लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, को आड़े हाथों लिया है। राजधानी लखनऊ में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए डिप्टी सीएम ने विपक्ष के इस रुख को सरासर पाखंड और दोहरा चरित्र करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब चुनावी नतीजे विपक्ष के अनुकूल आते हैं तो लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएं निष्पक्ष नजर आती हैं, किंतु पराजय मिलते ही संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है। इस अवसर पर उन्होंने सपा के बहुचर्चित ‘पीडीए’ फॉर्मूले और विपक्षी गठबंधन ‘इंडी’ की रणनीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया।
‘मीठा-मीठा गप और तीखा-तीखा थू’ की नीति पर चल रहा विपक्ष
उपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस के बयानों का सीधा जवाब देते हुए इतिहास के पन्नों को पलटा। उन्होंने सवाल दागा कि वर्ष 2004 और 2009 के आम चुनावों में जब कांग्रेस केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई थी, तब क्या निर्वाचन आयोग और ईवीएम प्रणाली में कोई खोट नजर आया था? केशव प्रसाद मौर्य ने इस सियासी रवैये को ‘मीठा-मीठा गप, तीखा-तीखा थू’ की अवसरवादी नीति की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि विजय के समय व्यवस्था की सराहना और पराजय के समय उसी संवैधानिक ढांचे पर दोषारोपण करना विपक्ष की राजनीतिक हताशा और विवशता को जगजाहिर करता है।
सत्ता का दिवास्वप्न देख रहे दल, जनता भूली नहीं पुराना कुशासन
पत्रकारों से वार्ता के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने रेखांकित किया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और उनके सहयोगी दल पुन: हुकूमत हासिल करने के मुगालते में जी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जागरूक जनता इन दलों के पूर्ववर्ती कार्यकालों की जमीनी हकीकत और वर्तमान नकारात्मक रुख से भलीभांति परिचित है। मौर्य ने आरोप लगाया कि पिछली विपक्षी सरकारों ने उत्तर प्रदेश को बुनियादी विकास देने के बजाय अराजकता, घोर परिवारवाद, प्रशासनिक लचरता और पिछड़ेपन की गर्त में धकेलने का काम किया था। उत्तर प्रदेश की जनता अब किसी भी सूरत में उस अंधकारमय दौर की वापसी नहीं चाहती।
चाहे साथ लड़ें या अलग, नहीं थमेगा भाजपा का विजय रथ: 2027 का लक्ष्य तय
विपक्षी एकजुटता और ‘इंडी’ गठबंधन की चुनौतियों को सिरे से खारिज करते हुए उपमुख्यमंत्री ने साफ कहा कि समाजवादी पार्टी और समूचा गठबंधन भाजपा का राजनीतिक विरोधी है। वे चुनावी समर में साझा मंच बनाकर उतरें अथवा अलग-अलग अपनी किस्मत आजमाएं, भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ की रफ्तार को थामने में कोई कामयाब नहीं होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है और जन-जन का अटूट आशीर्वाद पार्टी के साथ बना हुआ है।
अखिलेश यादव के ‘PDA’ रथ को बताया सियासी छलावा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा संचालित पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान पर तंज कसते हुए मौर्य ने इसे पूरी तरह ‘फर्जी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का पीडीए और उनका प्रचार रथ मात्र एक राजनीतिक ढोंग है। जमीनी धरातल पर पिछड़े, शोषित, दलित और वंचित वर्गों के समग्र उत्थान और सशक्तीकरण का वास्तविक कार्य केंद्र व प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने किया है। भाजपा सरकार ने किसी भेदभाव के बिना गरीब, अन्नदाता किसान, मातृशक्ति, युवा और समाज के अंतिम पायदान पर मौजूद नागरिकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है।
सुशासन और जनकल्याण के रिपोर्ट कार्ड के साथ जाएंगे जनता के बीच
केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि राज्य की भाजपा सरकार ठोस विकास, पारदर्शी सुशासन और व्यापक जनकल्याण के स्पष्ट एजेंडे के साथ काम कर रही है। सरकार ने पिछले वर्षों में राज्य की छवि को बदलकर कानून-व्यवस्था और औद्योगीकरण का नया मॉडल पेश किया है। वर्ष 2027 के रण में पार्टी अपने इसी सेवा भाव और उपलब्धियों के प्रमाणित रिपोर्ट कार्ड को लेकर जनता की अदालत में जाएगी और जनविश्वास के बल पर पुनः ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी।





















































