उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास कार्यों में सुस्ती को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। आगामी चुनावी समीकरणों और जन-प्रतिनिधियों की सक्रियता को परखते हुए मुख्यमंत्री ने अब ‘काम और धनराशि’ का सीधा समीकरण तय कर दिया है। रविवार को आगरा में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब सांसदों और विधायकों को अपने क्षेत्रों की प्राथमिकता खुद तय करनी होगी। उन्होंने दो-टूक लहजे में कहा कि विकास प्रस्तावों को जल्द अंतिम रूप दें, ताकि समय रहते काम शुरू हो सके और उसी के अनुरूप वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जा सके।
प्राथमिकता तय करें, तभी जारी होगा बजट
आगरा जिले के जनप्रतिनिधियों और आला अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्ययोजनाओं, कानून-व्यवस्था और विभिन्न जनपदीय प्रोजेक्ट्स की बारीकी से समीक्षा की। सीएम योगी ने सांसदों-विधायकों को निर्देश दिया कि यदि उनके प्रस्तावों में कोई संशोधन या नया सुझाव शामिल करना है, तो उसे बिना किसी देरी के शासन को उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं है, बशर्ते कार्य योजनाएं ठोस और समयबद्ध हों। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि स्वीकृत परियोजनाओं के लिए बजट तुरंत जारी किया जाए ताकि धरातल पर काम शुरू हो सके। सीएम का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि विकास कार्य न केवल समय पर पूरे हों, बल्कि उनकी गुणवत्ता में भी कोई समझौता न किया जाए।
आगरा एयरपोर्ट का विस्तार: अदालती पेच को सुलझाने के कड़े निर्देश
बैठक का एक अहम हिस्सा आगरा हवाई अड्डे के विस्तारीकरण परियोजना की समीक्षा रहा। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि रनवे के विस्तार का काम अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, रनवे के विस्तार के रास्ते में पेड़ों को हटाने जैसी कुछ पर्यावरणीय और विधिक बाधाएं आ रही हैं, जिसके लिए उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अनुमति अपेक्षित है।
इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि:
- उच्चतम न्यायालय और एनजीटी (NGT) में मामलों की प्रभावी पैरवी की जाए।
- इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अनुभवी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया जाए।
- किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए ताकि प्रोजेक्ट की डेडलाइन प्रभावित न हो।
चुनावी पिच पर ‘सुशासन’ का मंत्र
मुख्यमंत्री द्वारा जनप्रतिनिधियों को मिली यह नई जिम्मेदारी सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति से जोड़कर देखी जा रही है। जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए सीएम योगी ने ‘विकास का रोडमैप’ स्थानीय स्तर पर तैयार करने की नीति अपनाई है। इस बैठक से यह संदेश साफ है कि अब सांसदों और विधायकों को न केवल अपनी सक्रियता बढ़ानी होगी, बल्कि अपने निर्वाचन क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की खुद निगरानी भी करनी होगी। समयबद्ध तरीके से काम पूरा होने पर ही सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश की उन्नति पर केंद्रित रहेगा।





















































