उत्तर प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार अमेठी की सियासी जमीन पर एक बार फिर हलचल चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया दौरे के तुरंत बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने अमेठी पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया है। बुधवार को उनके इस रणनीतिक दौरे ने साफ कर दिया है कि अमेठी की बिसात पर शह और मात का खेल आने वाले दिनों में और भी दिलचस्प होने वाला है।
- राहुल गांधी के अमेठी दौरे के ठीक बाद भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने भी किया क्षेत्र का दौरा, सियासी पारा चढ़ा।
- जिले की सीमा पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं और गगनभेदी नारों के साथ किया स्मृति ईरानी का भव्य स्वागत।
- मुसाफिरखाना में आयोजित कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होकर बूथ स्तर को मजबूत करने का दिया जीत का मंत्र।
- सिंहपुर ब्लॉक के मत्तेपुर गांव पहुंचकर वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश तिवारी के भाई के निधन पर जताया गहरा शोक।
- राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, दोनों दिग्गज नेताओं की बढ़ती सक्रियता से अमेठी में आगामी दिनों में टकराव तेज होने के संकेत।
राहुल के बाद स्मृति की एंट्री, अमेठी की सियासत में आया नया उबाल
अमेठी संसदीय क्षेत्र हमेशा से देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। पिछले दिनों कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अमेठी का दौरा कर अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की थी। इसके ठीक बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का अचानक अमेठी पहुंचना बेहद अहम माना जा रहा है। जैसे ही बुधवार को स्मृति ईरानी ने जिले की सीमा में प्रवेश किया, पहले से ही मुस्तैद भाजपा कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं और गगनभेदी नारों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। कई प्रमुख चौराहों पर स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिससे साफ संदेश गया कि भाजपा इस गढ़ को किसी भी कीमत पर अपनी नजरों से ओझल नहीं होने देना चाहती।
मुसाफिरखाना में ‘बूथ विजय’ का संकल्प और कार्यकर्ताओं को गुरुमंत्र
अपने इस व्यस्त दौरे के दौरान स्मृति ईरानी सीधे मुसाफिरखाना में आयोजित भाजपा कार्यकर्ताओं के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस मंच से उन्होंने पार्टी के कोर संगठन को रीढ़ की हड्डी बताते हुए बूथ स्तर तक पकड़ मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि हमारी ताकत हमारा कार्यकर्ता है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच सक्रिय रहें और केंद्र व राज्य की योगी-मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाएं। इस दौरान जनसंपर्क बढ़ाने के उनके निर्देश पर मौजूद पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी भारी उत्साह दिखाया।
राजनीतिक व्यस्तता के बीच मानवीय संवेदना: मत्तेपुर गांव पहुंचीं स्मृति
स्मृति ईरानी का यह दौरा सिर्फ राजनीतिक बैठकों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने एक बार फिर अपनी जमीनी और पारिवारिक कनेक्टिविटी का अहसास कराया। वह सिंहपुर ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूरे ठकुराइन मजरे मत्तेपुर गांव पहुंचीं। यहाँ उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश तिवारी के भाई बृजेश तिवारी के असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने शोक संतप्त परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और काफी समय परिजनों के बीच बिताया। स्थानीय लोगों का मानना है कि सुख-दुख में इस तरह खड़े होना ही स्मृति ईरानी की इस क्षेत्र में गहरी पैठ को बनाए रखता है।
दिल्ली से अमेठी तक नजर, क्या है इस बड़े ‘काउंटर अटैक’ के मायने?
राजनीतिक गलियारों और विशेषज्ञों की मानें तो अमेठी में दोनों प्रमुख दलों की यह बढ़ती सक्रियता एक बड़े सियासी टकराव की ओर इशारा कर रही है। राहुल गांधी के दौरे के तुरंत बाद स्मृति ईरानी का जमीन पर उतरना भाजपा की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत विपक्षी दल को जमीन पर बढ़त बनाने का कोई भी मौका नहीं दिया जाना है। संगठन में नई ऊर्जा फूंकने और कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रखने के लिए स्मृति ईरानी की यह मौजूदगी आगामी स्थानीय और राज्य स्तर के चुनावों के लिहाज से भी काफी असरदार साबित हो सकती है।
अमेठी की धरती पर दोनों धुरंधरों की यह समानांतर सक्रियता इस बात की गवाही दे रही है कि चुनाव चाहे जो भी हो, यहाँ की राजनीतिक जंग कभी ठंडी नहीं पड़ती। एक तरफ जहां कांग्रेस अपने पुराने गढ़ को दोबारा पूरी तरह से सहेजने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ स्मृति ईरानी और भाजपा संगठन इस किले को अभेद्य बनाए रखने के लिए लगातार पसीना बहा रहे हैं। आने वाले दिनों में जनता के बीच खुद को साबित करने की यह होड़ अमेठी की राजनीति को एक नया मोड़ देने के लिए पूरी तरह तैयार है।





















































