उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बेहद सख्त और दूरदर्शी विजन पेश किया है। मंगलवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पतालों में हो रहे सुधारों का सीधा लाभ गांव और गरीब तक पहुंचना चाहिए; इलाज, जांच और आपातकालीन सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आम आदमी की सेहत और आधुनिक तकनीक का महासंगम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं अब केवल बुनियादी ढांचों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय गुणवत्ता से लैस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों के आला अधिकारियों के साथ एक गहन समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रदेश की विशाल आबादी को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखना चाहिए। सीएम ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को बेहतर मानव संसाधन, प्रभावी प्रबंधन और आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने का समय आ गया है।
चिकित्सा शिक्षा के मूल उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नई इमारतें खड़ी करना या संस्थान बढ़ाना नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश को प्रशिक्षित चिकित्सक, उच्च कोटि के विशेषज्ञ और संवेदनशील स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराना है। उन्होंने मेडिकल संस्थानों में रिसर्च (अनुसंधान) गतिविधियों और विशेषज्ञ फैकल्टी को तत्काल प्रभाव से बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
मेडिकल शिक्षा और ओपीडी सेवाओं में अभूतपूर्व उछाल
बैठक के दौरान प्रस्तुत किए गए आंकड़े उत्तर प्रदेश के बदलते हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की गवाही देते हैं। वर्तमान में प्रदेश में 108 जनपदीय चिकित्सालय, 106 विशिष्ट चिकित्सालय, 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), 3757 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और 27,668 स्वास्थ्य उपकेंद्र जनता की सेवा में सक्रिय हैं। यह व्यवस्था आम जनमानस के लिए कितनी जरूरी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025-26 में सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी (OPD) और 1.23 करोड़ आईपीडी (IPD) सेवाएं दी गईं। इस दौरान 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांच भी सफलतापूर्वक की गईं।
विगत एक दशक की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया गया कि वर्ष 2016-17 की तुलना में सत्र 2025-26 तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 44 से बढ़कर 83 हो गई है। पीजी (PG) सीटों की संख्या 1344 से बढ़कर 5067 और एमबीबीएस (MBBS) सीटें 5390 से बढ़कर 12800 तक पहुंच गई हैं। यह सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं में लगभग 165 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाता है।
‘मिशन निरामया 1.0’: नर्सिंग शिक्षा का स्वर्णिम युग
नर्सिंग स्टाफ को किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसे मजबूत करने के लिए प्रदेश में वर्तमान में 652 नर्सिंग संस्थान संचालित हैं। ‘मिशन निरामया 1.0’ के तहत नर्सिंग शिक्षा में व्यापक सुधार किए गए हैं। इसके अंतर्गत 17,000 स्कूलों में काउंसलिंग सत्र चलाकर 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों को जागरूक किया गया और 10,570 नर्सिंग संकाय सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। आज राज्य में लगभग 3.95 लाख पंजीकृत नर्सिंग स्टाफ मरीजों की सेवा के लिए उपलब्ध हैं।
गरीबों का सहारा: आयुष्मान भारत और कैशलेस योजना
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘आयुष्मान योजना’ आज गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए संजीवनी बन चुकी है। प्रदेश में 6,480 अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं, जिनके माध्यम से अब तक 96.75 लाख से अधिक निशुल्क उपचार किए जा चुके हैं। सीएम ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि अस्पतालों के क्लेम का भुगतान तय समय सीमा के भीतर होना चाहिए ताकि मरीजों की सुविधाओं में कोई बाधा न आए। इसके साथ ही, एक बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री ने ‘दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना’ में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी आयुष (AYUSH) पद्धतियों की आईपीडी सेवाओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
कोरोना योद्धाओं का सम्मान और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर जोर
मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत कोविड-19 के कठिन दौर में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों का प्राथमिकता के आधार पर उचित समायोजन किया जाए। जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की अहम कड़ी ‘आशा वर्करों’ के संबंध में सीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनका मानदेय या भुगतान किसी भी स्थिति में लंबित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने संस्थागत और सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने पर जोर दिया ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और अधिक कमी लाई जा सके। इसके अलावा, संचारी रोग नियंत्रण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए जन-जागरूकता और स्वच्छता को हथियार बनाने की बात कही।
डिजिटल हेल्थ और 1500 करोड़ का बड़ा निवेश
उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल हेल्थ की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब तक 15.28 करोड़ से अधिक ‘आभा आईडी’ (ABHA ID) बनाई जा चुकी हैं और 15.14 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। नवाचार और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए ‘यूपी-आईएमआरएएस’ (UP-IMRAS) जैसी डिजिटल पहल शुरू की गई हैं। चिकित्सा अनुसंधान और मेडटेक क्षेत्र में लगभग 1500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव (इंटेंट) भी फाइल किए गए हैं, जो प्रदेश को एक बड़े मेडिकल हब में बदल देंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और एंबुलेंस सेवाओं की नई रफ्तार
आगामी महीनों में प्रदेश को कई बड़ी सौगातें मिलने वाली हैं। इनमें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का गर्ल्स हॉस्टल, अयोध्या मेडिकल कॉलेज में 110 बेड का अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर, सहारनपुर का बीएससी नर्सिंग कॉलेज और कानपुर मेडिकल कॉलेज का डी-एडिक्शन वार्ड शामिल है। इसके अलावा महाराजगंज, शामली और संभल में पीपीपी (PPP) मॉडल पर मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं।
आपातकालीन सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए सीएम ने एंबुलेंस के ‘रिस्पॉन्स टाइम’ को और कम करने के निर्देश दिए। वर्तमान में 375 एएलएस (ALS) एंबुलेंस संचालित हैं, जिनसे अब तक 9.38 लाख गंभीर मरीजों को रेफर किया जा चुका है।
दवाओं की गुणवत्ता पर ‘जीरो टॉलरेंस’ और हाईटेक सर्जरी
मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि अस्पतालों में 3 माह से कम एक्सपायरी अवधि वाली दवाएं किसी भी कीमत पर नहीं रखी जानी चाहिए। डायलिसिस और सीटी स्कैन जैसी महंगी जांचों को आम आदमी की पहुंच में लाया गया है। प्रदेश के 75 जनपदों में डायलिसिस और 74 जनपदों में सीटी स्कैन सेवा उपलब्ध है। मार्च 2026 तक 35.69 लाख डायलिसिस सत्र और 45.35 लाख सीटी स्कैन किए जा चुके हैं।
राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RML) ने 376 से अधिक रोबोटिक सर्जरी और 250 से ज्यादा सफल किडनी प्रत्यारोपण कर कीर्तिमान स्थापित किया है। यहां प्रदेश का पहला ‘गामा नाइफ सेंटर’ भी बन रहा है और 1010 बेड क्षमता वाले नए अस्पताल को मंजूरी मिल गई है। वहीं, एसजीपीजीआई (SGPGI) में 500 बेड का एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर भी जल्द बनकर तैयार होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस व्यापक विजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था अब ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र पर तेजी से दौड़ रही है। अत्याधुनिक उपकरणों, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स, त्वरित एंबुलेंस सेवाओं और सख्त प्रशासनिक नियंत्रण के जरिए राज्य सरकार एक ऐसे ‘हेल्थ इकोसिस्टम’ का निर्माण कर रही है, जहां प्रदेश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं बिना किसी भेदभाव और परेशानी के मिल सकें। यूपी का यह ‘हेल्थ मॉडल’ आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक नजीर साबित होने वाला है।


















































