उत्तर प्रदेश में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व पूरे हर्षोल्लास, अकीदत और अभूतपूर्व शांतिपूर्ण माहौल में मनाया जा रहा है। शासन-प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था और मुस्लिम धर्मगुरुओं की अपील का सीधा असर यह दिखा कि संभल जैसी संवेदनशील जगहों पर भी सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी गई, बल्कि भीड़ प्रबंधन के लिए मस्जिदों में दो शिफ्टों में इबादत की गई। पूरे प्रदेश से आपसी सौहार्द, देश की तरक्की और नियमों के पालन की खूबसूरत तस्वीरें सामने आई हैं।
- नियमों का पालन: उत्तर प्रदेश में कहीं भी सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर बकरीद की नमाज अदा नहीं की गई।
- संभल की मिसाल: शाही जामा मस्जिद में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अकीदतमंदों ने दो शिफ्टों में नमाज पढ़ी।
- शांति और दुआ: लखनऊ, हरदोई और मुरादाबाद सहित पूरे प्रदेश में देश के अमन-चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं।
- सख्त हिदायत: धर्मगुरुओं और नेताओं ने प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न करने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील की।
- प्रशासनिक मुस्तैदी: पूरे राज्य में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा, जिससे त्योहार बिना किसी विघ्न के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
बकरीद पर यूपी से सामने आई अनुशासित तस्वीर
उत्तर प्रदेश में इस बार ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार एक नई और सकारात्मक नजीर पेश कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा त्योहारों को लेकर जारी की गई सख्त गाइडलाइंस और पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। संभल, मुरादाबाद, लखनऊ और हरदोई समेत पूरे राज्य में मुस्लिम समुदाय ने भारी उत्साह के साथ पर्व मनाया, लेकिन इस दौरान नियमों और सामाजिक सौहार्द का पूरा ख्याल रखा गया। मस्जिदों और ईदगाहों में अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा, लेकिन सड़कों पर नमाज पढ़ने से पूरी तरह परहेज किया गया, जो एक बेहद अनुशासित समाज की तस्वीर बयां करता है।
संभल: सड़क पर इबादत नहीं, जामा मस्जिद में दो शिफ्टों में हुई नमाज
संभल जिले में बकरीद का त्योहार पूरी शांति और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। यहां की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद में नमाजियों की भारी भीड़ को देखते हुए एक बेहतरीन व्यवस्था की गई। जामा मस्जिद के अध्यक्ष एडवोकेट जफर अली ने बताया कि शासन के निर्देशों का सम्मान करते हुए किसी भी व्यक्ति ने सड़क या सार्वजनिक जगह पर नमाज अदा नहीं की।
जफर अली ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया, “हमने अपनी मस्जिद में भीड़ को देखते हुए दो शिफ्टों में नमाज पढ़ने की व्यवस्था की थी, ताकि किसी को असुविधा न हो और यातायात भी प्रभावित न हो।” उन्होंने पुलिस-प्रशासन की तारीफ करते हुए कहा कि सुरक्षा बल पूरी तरह से मुस्तैद हैं और माहौल बेहद शांतिपूर्ण है। इस मौके पर विशेष रूप से पूरे देश और संभल में अमन-सुकून कायम रहने की अल्लाह से दुआ मांगी गई।
मुरादाबाद: ‘कुर्बानी का असली मतलब प्रेम और एकता है’
पड़ोसी जिले मुरादाबाद में भी ईद-उल-अजहा की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। यहां समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन ने आवाम को बकरीद का असली संदेश समझाया। उन्होंने कहा, “ईद-उल-अजहा के दिन हम अल्लाह की रजा के लिए अपनी सबसे प्यारी चीजें कुर्बान करते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि सर्वशक्तिमान की खातिर हमारे भीतर त्याग की भावना हमेशा जीवित रहनी चाहिए।”
उन्होंने इस धार्मिक संदेश को सामाजिक परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि आम लोगों को छोटी-मोटी बातों या वैचारिक मतभेदों को लेकर एक-दूसरे का दुश्मन नहीं बनना चाहिए। सभी को यह त्योहार प्रेम, एकता और आपसी सम्मान के साथ मिलकर मनाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण अपील करते हुए कहा कि किसी भी सूरत में प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं की जानी चाहिए, जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों।
लखनऊ: एडवाइजरी का शत-प्रतिशत पालन, देश की तरक्की के लिए उठे हाथ
राजधानी लखनऊ में भी ईद-उल-अजहा का त्योहार पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। प्रख्यात इस्लामी विद्वान और मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि पूरे देश में बकरीद का त्योहार बहुत अच्छे माहौल में मनाया जा रहा है। नमाज के बाद देश की खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए खास दुआएं मांगी गईं।
मौलाना ने लोगों से अपील की थी कि प्रशासन द्वारा जो भी एडवाइजरी जारी की गई है, उसका पूरी तरह से पालन किया जाए। इसका असर यह हुआ कि लोगों ने केवल ईदगाह और मस्जिदों के अंदर ही नमाज अदा की। सार्वजनिक स्थानों या खुले में कुर्बानी करने से पूरी तरह परहेज किया गया और प्रशासन द्वारा चिह्नित किए गए स्थानों पर ही नियमों के तहत कुर्बानी की गई।
हरदोई: साफ-सफाई पर विशेष जोर, चप्पे-चप्पे पर दिखी पुलिस की नजर
हरदोई जिले में भी मुस्लिम समुदाय ने ईदगाह और विभिन्न मस्जिदों में शांतिपूर्वक और पूरे एहतराम के साथ सामूहिक नमाज अदा की। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे के गले लगकर ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद दी। स्थानीय लोगों ने मीडिया से बातचीत में त्योहार की खुशी जाहिर की और इस बात पर विशेष जोर दिया कि कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए और अवशेषों को खुले में न फेंका जाए।
कानून-व्यवस्था को लेकर हरदोई के सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने पुष्टि की कि शहर की ईदगाह और सभी प्रमुख मस्जिदों में नमाज सकुशल तरीके से संपन्न हो चुकी है। उन्होंने सभी शहरवासियों को बकरीद की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “प्रशासन की ओर से पूरी सतर्कता बरती जा रही है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है और सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो।”
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में इस साल बकरीद का त्योहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि यह एक अनुशासित और जिम्मेदार समाज की भी बेहतरीन मिसाल बनकर उभरा है। सड़कों पर नमाज न पढ़ने का फैसला, साफ-सफाई का ध्यान, प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से दूरी और प्रशासन के साथ जनता का सहयोग यह साबित करता है कि जब शासन और समाज दोनों मिलकर काम करते हैं, तो किसी भी बड़े आयोजन को बिना किसी विवाद के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न किया जा सकता है। यह बदला हुआ माहौल एक नए और सौहार्दपूर्ण उत्तर प्रदेश की सुखद तस्वीर पेश कर रहा है।















































