रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्रवाई के संभावित ऐलानों के खिलाफ सियासत गरमाती जा रही है। मंगलवार को समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए अयोध्या में जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे की अगुवाई में बड़ी संख्या में पहुंचे सपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव किया। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से प्रेषित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रोके जाने की पुरजोर मांग उठाई गई।
शिक्षा के मंदिरों पर बुलडोजर चलाने का आरोप, सरकार पर साधा निशाना
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए और राजनीतिक द्वेष के तहत कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया। प्रदर्शन के पश्चात मीडिया से मुखातिब होते हुए सपा नेता पवन पांडे ने सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश को विश्वगुरु और सशक्त राष्ट्र बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ बच्चों के हाथों से कलम और किताबें छीनने का कुचक्र रचा जा रहा है।
पवन पांडे ने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार पाठशालाओं को बंद कर उनकी जगह मधुशालाओं को बढ़ावा देना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान के भवन को जमींदोज करके देश को मजबूत नहीं बनाया जा सकता है। सरकार को शिक्षा के प्रसार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि इस तरह की ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयों से संस्थानों का भविष्य अंधकारमय करना चाहिए।
‘दस्तावेजी कमियों को दूर करने का दिया जाना चाहिए पूरा अवसर’
सपा नेता ने तर्क दिया कि यदि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण, नक्शे या अन्य कानूनी दस्तावेजों में किसी भी तरह की कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी पाई जाती है, तो उसे नेस्तनाबूद करने के बजाय नियमानुसार कमियों को पूरा कराने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि तमाम जरूरी औपचारिकताओं और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करवाकर विश्वविद्यालय का सुचारू संचालन पूर्ववत जारी रखा जा सकता है।
सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के अन्य कई हिस्सों में प्रभावशाली और रसूखदार लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए गए हैं, लेकिन प्रशासन की नजरें उन पर इनायत रहती हैं और बुलडोजर केवल एक खास शैक्षणिक संस्थान को निशाना बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई न्यायसंगत न होकर पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित प्रतीत होती है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग और प्रशासनिक आदेशों का कानूनी पहलू
ज्ञापन के जरिए समाजवादी पार्टी ने देश के राष्ट्रपति से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। पार्टी का कहना है कि जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और कानूनी दायरे के तहत प्रबंधन पक्ष को अपना पक्ष रखने तथा कमियों को ठीक करने का समुचित अवसर प्रदान किया जाए।
गौरतलब है कि रामपुर स्थित इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को लेकर स्थानीय प्रशासन ने हाल ही में काफी सख्त रुख इख्तियार किया है। रामपुर के जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि वहां हुए कुछ निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के तय प्रावधानों का खुला उल्लंघन करते हुए पाए गए हैं। प्रशासन की ओर से यह निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित पक्ष निर्धारित समयावधि के भीतर खुद ही अवैध निर्माण को हटा ले। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो जिला प्रशासन नियमों के तहत खुद ध्वस्तीकरण की कठोर कार्रवाई को अंजाम देगा। प्रशासन का आधिकारिक पक्ष यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से न्यायालय और सक्षम प्राधिकारियों के कानूनी आदेशों के अनुपालन में ही आगे बढ़ाई जा रही है।





















































