सहारनपुर: उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा और ऊर्जा देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सहारनपुर से राज्यव्यापी ‘स्कूल चलो अभियान-2026’ के दूसरे चरण का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त और अनिवार्य आधारशिला करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हम एक समर्थ और विकसित राष्ट्र की कल्पना कर रहे हैं, तो उसकी नींव एक शिक्षित और संस्कारित पीढ़ी पर ही टिकी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के जन-जन से इस अभियान को एक ‘जन-आंदोलन’ के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।
‘शिक्षा ही प्रगति का असली इंजन’
समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा केवल साक्षरता का साधन नहीं है, बल्कि यह वह माध्यम है जो एक साधारण बच्चे को कुशल चिकित्सक, अनुशासित शिक्षक, कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी और राष्ट्रप्रेमी जनप्रतिनिधि के रूप में गढ़ती है। 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जब इस अभियान की नींव रखी गई थी, तब लक्ष्य स्पष्ट था—उत्तर प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से अछूता न रहे। आज इस संकल्प के सकारात्मक परिणाम प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।
‘ऑपरेशन कायाकल्प’ से बदली स्कूलों की सूरत
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों की उपेक्षा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 2017 से पहले बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की स्थिति दयनीय थी। उस समय केवल 36 प्रतिशत स्कूल ही बुनियादी सुविधाओं से लैस थे, जबकि बाकी स्कूलों में शौचालय, पीने का शुद्ध पानी, फर्नीचर और चारदीवारी जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का घोर अभाव था।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ जैसा क्रांतिकारी कदम उठाया। आज स्थिति यह है कि सरकारी विद्यालय आधुनिक सुविधाओं, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और स्वच्छ वातावरण का केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्येय केवल इमारतें खड़ी करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को एक ऐसा वातावरण प्रदान करना है जहां वे बिना किसी बाधा के सीख सकें।
जन-भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, सांसदों, विधायकों और ग्राम प्रधानों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से कहा कि वे अगले 15 दिनों तक एक विशेष नामांकन अभियान चलाएं। प्रत्येक बच्चे को समय पर यूनिफॉर्म, बैग, किताबें और जूते-मोजे उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, और इसमें कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से मार्मिक अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजें, क्योंकि शिक्षा से वंचित रहने वाला एक बच्चा पूरे राष्ट्र के भविष्य का नुकसान है।
शिक्षकों के लिए कल्याणकारी कदम
शिक्षण जगत से जुड़े कर्मियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए सीएम योगी ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये और अनुदेशकों के मानदेय को 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया है। इसके अलावा, शिक्षकों और रसोइयों सहित अन्य कर्मचारियों को 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा का लाभ दिया जा रहा है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपना पूरा ध्यान बच्चों के भविष्य निर्माण में लगा सकें।
भविष्य की राह: कौशल और डिजिटल शिक्षा
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति-2020 को पूरी तन्मयता से लागू कर रही है। अब स्कूलों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ (करके सीखने) और कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष ध्यान देते हुए 23 हजार से अधिक बालिकाओं को छात्रवृत्ति दी गई है और उन्हें आधुनिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि आने वाले 15 दिनों में हर वार्ड और हर गांव से एक-एक बच्चे को चिन्हित कर स्कूल तक पहुँचाना ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।





















































