उत्तर और पूर्वी भारत के विस्तृत भूभाग में बिगड़े मौसम ने व्यापक तबाही मचा रखी है। लगातार बरसते बादलों और नदियों के विकराल जलस्तर ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश और अंधड़ के चलते जान-माल का भारी नुकसान सामने आया है, वहीं पर्वतीय राज्यों में बेमौसम बर्फबारी और भूस्खलन के खतरे ने प्रशासनिक तंत्र को अलर्ट मोड पर ला खड़ा किया है। उत्तर प्रदेश में बीते 65 घंटों से जारी आफत की बरसात से अब तक 29 नागरिकों की असामयिक मृत्यु हो चुकी है। दूसरी ओर, बिहार के सीमावर्ती इलाकों में नेपाल से आए पानी के वेग ने हजारों बस्तियों को जलमग्न कर दिया है, जिससे बड़े पैमाने पर विस्थापन और तबाही की स्थिति बन गई है।
उत्तर प्रदेश: 45 शहरों में पानी का पहरा, 22 जिलों में अचानक बाढ़ का साया
उत्तर प्रदेश के लगभग 45 प्रमुख नगरों में पिछले 65 घंटों से लगातार हो रही घनघोर वर्षा ने आम व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। राज्य की राजधानी लखनऊ के अलावा कानपुर, अयोध्या, उन्नाव, बाराबंकी, जौनपुर और चित्रकूट जैसे जनपदों में बारिश और तेज हवाओं ने विकट संकट उत्पन्न कर दिया है। आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली गिरने तथा जर्जर भवनों के ढहने से संबंधित त्रासद घटनाओं में अब तक 29 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है।
तीव्र हवाओं के चलते जगह-जगह बिजली के खंभे और विशालकाय वृक्ष उखड़ गए हैं, जिसके कारण कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति घंटों से बाधित है। इसके साथ ही सैकड़ों बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो जाने से किसानों की खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। लगभग 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही हवाओं के बीच मौसम वैज्ञानिकों ने प्रदेश के 22 जनपदों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने का अंदेशा जताया है। चित्रकूट में पावन मंदाकिनी नदी का जलस्तर चेतावनी रेखा को लांघ चुका है, जिससे प्रसिद्ध घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं और तटीय इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
बिहार: तटबंधों पर दबाव, कोसी और गंडक ने डुबोए 500 से अधिक मकान
पड़ोसी राज्य बिहार में बाढ़ की भयावहता दिन-प्रतिदिन गहराती जा रही है। नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार सक्रिय मानसूनी बादलों के कारण कोसी और गंडक नदियों का जलस्तर रौद्र रूप धारण कर चुका है। यद्यपि चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का प्रभाव अब धीमा पड़ चुका है, लेकिन विगत तीन दिनों यानी 72 घंटों की निरंतर बारिश ने राज्य के 17 जनपदों के करीब 6,000 गांवों को टापू बनाकर शेष दुनिया से अलग-थलग कर दिया है।
सुपौल जिले में स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है, जहां 50 से अधिक बस्तियों में जलप्रलय जैसे हालात उत्पन्न हो चुके हैं। जिले के 500 से अधिक रिहायशी मकान पूरी तरह जलसमाधि ले चुके हैं, जिससे हजारों परिवार खुले आसमान के नीचे शरण लेने को विवश हैं। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन और राहत दलों की टीमें जलमग्न क्षेत्रों से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा आवश्यक राहत सामग्री वितरित करने के कार्य में जुटी हुई हैं।
उत्तराखंड: चार जनपदों में मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट, चारधाम यात्रा पर अस्थाई रोक
उत्तराखंड में कुदरत के दोहरे तेवर देखने को मिल रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की आशंका जताते हुए कड़ा अलर्ट जारी किया है। देहरादून, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार जनपदों के लिए मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली एवं नैनीताल में ऑरेंज अलर्ट, जबकि अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर जनपदों में यलो अलर्ट जारी कर आपदा प्रबंधन इकाइयों को सजग रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पहाड़ों पर लगातार दरकती चट्टानों, भूस्खलन के प्रत्यक्ष जोखिम और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए शासन ने 26 और 27 सितंबर के लिए चारधाम यात्रा को अस्थायी तौर पर स्थगित कर दिया है। इसी बीच, सीमांत उत्तरकाशी के नेलांग-जादुंग समेत रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ की ऊंची हिमाच्छादित चोटियों पर पिछले दो दिनों से ताजा बर्फबारी का क्रम जारी है। इस असमय हिमपात के चलते समूचे पर्वतीय परिक्षेत्र में कड़ाके की ठंडक फैल गई है।
हिमाचल प्रदेश: किन्नौर में बिछी बर्फ की चादर, अगले चार दिन विषम मौसम की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी मौसम ने करवट ले ली है। किन्नौर जिले की गगनचुंबी चोटियों पर जोरदार बर्फबारी दर्ज की गई है। पूह ब्लॉक के कुन्नू क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सीमांत पर्यटन स्थल छितकुल में ताजा हिमपात से प्रकृति ने बर्फ की धवल चादर ओढ़ ली है। स्थानीय मार्गों पर फिसलन बढ़ने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के चुनिंदा हिस्सों में भारी बारिश के मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट तथा राजधानी शिमला, मंडी, कुल्लू और सिरमौर जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विशेषज्ञों का आकलन है कि आगामी चार दिनों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही उग्र बना रहेगा, जिसको देखते हुए स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को नदी-नालों तथा संवेदनशील ढलानों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।





















































