उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ को 413 करोड़ रुपये की 342 विकास परियोजनाओं का बड़ा उपहार देते हुए पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला है। सीएम ने कहा कि पूर्ववर्ती सत्ताओं के पापों के गड्ढों को भरने और उनके भ्रष्टाचार के कचरे को साफ करने में काफी समय लगा, लेकिन आज यूपी के सभी 17 नगर निगम सुशासन, सुरक्षा और विकास का एक नया मॉडल बनकर उभरे हैं।
विकास और सुशासन का त्रि-वर्षीय प्रतिमान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अब केवल प्रशासनिक कामकाज का केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन नागरिक सुविधाओं का प्रतीक बनती जा रही है। मंगलवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निकायों के तीन वर्ष का सफल कार्यकाल पूरा होने पर प्रदेशवासियों का आभार जताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लखनऊ को 413 करोड़ रुपये की लागत वाली 342 विकास परियोजनाओं का तोहफा दिया। साथ ही ‘स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ’ पर आधारित एक विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र और स्थानीय सुशासन की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब जनता ने सभी 17 नगर निगमों में मेयर पद की सीट भारतीय जनता पार्टी की झोली में डाली है। उन्होंने सभी 17 नगर निगमों के महापौर, 200 नगर पालिका परिषदों, 545 नगर पंचायतों के चेयरमैन और लगभग 14,000 पार्षदों को तीन वर्ष का कार्यकाल सफलतापूर्वक संपन्न करने पर बधाई दी। सीएम ने स्पष्ट किया कि विकास पर खर्च होने वाला पैसा किसी मंत्री या मुख्यमंत्री का नहीं बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई है, जिसका उनकी सरकार केवल सही और पारदर्शी नियोजन कर रही है।
स्वच्छता में नंबर वन बनने का संकल्प और ‘VIP चोरों’ पर करारा कटाक्ष
स्वच्छता के मोर्चे पर लखनऊ की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि आज लखनऊ देश के सबसे साफ-सुथरे शहरों की रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। हालांकि, हमारा लक्ष्य इसे पहले स्थान पर लाना है। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता को केवल सरकारी तंत्र या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी मानने से इनकार करते हुए इसे एक जन-आंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे सूखा और गीला कूड़ा अलग रखें, सिंगल यूज प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार करें और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान न पहुंचाएं।
इसी दौरान सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक घटना का जिक्र करते हुए उन लोगों पर तीखा तंज कसा, जो महंगी गाड़ियों में घूमते हैं लेकिन नागरिक अनुशासन भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ढाई करोड़ रुपये की लग्जरी कार से आकर सड़क किनारे से गमला चुराने वालों को यह समझना चाहिए कि पूरे शहर में तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। अगर वे 45 रुपये का गमला खरीद लेते, तो समाज में उनका सम्मान भी बचा रहता और शहर की सुंदरता भी प्रभावित नहीं होती।
कूड़े के ढेर से ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ तक: लखनऊ का बदला भूगोल
लखनऊ के बदलते स्वरूप की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का एक बेहतरीन उदाहरण जनता के सामने रखा। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर पिछले 30 वर्षों से लगातार शहर का कूड़ा डंप किया जा रहा था, उसे आज एक बेहद खूबसूरत और दर्शनीय स्थल में बदल दिया गया है। इस पावन स्थल पर देश के तीन महान सपूतों- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देती रहेंगी।
आज का लखनऊ केवल ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां ग्रीन कॉरिडोर, आधुनिक मेट्रो रेल नेटवर्क और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने वाली तमाम जन-सुविधाएं मौजूद हैं। नगर निगम की वित्तीय आत्मनिर्भरता का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले जहां लखनऊ नगर निगम के बांड की कीमत 25 करोड़ रुपये भी नहीं आंकी जाती थी, वहीं बीते वर्ष इसी नगर निगम ने 200 करोड़ रुपये से अधिक का बांड सफलतापूर्वक जारी करके देश के सामने एक मिसाल कायम की है।
पिछली सरकारों के ‘पारिवारिक तुष्टिकरण’ पर सीएम का प्रहार
राजनीतिक मोर्चे पर विपक्षी दलों को घेरते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) की पूर्ववर्ती सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले की सरकारें केवल अपने परिवार के विकास के बारे में सोचती थीं, यही वजह है कि वे पूरी तरह फेल साबित हुईं। सपा शासनकाल में गरीबों के लिए मकान स्वीकृत नहीं होते थे और उनकी योजनाएं युवाओं के कल्याण के लिए नहीं थीं।
सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने जाति, चेहरा, क्षेत्र या मत-मजहब देखे बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप देश की चार प्रमुख ‘जातियों’ यानी गरीब, युवा, महिला और किसान को केंद्र में रखकर नीतियां बनाई हैं। इसी का परिणाम है कि आज प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 65 लाख से अधिक गरीबों को गरिमापूर्ण जीवन देते हुए पक्के आवास उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था की याद दिलाते हुए कहा कि पहले की सरकारों के गुंडे महिलाओं की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा थे, लेकिन आज डबल इंजन सरकार के राज में बेटियां और व्यापारी खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं।
वैश्विक आर्थिक संकट के बीच भारत की मजबूत स्थिति
अपने संबोधन के आखिरी हिस्से में मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिदृश्य और आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट से जूझ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई लाइन पूरी तरह बाधित हुई है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में कच्चे तेल और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
सीएम ने कहा कि जिस अमेरिका के पास अपने खुद के विशाल ऊर्जा संसाधन मौजूद हैं, वहां भी ईंधन के दाम दोगुने से अधिक हो चुके हैं और महंगाई अपने चरम पर है। लेकिन इन सबके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण भारत में न केवल महंगाई को लगातार नियंत्रित रखा गया है, बल्कि विकास की रफ्तार को भी मंद पड़ने नहीं दिया गया है।
लखनऊ में आयोजित इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन से यह साफ जाहिर होता है कि उत्तर प्रदेश के नगर निकाय अब केवल प्रशासनिक खानापूर्ति के साधन नहीं रह गए हैं। वे विकास को सीधे जनता के दरवाजे तक पहुंचाने वाले मजबूत स्तंभ बन चुके हैं। विरासत को सहेजने, पर्यावरण का संरक्षण करने और बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग तक कल्याणकारी नीतियां पहुंचाने की इस त्रिवेणी ने उत्तर प्रदेश को देश के सबसे प्रगतिशील राज्यों की कतार में सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया है।


















































