लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद सत्ता परिवर्तन के साथ ही राज्य की विकास गाथा में एक नया अध्याय जुड़ गया। ‘डबल इंजन’ सरकार की स्थापना के बाद केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं ने उत्तर प्रदेश में ऐसी रफ्तार पकड़ी कि दशकों से उपेक्षित पड़े वर्ग के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आ गया। एक समय था जब राजनीतिक मतभेदों के चलते केंद्रीय योजनाओं को प्रदेश में लागू करने से न केवल परहेज किया जाता था, बल्कि भ्रामक नाम रखकर उन्हें अपनी योजनाओं के रूप में पेश करने की कोशिशें होती थीं। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही केंद्र-राज्य के बीच समन्वय का वह अवरोध समाप्त हुआ और जनकल्याणकारी योजनाओं के दरवाजे आम नागरिकों के लिए पूरी तरह खुल गए।
प्रधानमंत्री आवास योजना: अधूरे सपनों को मिला पक्का आधार
देश के हर गरीब को ‘पक्का मकान’ देने का संकल्प प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए पूरा किया गया। वर्ष 2014 से 2017 के बीच प्रदेश में पिछली सरकारों की उदासीनता का आलम यह था कि तीन वर्षों में 50 हजार आवास बनाना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था। राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय लाभार्थियों की सूची भेजने और मैचिंग ग्रांट जारी करने में दिखाई गई ढिलाई ने हजारों गरीबों को उनके हक से वंचित रखा। लेकिन 2017 के बाद परिदृश्य बदल गया। योगी सरकार ने इस योजना को मिशन मोड में लिया और पिछले 9 वर्षों में 62 लाख से अधिक परिवारों को पक्के आवास की चाबियाँ सौंपी, जिससे लाखों परिवारों को एक सुरक्षित छत मिल सकी।
फसल बीमा योजना: किसानों के लिए सुरक्षा का कवच
किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र द्वारा 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का शुभारंभ किया गया था। पिछली सरकार की बेरुखी का परिणाम यह रहा कि यूपी में बमुश्किल 3 प्रतिशत किसान ही इस योजना के दायरे में आ सके, जबकि उसी दौर में अन्य भाजपा शासित राज्यों में 60 से 70 प्रतिशत किसान इस सुरक्षा घेरे में थे। योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद स्थिति पूरी तरह पलट गई। पिछले 9 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 79 लाख से अधिक किसानों को सीधे तौर पर लाभान्वित किया गया है और उन्हें 6,283 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है। आज उत्तर प्रदेश का किसान प्राकृतिक आपदाओं के बावजूद खुद को सुरक्षित महसूस करता है।
स्वच्छ भारत मिशन: ओडीएफ का सपना हुआ साकार
स्वच्छ भारत मिशन प्रधानमंत्री मोदी के उन ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक था, जिसने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी। पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे भाजपा का एजेंडा मानकर इसके क्रियान्वयन में न केवल कोताही बरती, बल्कि उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) जारी करने में भी हीलाहवाली की। परिणाम यह हुआ कि मार्च 2017 तक राज्य का ग्रामीण स्वच्छता दायरा केवल 35 प्रतिशत के करीब सिमटा था। योगी सरकार ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और आज उत्तर प्रदेश 3.31 करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण के साथ 100 प्रतिशत ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) राज्य बन चुका है। इतना ही नहीं, 94 हजार से अधिक गांवों को ओडीएफ प्लस घोषित कर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ किया गया है।
उज्ज्वला योजना: महिलाओं के चेहरे पर आई मुस्कान
पूर्व सरकार के दौर में महिलाओं को मिलने वाले मुफ्त एलपीजी कनेक्शन की संख्या नगण्य थी और रिफिलिंग पर सब्सिडी का अभाव होने के कारण 40 प्रतिशत परिवार दोबारा सिलेंडर भरवाने में असमर्थ थे। ‘डबल इंजन’ सरकार ने इसे अपनी प्राथमिकता सूची में रखा और पिछले 9 वर्षों में 1.86 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए। आज राज्य सरकार की ओर से होली और दीपावली पर दी जाने वाली मुफ्त रिफिलिंग की सुविधा ने गरीब महिलाओं के रसोईघर को धुएं से मुक्त कर उनके स्वास्थ्य और सम्मान की रक्षा की है।





















































