उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी वाराणसी से मानवता को पूरी तरह झकझोर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक कलयुगी मां ने चंद रुपयों और कुछ साड़ियों के लालच में अपनी ही 12 वर्षीय मासूम बेटी का सौदा कर दिया। इसके बाद उस लाचार बच्ची को जिस नरक से गुजरना पड़ा, उसकी आपबीती सुनकर बाल कल्याण समिति और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं।
- वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र में पुलिस ने एक रूह कंपा देने वाले बाल तस्करी और बाल यौन शोषण के मामले का पर्दाफाश किया है।
- बिहार की रहने वाली एक महिला ने अपनी 12 साल की नाबालिग बेटी को चंदौली के एक शख्स को मात्र 16000 रुपये और 10 साड़ियों में बेच दिया।
- मुख्य आरोपी खरीदार ने मंदिर में जबरन शादी रचाकर मासूम को बंधक बनाया, लगातार दुष्कर्म किया और फिर उसे रेलवे स्टेशन पर लावारिस छोड़ दिया।
- मदद के बहाने एक अन्य ऑटो चालक ने भी मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाया; रोती-बिलखती बच्ची को देखकर स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
- सारनाथ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कलयुगी मां, मुख्य आरोपी खरीदार और ऑटो चालक तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
चंद रुपयों और साड़ियों के लिए ममता का सौदा
यह खौफनाक दास्तां इस साल के जनवरी महीने से शुरू होती है। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं। मूल रूप से बिहार की रहने वाली एक महिला ने पैसों की हवस और लालच में आकर अपनी ममता का ही सौदा कर डाला। उसने अपनी 12 साल की मासूम बच्ची को चंदौली के रहने वाले लहरू यादव उर्फ राकेश नाम के व्यक्ति को बेच दिया। इस सौदे की कीमत बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक थी। कलयुगी मां ने अपनी सगी बेटी को महज 16000 रुपये नगद और 10 साड़ियों के बदले उस अनजान शख्स के हवाले कर दिया।
मंदिर में जबरन शादी और चार महीने का खौफनाक नरक
मासूम बच्ची को खरीदने के बाद आरोपी लहरू यादव उसे चंदौली ले गया। वहां उसने एक स्थानीय मंदिर में इस 12 साल की बच्ची के साथ जबरन शादी रचा ली, जिसे कानूनन और सामाजिक रूप से किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद आरोपी ने मासूम को अपने घर में बंधक बना लिया। वह न सिर्फ उसके साथ लगातार डरा-धमकाकर दुष्कर्म करता रहा, बल्कि उससे घर की बंधुआ नौकरानी की तरह दिन-रात कड़ा काम भी कराने लगा। करीब चार महीने तक यह प्रताड़ना चलती रही। जब आरोपी का मन भर गया, तो उसने 19 मई को बच्ची को वाराणसी के मंडुवाडीह स्थित बनारस रेलवे स्टेशन के पास लावारिस हालत में छोड़ दिया और खुद वहां से रफूचक्कर हो गया।
मदद के नाम पर ऑटो चालक ने भी की घिनौनी दरिंदगी
रेलवे स्टेशन पर अकेली, डरी और सहमी हुई मासूम अपने घर वापस जाने का रास्ता तलाश रही थी। इसी दौरान उसकी मजबूरी का फायदा उठाने वहां एक और दरिंदा पहुंच गया। झारखंड के रहने वाले एक ऑटो चालक रवि वर्मा ने स्टेशन के पास रोती हुई बच्ची को देखा। उसने बच्ची को झांसा दिया कि वह उसे उसकी मां से मिला देगा। मासूम उसकी बातों में आ गई और ऑटो में बैठ गई। लेकिन आरोपी रवि वर्मा उसे उसकी मां के पास ले जाने के बजाय सारनाथ स्थित एक सुनसान तालाब के किनारे ले गया। वहां उसने बच्ची की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया और वारदात को अंजाम देने के बाद उसे वहीं तड़पता हुआ छोड़कर भाग निकला।
लावारिस हाल में मिली मासूम, सीडब्ल्यूसी के सामने खुली कड़वी सच्चाई
इस दोहरी दरिंदगी से पूरी तरह टूट चुकी मासूम बच्ची 21 मई को सारनाथ इलाके में सड़क किनारे रोती-बिलखती और भटकती हुई स्थानीय लोगों को दिखाई दी। बच्ची की ऐसी दयनीय हालत देखकर स्थानीय नागरिकों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को रेस्क्यू किया और नियमानुसार उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया गया। बाल कल्याण समिति के सदस्यों के सामने जब बच्ची ने रोते हुए अपनी आपबीती और अपनी मां की करतूत बयां की, तो वहां मौजूद हर शख्स सन्न रह गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, सलाखों के पीछे पहुंचे तीनों गुनहगार
मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए वाराणसी पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई। सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सारनाथ, विदुष सक्सेना ने बताया कि बच्ची के बयानों और जांच के आधार पर पुलिस ने तत्काल पॉक्सो एक्ट, मानव तस्करी और दुष्कर्म जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस टीमों ने तेजी से दबिश देते हुए 23 मई को इस घिनौने अपराध में शामिल तीनों मुख्य किरदारों—बच्ची की कलयुगी मां, खरीदार लहरू यादव और ऑटो चालक रवि वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट में पेशी के बाद तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
वाराणसी में घटी यह घटना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि समाज में नैतिक मूल्यों का किस कदर पतन हो चुका है, जहां एक मां ही अपनी बच्ची की सबसे बड़ी रक्षक होने के बजाय उसकी भक्षक बन गई। ऐसे मामलों में जहां अपनों का ही साथ छूट जाए, वहां सामाजिक जागरूकता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ही पीड़ित बच्चों के लिए न्याय की एकमात्र उम्मीद बनती है। स्थानीय समाज और जागरूक नागरिकों की सतर्कता के कारण ही आज यह मासूम इन दरिंदों के चंगुल से मुक्त हो सकी है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के माध्यम से इन आरोपियों को कितनी जल्दी और कितनी कड़ी सजा मिलती है, ताकि समाज में बाल अपराध और मानव तस्करी में लिप्त अपराधियों को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया जा सके।





















































