उत्तर प्रदेश के बांदा से शुरू हुई ‘गविष्टि यात्रा’ के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गौ संरक्षण के मोर्चे पर पूरी तरह ‘विफल’ करार देते हुए कहा कि जिससे सबसे ज्यादा उम्मीद थी, वही उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। इसके साथ ही उन्होंने बुंदेलखंड में हो रही किसानों की आत्महत्याओं को विपरीत परिस्थितियों में की जा रही ‘जबरन हत्या’ बताकर सूबे के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
बांदा से शुरू हुई ‘गविष्टि यात्रा’, उमड़ रहा जनसैलाब
ज्योतिर्मठ पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की बहुप्रतीक्षित ‘गविष्टि यात्रा’ उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से शुरू हो गई है। इस यात्रा को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं और सनातन धर्मावलंबियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। यात्रा के शुभारंभ के मौके पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने एक बार फिर गाय को महज एक ‘पशु’ की सूची से हटाकर ‘माता’ घोषित करने की अपनी पुरानी मांग को पुरजोर तरीके से दोहराया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा गौ माता के सम्मान और उनकी सुरक्षा की अलख जगाने के लिए निकाली जा रही है, जिसे हर वर्ग का भरपूर समर्थन मिल रहा है। हम जहां भी जा रहे हैं, लोग इसमें शामिल होने के लिए दौड़ पड़ते हैं।
‘गोरक्षपीठ से जुड़े योगी से थीं बड़ी उम्मीदें, लेकिन वो फेल रहे’
योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद एक प्रतिष्ठित गोरक्षपीठ से आते हैं। ऐसे में पूरे देश के संतों और सनातनी समाज को उनसे यह उम्मीद थी कि उनके कार्यकाल में गायों की दशा सुधरेगी और उन्हें उचित सम्मान मिलेगा। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा,
“मैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले में पूरी तरह फेल कहूंगा। राजनीति और शासन में नियम है कि जिस व्यक्ति से जिस काम की सबसे ज्यादा उम्मीद होती है, उसे सबसे पहले वही जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए। लेकिन यहाँ ऐसा नहीं हुआ। आज योगी आदित्यनाथ केवल बुलडोजर लेकर आए हैं और सबको डरा-धमकाकर शासन चलाने में व्यस्त हैं।”
‘मुस्लिम समाज भी गाय को माता मानने को तैयार, फिर देरी क्यों?’
शंकराचार्य ने इस दौरान एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक दावा भी किया। उन्होंने कहा कि देश का मुस्लिम समुदाय भी अब गाय को विशेष दर्जा देने के खिलाफ नहीं है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, मुस्लिम समाज के लोग अब खुलकर सामने आ रहे हैं और कह रहे हैं कि अगर सरकार गाय को पशु की सूची से हटाकर ‘माता’ का दर्जा देती है, तो उन्हें इस पर कोई ऐतराज नहीं है। इसके साथ ही देश का कोई भी अन्य राजनीतिक दल इस पावन कदम का विरोध नहीं कर रहा है। जब देश में इस मुद्दे पर इतनी आम सहमति दिख रही है, तो फिर वर्तमान सरकार गाय को उसका हक देने और माता का दर्जा देने में क्यों हिचकिचा रही है?
बुंदेलखंड में आत्महत्याएं नहीं, परिस्थितियां कर रही हैं ‘मर्डर’
बुंदेलखंड क्षेत्र की गंभीर समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने वहां हो रही किसानों और आम लोगों की आत्महत्याओं पर बेहद संवेदनशील टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की धरती पर जो आत्महत्याएं हो रही हैं, उन्हें सामान्य आत्महत्या नहीं माना जा सकता। यह असल में वहां की प्रतिकूल और दमनकारी परिस्थितियों के कारण होने वाली ‘जबरन हत्याएं’ जैसी हैं। सरकार को इन परिस्थितियों को बदलने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि निर्दोष जिंदगियों को समय रहते बचाया जा सके।
मनमानी रोकने और समाज को सुधारने की शक्ति है सनातन में
इंटरव्यू के आखिरी हिस्से में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सनातन धर्म की मूल भावना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म कभी भी किसी को मनमानी करने की इजाजत नहीं देता। यह एक ऐसी जीवन पद्धति है जिसमें समाज के हर व्यक्ति को नियंत्रित करने, अनुशासित रखने और उसमें नैतिक सुधार लाने की अद्भुत क्षमता है। सनातन धर्म की सीख ही यह है कि कोई भी व्यक्ति गलत काम न करे और समाज में लोक कल्याण की भावना बनी रहे।बांदा से शुरू हुई शंकराचार्य की इस ‘गविष्टि यात्रा’ और उनके तल्ख बयानों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया उबाल ला दिया है। विशेष रूप से गौ संरक्षण और बुलडोजर नीति पर गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर व सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरना, आने वाले दिनों में वैचारिक और राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। अब देखना यह होगा कि शंकराचार्य के इन गंभीर आरोपों और मांगों पर सत्तापक्ष या संगठन की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।





















































