उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के बच्चों और उनके अभिभावकों के नाम एक विशेष और बेहद भावुक पत्र (पाती) लिखा है। इस पत्र के माध्यम से सीएम योगी ने जहां बच्चों को छुट्टियों का सही सदुपयोग करने के टिप्स दिए हैं, वहीं माता-पिता से बच्चों को अपनी जड़ों, संस्कृति और प्रकृति से जोड़ने की एक अनोखी अपील की है। मुख्यमंत्री का यह संदेश डिजिटल युग में खो रहे पारिवारिक मूल्यों को वापस लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रही है।
- भावुक अपील: सीएम योगी आदित्यनाथ ने ग्रीष्मावकाश (Summer Vacations) की शुरुआत में बच्चों और उनके माता-पिता के नाम लिखी विशेष ‘पाती’।
- संस्कारों से जुड़ाव: अभिभावकों से विशेष आग्रह कि बच्चों को इस बार ननिहाल और ददिहाल जरूर ले जाएं, ताकि वे पारिवारिक संस्कारों को समझ सकें।
- स्किल डेवलपमेंट: बच्चों को स्कूल की व्यस्त दिनचर्या से हटकर नई भाषा, फोटोग्राफी, संगीत, पाक कला और बागवानी जैसे नए कौशल सीखने की सलाह।
- इको-टूरिज्म को बढ़ावा: प्रकृति को करीब से जानने के लिए दुधवा नेशनल पार्क, चूका बीच और कतर्नियाघाट जैसे यूपी के प्राकृतिक स्थलों की सैर करने पर जोर।
- प्लास्टिक मुक्त वैकेशन: यात्रा या पिकनिक के दौरान प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद कर जूट या कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करने का दिया संदेश।
‘ननिहाल-ददिहाल’ से मजबूत होंगी संस्कारों की जड़ें
लखनऊ। डिजिटल दौर में आज की पीढ़ी स्मार्टफोन और इंटरनेट में इस कदर खो गई है कि वे संयुक्त परिवार के ताने-बाने से दूर होती जा रही है। इसी बात को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों के नाम अपनी ‘पाती’ में एक बहुत ही संवेदनशील बात साझा की है।
सीएम योगी ने लिखा, “हममें से अधिकतर लोगों ने बचपन में दादा-दादी और नाना-नानी से कहानियां सुनी होंगी। आज बच्चे इन समृद्ध अनुभवों से दूर होते जा रहे हैं। मेरा आपसे आग्रह है कि इन छुट्टियों में बच्चों को ननिहाल-ददिहाल अवश्य ले जाएं। उन्हें परिवार के साथ समय बिताने दें, ताकि वे अपने संस्कारों और परंपराओं को निकट से जान सकें।”
मुख्यमंत्री ने एक सुंदर रूपक का उपयोग करते हुए कहा कि जिस वृक्ष की जड़ें मजबूत होती हैं, वही सबसे अधिक फलदायी और दीर्घजीवी होता है। हमारी संस्कृति और संस्कार भी हमारे बच्चों के लिए वैसी ही जड़ें हैं, जिन्हें सींचना माता-पिता की जिम्मेदारी है।
डिजिटल स्क्रीन छोड़ सीखें नया हुनर: बच्चों के लिए सीएम का मंत्र
मुख्यमंत्री ने बच्चों को सीधे संबोधित करते हुए उनके भीतर उत्साह और कुछ नया करने की ललक जगाई है। उन्होंने लिखा कि गर्मी की छुट्टियां केवल खाली बैठने के लिए नहीं, बल्कि आनंद, उत्साह और नए शोध का समय लेकर आती हैं। स्कूल की व्यस्त दिनचर्या और परीक्षाओं के दबाव से राहत मिलते ही मन कुछ नया सीखने के लिए उत्सुक हो उठता है।
सीएम योगी के अनुसार, यही वह सही अवसर है जब बच्चे अपनी छिपी हुई रुचियों (Hobbies) को पहचान सकते हैं। किशोरों और युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि वे इन छुट्टियों में कोई नई भाषा सीख सकते हैं या कोई नया स्किल डेवलप कर सकते हैं। यह समय अच्छी पुस्तकों से मित्रता करने, फोटोग्राफी, चित्रकारी, पाक कला (Cooking), संगीत और बागवानी जैसी रचनात्मक गतिविधियों में खुद को व्यस्त रखने का है, जो आगे चलकर उनके संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होंगी।
दुधवा और कतर्नियाघाट की सैर: प्रकृति से जुड़ने का अनोखा संदेश
आज के समय में बच्चों का प्रकृति से जुड़ाव लगातार कम हो रहा है, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को घरों में कैद रखने के बजाय उत्तर प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक धरोहरों से रूबरू कराएं।
सीएम ने पर्यटन और पर्यावरण के महत्व को जोड़ते हुए लिखा, “घूमना-फिरना जीवन को समझने का एक बेहतरीन माध्यम है। बच्चों को ऐसे स्थानों पर ले जाएं, जहां वे प्रकृति एवं जैव विविधता (Biodiversity) का साक्षात अनुभव कर सकें।” इसके लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, चूका बीच और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये स्थल प्रकृति की अपार सुंदरता से परिचित कराते हैं और बच्चों की इस यात्रा को जीवनभर के लिए यादगार बना देंगे।
‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ को कहें ना, अपनाएं स्वच्छ जीवनशैली
पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस समर वैकेशन को पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल बनाने का भी आह्वान किया है। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों से अपील की है कि वे इस बार अपनी छुट्टियों और यात्राओं को पूरी तरह से ‘प्लास्टिक मुक्त’ बनाने का संकल्प लें।
उन्होंने संदेश दिया कि यात्रा या पिकनिक के दौरान सिंगल-यूज प्लास्टिक का कचरा इधर-उधर न फैलाएं। इसकी जगह कपड़े या जूट के थैलों का प्रयोग करने की आदत डालें। जब बच्चे बचपन से ही मिट्टी, वृक्ष और जल के महत्व को समझेंगे, तभी उनके भीतर पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होगी। सीएम ने जोर देकर कहा कि हमारे ये छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बनते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह ‘पाती’ केवल एक शासकीय संदेश नहीं है, बल्कि आधुनिक समाज में लुप्त हो रहे पारिवारिक ताने-बाने और पर्यावरण चेतना को जगाने का एक बेहद गंभीर और आत्मीय प्रयास है। भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच यदि अभिभावक मुख्यमंत्री की इन बातों को अमल में लाते हैं, तो यह ग्रीष्मावकाश बच्चों के मानसिक, शारीरिक और आत्मिक विकास के लिए वास्तव में एक अमूल्य पूंजी साबित होगा।




















































