उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सादगी और पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है। वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती आयात निर्भरता के बीच उन्होंने अपनी वीआईपी गाड़ी छोड़कर ई-रिक्शा से विधानसभा तक का सफर तय किया। इस प्रतीकात्मक कदम के जरिए उन्होंने देशवासियों से सप्ताह में कम से कम 1 दिन पेट्रोल-डीजल बचाने की मार्मिक अपील की है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
- ई-रिक्शा की सवारी: वित्त मंत्री सुरेश खन्ना अपने कर्मचारियों के साथ इलेक्ट्रिक वाहन (ई-रिक्शा) से यूपी विधानसभा पहुंचे।
- ईंधन संरक्षण का संदेश: पीएम मोदी और सीएम योगी की अपील का हवाला देते हुए जनता से हफ्ते में 1 दिन तेल बचाने का आग्रह किया।
- वैश्विक संकट पर चिंता: अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच तेल आयात पर बढ़ती निर्भरता को कम करने पर जोर दिया गया।
- सिलसिलेवार अभियान: इससे पहले भी मंत्री खन्ना 14 मई को साइकिल और 21 मई को मोटरसाइकिल से दफ्तर जा चुके हैं।
- आर्थिक प्रभाव: भारत अपनी कुल ईंधन जरूरत का 85 से 86 प्रतिशत आयात करता है, जिसे कम करके विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सादगी का बड़ा संदेश
उत्तर प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार का दिन उस वक्त चर्चा का विषय बन गया, जब राज्य सरकार के कद्दावर नेता और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना अपनी सरकारी गाड़ियों का काफिला छोड़कर एक ई-रिक्शा में सवार नजर आए। वे अपने स्टाफ के साथ इसी ई-रिक्शा में बैठकर विधानसभा पहुंचे। उनका यह कदम सिर्फ एक राजनीतिक तस्वीर नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (ई-मोबिलिटी) और ईंधन संरक्षण को बढ़ावा देने का एक बेहद मजबूत और सकारात्मक संदेश है। आज जब पेट्रोल-डीजल की कीमतें और पर्यावरण प्रदूषण दोनों ही आम आदमी के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं, ऐसे में एक कैबिनेट मंत्री का यह कदम जनता को इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने वाला है।
पीएम और सीएम के विजन को धरातल पर उतारने की कवायद
पत्रकारों से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस अपील का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से ऊर्जा संरक्षण की गुजारिश की थी। सुरेश खन्ना ने कहा, “देश के हर नागरिक की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह पेट्रोलियम पदार्थों का कम से कम इस्तेमाल करे। मैं खुद सप्ताह में 1 दिन इलेक्ट्रिकल व्हीकल (EV) से ऑफिस जाऊंगा और उसी से वापस आऊंगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि हम सभी को अपने नेतृत्व के निर्देशों का पालन करते हुए इस महाभियान में अपना योगदान देना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय तनाव और विदेशी मुद्रा का संकट
वित्त मंत्री ने इस पूरी मुहिम को सिर्फ पर्यावरण तक सीमित न रखते हुए इसे सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और मौजूदा वैश्विक हालातों से जोड़ा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और युद्ध की स्थितियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया भर के देशों को अपने मसले बातचीत से सुलझाने चाहिए और पूरी दुनिया को संकट में नहीं डालना चाहिए। भारत के संदर्भ में उन्होंने एक अहम आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि हमारी ईंधन की लगभग 85 से 86 प्रतिशत जरूरतें आयात से ही पूरी होती हैं। इसके कारण देश की गाढ़ी कमाई यानी विदेशी मुद्रा का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ तेल खरीदने में खर्च हो जाता है। ऐसे में ईंधन की बचत सीधे तौर पर देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम करेगी।
पहले साइकिल, फिर बाइक और अब ई-रिक्शा
सुरेश खन्ना का यह कदम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह उनके एक सुनियोजित जागरूकता अभियान का हिस्सा है। इससे पहले 14 मई को उन्होंने अपनी साइकिल से दफ्तर पहुंचकर सबको चौंका दिया था। तब भी उन्होंने विदेशी मुद्रा खर्च होने और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का जिक्र किया था। इसके बाद 21 मई को वे मोटरसाइकिल से विधानसभा पहुंचे थे, ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि बड़े वाहनों की जगह जरूरत के हिसाब से छोटे वाहनों का इस्तेमाल कर तेल की खपत को कम किया जा सकता है।
ईंधन संरक्षण आज के दौर की सबसे बड़ी वैश्विक और राष्ट्रीय जरूरत बन चुका है। यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना का ई-रिक्शा से सफर करना इस बात का प्रमाण है कि बदलाव की शुरुआत शीर्ष स्तर से भी की जा सकती है। यदि देश का हर नागरिक उनकी इस अपील को गंभीरता से ले और सप्ताह में केवल 1 दिन अपने निजी पेट्रोल-डीजल वाहनों का मोह छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइकिल या इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करे, तो न केवल भारत की विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण भी मिल सकेगा। समय आ गया है कि इस मुहिम को जन-आंदोलन का रूप दिया जाए।





















































