लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक 17 वर्षीय मेधावी छात्रा ने आत्महत्या कर ली। नीट की परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा (Re-exam) के बढ़ते तनाव के कारण छात्रा मानसिक अवसाद से जूझ रही थी। इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा प्रणाली और छात्रों पर पड़ रहे मानसिक दबाव के गंभीर मुद्दों को केंद्र में ला दिया है।
रेलवे कॉलोनी में पसरा मातम
मृतक छात्रा की पहचान सुहानी यादव के रूप में हुई है, जो अपने परिवार के साथ लखनऊ की ऐशबाग रेलवे कॉलोनी में रह रही थी। सुहानी का परिवार मूल रूप से बिहार के पटना का निवासी है। उसके पिता रणजीत यादव भारतीय रेलवे में टीटीई के पद पर तैनात हैं। 16 जून की सुबह जब घरवाले अपने कार्यों में व्यस्त थे, तब सुहानी ने अपने कमरे में पंखे से फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। आनन-फानन में परिजन उसे गंभीर हालत में नजदीकी रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल ले गए, परंतु चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
‘अच्छा प्रदर्शन था, पर पेपर लीक ने तोड़ दी उम्मीदें’
परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सुहानी ने 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया था। वह अपने भविष्य को लेकर काफी आशान्वित थी। हालांकि, परीक्षा में पेपर लीक होने और धांधली के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा पूरी परीक्षा को रद्द कर दिए जाने का निर्णय सुहानी के लिए गहरा झटका साबित हुआ। इस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद से ही सुहानी बेहद तनाव में रहने लगी थी। यद्यपि उसने 21 जून को प्रस्तावित दोबारा परीक्षा के लिए पुनः तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन आगामी परीक्षा का दबाव उसके कोमल मन पर हावी हो गया।
पुलिस जांच और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
बाजार खाला थाना प्रभारी बृजेश सिंह ने इस हृदय विदारक घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल की। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट प्राप्त नहीं हुआ है। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सके।
पुलिस का कहना है कि यह मामला पूरी तरह से मानसिक अवसाद से जुड़ा प्रतीत होता है, जो नीट परीक्षा को लेकर उपजे विवादों के बाद शुरू हुआ था। इस घटना के बाद स्थानीय क्षेत्र और नीट की तैयारी कर रहे अन्य छात्रों में भारी शोक और रोष है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।



















































