अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। इस संवेदनशील प्रकरण में फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए आरोपियों की पैरवी न करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि कोई भी स्थानीय अधिवक्ता इस मामले में आरोपी पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं करेगा। यदि कोई वकील आरोपियों की ओर से वकालतनामा दाखिल करता है, तो उसे एसोसिएशन के कोष में प्रति आरोपी 5 लाख रुपये की ‘सहयोग राशि’ जमा करनी होगी, जिसका उपयोग अभियोजन पक्ष के कानूनी खर्चों में किया जाएगा।
बाहरी वकीलों के विरोध की तैयारी और अभियोजन पैनल का गठन
बार एसोसिएशन ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि कोई बाहरी अधिवक्ता आरोपियों का बचाव करने आता है, तो संघ उसका पुरजोर विरोध करेगा। इतना ही नहीं, ऐसे वकीलों की पृष्ठभूमि की भी जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सरकारी तंत्र, विश्व हिंदू परिषद या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े तो नहीं हैं।
मामले की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए एसोसिएशन ने 15 अनुभवी अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया है। इसके अतिरिक्त, चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए 12 व्यक्तियों को अधिकृत किया गया है, जो इस पूरे प्रकरण में कानूनी कार्रवाई को गति देंगे।
‘एसआईटी नहीं, सीबीआई जांच हो’: अधिवक्ताओं की मांग
एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने जोर देकर कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केवल सीबीआई (CBI) ही सक्षम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सीबीआई जांच से बचने के लिए एसआईटी का गठन किया है, जो संतोषजनक नहीं है। अधिवक्ता संघ की मांग है कि:
- मामले की जांच सीबीआई द्वारा कराई जाए।
- यदि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती है, तो संघ सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा।
- आरोपियों के अयोध्या से बाहर जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
आस्था बनाम अनियमितता: न्याय की लड़ाई का संकल्प
अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा के लिए उठाया गया है। बार एसोसिएशन का मानना है कि राम मंदिर जैसे पवित्र और करोड़ों लोगों के विश्वास के केंद्र से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अध्यक्ष ने दावा किया कि इस मामले को लेकर जनमानस में व्याप्त शंकाओं को दूर करना आवश्यक है, जिसके लिए एक पारदर्शी और व्यापक जांच जरूरी है।
संघ ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि जांच का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि जांच के दौरान किसी भी अन्य प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो कानून के तहत उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह लड़ाई आस्था की शुचिता को बनाए रखने के लिए लड़ी जा रही है ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।





















































