं से उनके साथ मारपीट शुरू हुई। आरोप है कि इसके बाद सिविल लाइंस इंस्पेक्टर उन्हें पुलिस लाइन स्थित एसओजी दफ्तर ले गए, जहां घंटों थर्ड डिग्री यातनाएं दी गईं। भाटी ने दावा किया कि आंख से खून बहने की नौबत आने पर पुलिस ने थाने में ही आंख और न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टरों को बुलाकर इलाज कराया।
मेरठ पुलिस की सफाई: ‘हिस्ट्रीशीटर हैं दोनों, स्कूटी फिसलने से हुए थे घायल’
मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी कर दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों व्यक्ति अपने-अपने संबंधित थानों के चिन्हित हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस का कहना है कि 19 अगस्त 2026 को दोनों सिविल लाइंस थाने में दर्ज अपराध संख्या 173/2026 के सिलसिले में बातचीत करने दफ्तर आए थे। पुलिस के दावे के मुताबिक, वापसी के दौरान उनकी स्कूटी अनियंत्रित होकर फिसल गई, जिससे दोनों को चोटें आईं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस दुर्घटना के संबंध में पीड़ितों ने स्वयं सिविल लाइंस थाने में लिखित तहरीर दी थी, जिसे 19 अगस्त की शाम 5:31 बजे जनरल डायरी (जीडी संख्या 53) में दर्ज किया गया था। पुलिस ने रिकॉर्ड साझा करते हुए बताया कि भाटी पर 2008 से 2026 तक और मोहित जाटव पर 2015 से 2026 तक मेरठ व अमरोहा सहित कई थानों में दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।





















































