लखनऊ: उत्तर प्रदेश में युवाओं को सरकारी सेवा से जोड़ने का महाअभियान लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है। राजधानी लखनऊ स्थित रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित भव्य समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस महकमे को नई मजबूती देते हुए 4,543 नवचयनित उपनिरीक्षकों (दारोगाओं) को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने एक बड़ा राजनीतिक व प्रशासनिक संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि प्रदेश में निष्पक्ष भर्ती का यह चक्र कभी थमने वाला नहीं है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ ऐलान किया कि मौजूदा लक्ष्य पूरे होने के बाद भी रोजगार का सिलसिला अनवरत चलेगा और अगली यानी तीसरी बार सरकार बनने पर भी नौजवानों को इसी तरह पारदर्शी ढंग से नियुक्ति पत्र बांटे जाएंगे।
‘न घूस, न सिफारिश’… मंच से सीएम ने नवनियुक्त दारोगाओं से किया सीधा संवाद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से नवचयनित अभ्यर्थियों से सीधा संवाद स्थापित कर भर्ती की शुचिता का प्रमाण लिया। उन्होंने हॉल में मौजूद अभ्यर्थियों से स्पष्ट सवाल किया कि क्या इस पद को पाने के लिए किसी को किसी रसूखदार की पैरवी लगानी पड़ी? क्या किसी स्तर पर रुपयों का लेन-देन हुआ या किसी बिचौलिए ने रिश्वत की मांग की? क्या किसी ने धौंस या दबाव के दम पर सूची में स्थान बनाया?
सभागार से मिले एक स्वर में ‘ना’ के जवाब पर सीएम ने कहा कि आज का नया उत्तर प्रदेश पूरी तरह बदल चुका है। 2017 के बाद सूबे की कार्यसंस्कृति में क्रांतिकारी बदलाव आया है, जहां भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सिफारिशी तंत्र को जड़ से उखाड़ फेंका गया है। अब प्रदेश के मेधावी नौजवानों को केवल और केवल उनकी मेहनत, प्रतिभा और मेरिट के आधार पर खाकी वर्दी व सरकारी सेवा का सम्मान मिल रहा है।
2003 से 2017 के दौर पर तीखा प्रहार: ‘सैफई सिंडिकेट’ ने युवाओं के हक पर डाला था डाका
विपक्षी दलों के पुराने शासनकाल पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2003 से 2017 के दरम्यान भर्तियां धांधली और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहीं। उस दौर में सरकारी नौकरियों का मतलब ‘सैफई सिंडिकेट’ बन चुका था, जिससे राज्य के बाकी जिलों के प्रतिभावान अभ्यर्थियों के अवसर छिन जाते थे। आलम यह था कि परीक्षा का फॉर्म कोई भरता था और जॉइनिंग किसी दूसरे को थमा दी जाती थी।
सीएम ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कई फर्जीवाड़े आज भी अदालतों में विचाराधीन हैं। उन्हें उन युवाओं के भविष्य की फिक्र होती है जिनकी सेवाएं अदालत के किसी सख्त आदेश से कभी भी समाप्त हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि जिन षड्यंत्रकारियों ने फर्जीवाड़े के जरिए नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ किया, यदि न्यायालय उनकी संपत्तियों को कुर्क और जब्त करने का आदेश देता है तो उन्हें सर्वाधिक प्रसन्नता होगी।
खजाना खाली था, बैरक जर्जर थीं… ऐसे बदली खाकी और यूपी की सूरत
2017 के दौर को याद करते हुए सीएम योगी ने कहा कि जब उनकी सरकार ने जिम्मेदारी संभाली थी, तब खजाने की हालत इतनी खराब थी कि मुलाजिमों को वेतन देने तक के लाले पड़े थे। पुलिस महकमा घोर उपेक्षा का शिकार था, जवानों के रहने की बैरकें बदहाल और जर्जर थीं, जहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव था।
सरकार ने सुनियोजित नीति के तहत न सिर्फ आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाया, बल्कि पुलिस आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय स्वरूप दिया। सीएम ने नवनियुक्त पुलिस अधिकारियों से आह्वान किया कि वे इस पारदर्शी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ जनसेवा में जुट जाएं।
सवा लाख से ज्यादा को मिली नौकरी, 25 हजार शिक्षकों की भर्ती जल्द
रोजगार के आंकड़ों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 9.50 लाख सरकारी नियुक्तियां पूरी करने के संकल्प के बाद एक लाख अतिरिक्त पदों पर भर्ती का लक्ष्य तय किया गया था, जो अब पूर्णता की ओर है। हाल के दौर में ही एक लाख से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्तियों का यह प्रवाह रुकेगा नहीं; कुछ नियुक्तियां आगे के लिए सुरक्षित रखी जाएंगी ताकि तीसरी बार सत्ता में आने पर भी यह वितरण जारी रहे।
इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि बेसिक शिक्षा विभाग में 25 हजार शिक्षकों की आगामी भर्ती प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ाकर युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। यह अभियान बिना रुके, बिना झुके और बिना डिगे निरंतर जारी रहेगा।
मेहनत का कोई विकल्प नहीं: वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बढ़ाया उत्साह
समारोह में उपस्थित वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सभी नवनियुक्त दारोगाओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज इन युवाओं को वह गौरवशाली दायित्व मिला है, जिसका सपना प्रदेश के लाखों नौजवान देखते हैं।
सुरेश खन्ना ने कहा कि यह ऐतिहासिक चयन बिना किसी भेदभाव या पक्षपात के केवल अभ्यर्थियों के अथक परिश्रम का प्रतिफल है। पारदर्शी चयन प्रणाली ने यह साबित कर दिया है कि निष्पक्ष व्यवस्था में सच्ची लगन और अटूट परिश्रम से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

















































