राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को आईना दिखाते हुए कहा कि ऐसे भावनात्मक विषयों पर सियासत चमकाने के बजाय देश की सत्ता और विपक्ष को जनता से जुड़े ज्वलंत संकटों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। बसपा सुप्रीमो ने बेरोजगारी, छात्र वर्ग की परेशानियों और देश के विभिन्न राज्यों में बाढ़ से मची तबाही का हवाला देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को जनहित की प्राथमिकताएं याद दिलाईं।
कानून बदलना और ध्यान भटकाना पुरानी सियासी आदत
बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी विस्तृत राय रखते हुए कहा कि वंदे मातरम को पूरा गाने, शुरुआती दो अंतरे गाने अथवा न गाने को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह सर्वथा अनुचित है। उन्होंने हाल ही में संसद द्वारा पारित किए गए कानून का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसा घटनाक्रम देश में पहली बार देखने को नहीं मिल रहा है।
मायावती ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों में जब भी सत्ता बदलती है, राजनीतिक पार्टियां अपने संकीर्ण स्वार्थों की पूर्ति और अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए एक-दूसरे के बनाए कानूनों में फेरबदल करती रहती हैं। जनता का ध्यान वास्तविक समस्याओं से भटकाने का यह पुराना राजनीतिक हथकंडा है।
‘जेन-जी’, ‘जेन-अल्फा’ और बाढ़ पीड़ितों की अनदेखी पर जताई चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्तमान हालात का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय देश गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, ‘जेन-जी’ (Gen-Z) पीढ़ी के छात्रों और ‘जेन-अल्फा’ (Gen-Alpha) के स्कूली बच्चों का भविष्य संवारने के लिए ठोस नीतियों की जरूरत है। इसके साथ ही देश के कई हिस्से भीषण बाढ़ की चपेट में हैं, जहां व्यापक जान-माल का नुकसान हो रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में केंद्र, राज्य सरकारों और सभी दलों की पहली जिम्मेदारी राहत व विकास कार्यों पर ध्यान देने की होनी चाहिए, जो कि वक्त की सबसे बड़ी मांग है।
15 अगस्त से गरमाया हुआ है भाजपा-कांग्रेस का टकराव
उल्लेखनीय है कि वंदे मातरम को लेकर यह सियासी टकराव 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुरू हुआ था। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि संपूर्ण वंदे मातरम गायन के दौरान सोनिया गांधी ने इसे बीच में रोकने का प्रयास किया और राहुल गांधी भी असहज नजर आए।
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि पूरा राष्ट्रीय गीत मर्यादापूर्वक गाया गया था। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी का इशारा राष्ट्रगीत रोकने के लिए नहीं, बल्कि काफी देर से खड़े पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बैठने हेतु कुर्सी मंगाने के लिए था।





















































