उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे व्यस्त और प्रमुख चारबाग रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की सुबह एक खौफनाक हादसा हो गया। प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर अचानक भारी-भरकम टीन शेड गिरने से स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई और कई यात्री इसकी चपेट में आ गए। हादसे में घायल हुए 3 यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि रेलवे प्रशासन ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- हादसे का समय: शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे चारबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर हुआ हादसा।
- घायल यात्री: शेड के मलबे में दबकर 3 यात्री घायल, आलमबाग के एक निजी अस्पताल में चल रहा है इलाज।
- राहत और बचाव: घटना के तुरंत बाद RPF और GRP की टीमों ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन।
- पृष्ठभूमि: स्टेशन पर चल रहा है एयर कॉनकोर्स का निर्माण, प्लेटफॉर्म नंबर 4 पहले से ही रखा गया है बंद।
- बड़ा एक्शन: मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ने कार्यदायी संस्था और लापरवाह कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई के दिए आदेश।
चीख-पुकार और भगदड़: जब अचानक गिरा टीन शेड
लखनऊ का चारबाग रेलवे स्टेशन हमेशा यात्रियों की भारी भीड़ से गुलजार रहता है। शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर आम दिनों की तरह ही यात्रियों की आवाजाही हो रही थी। लोग अपनी ट्रेनों का इंतजार कर रहे थे, तभी अचानक प्लेटफॉर्म के ऊपर लगा टीन शेड का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे आ गिरा। हादसा इतना अचानक हुआ कि यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भारी-भरकम शेड के गिरते ही स्टेशन पर धूल का गुबार छा गया और हर तरफ चीख-पुकार मच गई। अपनी जान बचाने के लिए यात्री इधर-उधर भागने लगे, जिससे मौके पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस खौफनाक मंजर में कई लोग शेड की चपेट में आ गए।
RPF और GRP का तत्परता से रेस्क्यू, अस्पताल पहुंचे DRM
हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। बिना कोई समय गंवाए रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय रेलवे के आला अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए। जवानों ने तत्परता दिखाते हुए गिरे हुए शेड के मलबे को हटाया और उसके नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस हादसे में 3 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। रेलवे की मेडिकल टीम ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया, जिसके बाद सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए आलमबाग स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ने खुद अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और उनके समुचित इलाज के निर्देश दिए।
ट्रेनों की आवाजाही ठप, एयर कॉनकोर्स का चल रहा है निर्माण
इस हादसे के बाद एहतियात के तौर पर प्लेटफॉर्म नंबर 5 से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की आवाजाही को तुरंत रोक दिया गया। रेलवे कर्मियों की टीमें युद्ध स्तर पर गिरे हुए शेड और मलबे को हटाने के काम में जुटी हुई हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, चारबाग स्टेशन को आधुनिक बनाने के लिए वर्तमान में ‘एयर कॉनकोर्स’ के निर्माण का एक बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है। निर्माण कार्य की सुरक्षा और सुगमता को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 4 को पहले ही 15 मई से 23 जून तक यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए पूरी तरह से बंद किया जा चुका है।
लापरवाही पर गिरेगी गाज: जिम्मेदार एजेंसी पर सख्त एक्शन के निर्देश
यह हादसा रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। गनीमत रही कि हादसे के वक्त शेड के ठीक नीचे ज्यादा भीड़ नहीं थी, अन्यथा जनहानि का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था। डीआरएम ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार निर्माण एजेंसी और ड्यूटी पर तैनात लापरवाह रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
चारबाग जैसे अति व्यस्त रेलवे स्टेशन पर इस तरह का हादसा प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। विकास और आधुनिकीकरण के कार्य जरूरी हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि निर्माण कार्यों के दौरान आम यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े। फिलहाल घायलों का इलाज जारी है और रेलवे की प्राथमिकता प्रभावित प्लेटफॉर्म को जल्द से जल्द सुरक्षित कर ट्रेनों का सुचारू संचालन बहाल करना है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस हादसे से सबक लेते हुए रेलवे भविष्य में सुरक्षा मानकों की और अधिक सख्ती से निगरानी करेगा।





















































