उत्तर प्रदेश की जेलों की सूरत और सीरत अब पूरी तरह बदलने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की जेलों को महज सजा काटने का ठिकाना न बनाकर उन्हें ‘सुधार गृह’ में तब्दील करने का बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अब उत्तर प्रदेश में छोटे-मोटे अपराध करने वालों के लिए ‘ओपन जेल’ की शुरुआत की जाएगी, जबकि खूंखार माफिया और पेशेवर अपराधी सलाखों के पीछे ही रहेंगे।
अपराधियों के पुनर्वास और कौशल विकास पर सरकार का ध्यान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित जेल विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जेलें केवल अपराधियों को कैद रखने की जगहें नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय, उन्हें सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास के प्रभावी केंद्रों के रूप में काम करना चाहिए। सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्थाओं और कैदियों में सकारात्मक सुधार लाने वाली गतिविधियों के जरिये राज्य की जेलों को एक नई और मानवीय पहचान दी जानी चाहिए। सरकार का उद्देश्य कैदियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए तैयार करना है।
क्या है ‘ओपन जेल’ का कॉन्सेप्ट और किसे मिलेगा इसका फायदा?
इस बैठक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी फैसला ‘ओपन जेल’ (खुली जेल) को लेकर रहा। मुख्यमंत्री ने इस अवधारणा को विशेष महत्व देते हुए अधिकारियों को इसके तत्काल क्रियान्वयन के लिए एक विशेष कार्य योजना तैयार करने का आदेश दिया। खुली जेल की व्यवस्था के तहत ऐसे कैदियों को रखा जाता है जिनका समाज के लिए खतरा न्यूनतम होता है और जिन्होंने अनजाने में या छोटे-मोटे अपराध किए हैं। सीएम योगी ने स्पष्ट नीति निर्देश देते हुए कहा कि जेलों में मुख्य रूप से पेशेवर अपराधियों और माफिया तत्वों को ही रखा जाना चाहिए, जबकि खुली जेलों की उपयोगिता छोटे-मोटे अपराधों में बंद कैदियों के व्यवहार को सुधारने के लिए की जाएगी।
बुजुर्गों, बीमारों और मजबूर कैदियों को मिलेगी बड़ी राहत
मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को समाज के संवेदनशील और असहाय कैदियों की सुध लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन को तुरंत एक व्यापक सूची तैयार करनी चाहिए जिसमें 75 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग कैदी, गंभीर और जानलेवा बीमारियों से पीड़ित मरीज, जेल में अपने मासूम बच्चों के साथ रह रही महिला कैदी और ऐसे गरीब बंदी शामिल हों जो सिर्फ जमानत की मामूली राशि जमा न कर पाने के कारण सालों से सलाखों के पीछे बंद हैं। सरकार इन कैदियों को कानूनी दायरे में रहकर जल्द से जल्द राहत देने पर विचार कर रही है।
समय से पहले रिहाई के आंकड़ों में भारी उछाल, व्यवस्था में आई पारदर्शिता
समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सामने उत्तर प्रदेश की जेलों में पिछले कुछ वर्षों में हुए सुधारों के आंकड़े भी पेश किए। आंकड़ों के मुताबिक, पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में मौजूदा कार्यकाल में कैदियों की समय से पहले रिहाई की व्यवस्था में तेजी और पारदर्शिता आई है। वर्ष 2012 और 2016 के बीच जहां केवल 273 कैदियों को समय से पहले रिहा किया गया था, वहीं 2017 और 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 हो गई। इसके बाद, साल 2022 से 2026 के बीच यह ग्राफ और ऊपर गया और कुल 3846 कैदियों को रिहा किया गया। इसी तरह, जुर्माना अदा करने के बाद जेल से छूटने वाले कैदियों की संख्या भी 2012-16 के दौरान 2823 थी, जो 2017 से 2026 के बीच बढ़कर 6231 तक पहुंच गई।
जेलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
उत्तर प्रदेश की कई जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के होने की समस्या को दूर करने के लिए भी मुख्यमंत्री ने कड़े कदम उठाने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य में वर्तमान में जितनी भी नई जेल और बैरक निर्माण की परियोजनाएं चल रही हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। जेलों में सुरक्षा व्यवस्था, कैदियों की स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता और तकनीकी सुदृढ़ीकरण की नियमित निगरानी करने के निर्देश भी वरिष्ठ अधिकारियों को दिए गए हैं ताकि जेल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की अराजकता या लापरवाही को पनपने का मौका न मिल सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ये ताजा निर्देश उत्तर प्रदेश के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम और जेल प्रबंधन में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। जहां एक तरफ यह कदम पेशेवर अपराधियों और माफियाओं पर नकेल कसने की प्रतिबद्धता को दोहराता है, वहीं दूसरी तरफ छोटे अपराधियों को सुधरने का मौका देकर और बुजुर्गों-गरीबों के प्रति दया भाव दिखाकर सरकार ने अपने मानवीय चेहरे को भी सामने रखा है। इन बदलावों से न केवल जेलों का प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा, बल्कि कैदियों के मानवाधिकारों की रक्षा और उनके सामाजिक पुनर्वास का रास्ता भी साफ होगा।





















































