ग्रेटर नोएडा: जनपद के बादलपुर थाना क्षेत्र स्थित कचेड़ा गांव में बुधवार देर रात एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी के लेबर कैंप में आग का तांडव देखने को मिला। गैस सिलेंडर में रिसाव के बाद हुए जोरदार धमाकों ने देखते ही देखते कैंप को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि वहां मौजूद दर्जनों टीन शेड जलकर राख हो गए। गनीमत रही कि समय रहते सभी 60 मजदूर सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे, जिससे एक बड़ा मानवीय हादसा टल गया।
गैस रिसाव से शुरू हुआ तबाही का मंजर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कचेड़ा गांव में एक निर्माण कंपनी ने अपने लगभग 60 कर्मचारियों के रहने के लिए अस्थायी टीन शेड का कैंप बना रखा था। बुधवार की रात जब अधिकांश मजदूर अपने दैनिक कार्यों के बाद विश्राम की तैयारी कर रहे थे, तभी एक झोपड़ीनुमा शेड में रखे छोटे गैस सिलेंडर से अचानक गैस का रिसाव होने लगा। जब तक लोग कुछ समझ पाते, सिलेंडर में भीषण विस्फोट हो गया। धमाके की गूंज के साथ ही आग ने आसपास के अन्य शेडों को भी अपने आगोश में ले लिया। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि एक के बाद एक कई और छोटे सिलेंडरों में भी विस्फोट हो गए, जिससे आग बेकाबू हो गई।
45 मिनट तक चला दमकल का महा-अभियान
रात करीब 10:50 बजे दमकल विभाग को इस दुर्घटना की सूचना मिली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम और स्थानीय थाना पुलिस तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। आग की भयावहता को देखते हुए दमकल विभाग ने तत्काल प्रभाव से छह गाड़ियों को मौके पर भेजा। दमकलकर्मियों ने मोर्चा संभालते हुए युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू किया। करीब 45 मिनट की कड़ी मशक्कत और लगातार पानी की बौछारों के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। आग बुझाने के बाद दमकल विभाग ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया ताकि किसी भी चिंगारी से आग दोबारा न भड़क सके।
सुरक्षित बचे मजदूर, लेकिन छिन गई जमा-पूंजी
इस हादसे में भले ही कोई जनहानि न हुई हो, लेकिन लेबर कैंप में रह रहे मजदूरों की मेहनत की पूरी कमाई और दैनिक जीवन का सामान पल भर में राख हो गया। मजदूरों ने जान तो बचा ली, लेकिन उनके कपड़े, बर्तन, कागजात और खाने-पीने का सामान पूरी तरह स्वाहा हो गया। जिला दमकल अधिकारी प्रदीप कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में आग का मुख्य कारण गैस सिलेंडर का रिसाव और उसके बाद हुआ विस्फोट ही सामने आया है।
प्रशासन और दमकल विभाग की सतर्कता
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) प्रदीप चौबे ने बताया कि स्थानीय पुलिस और फायर सर्विस की तत्परता के कारण बड़ा नुकसान होने से बचा लिया गया। फिलहाल, दमकल विभाग की एक टीम घटना के तकनीकी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लेबर कैंप जैसे अस्थायी निर्माणों में सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा था। आग लगने की इस घटना ने एक बार फिर लेबर कैंपों में सुरक्षा व्यवस्था और गैस उपयोग के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।





















































