उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला है, जहां अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट से लगातार तीन बार से समाजवादी पार्टी के विधायक चले आ रहे राकेश प्रताप सिंह ने पार्टी से अपने सभी नाते तोड़ लिए हैं। समाजवादी पार्टी के भीतर मची इस भगदड़ के बीच उन्होंने आगामी 14 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी में आधिकारिक रूप से शामिल होने का बड़ा ऐलान कर दिया है। सपा के प्रमुख नेतृत्व पर गंभीर और तीखे आरोप लगाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया है कि पार्टी अब वैचारिक रास्ते से भटक चुकी है और वहां रहकर राजनीति करना पूरी तरह से असंभव हो गया है।
भगवान राम और सनातन के अपमान से उपजा गहरा क्षोभ
एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल के साथ खास बातचीत के दौरान विधायक राकेश प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़ने की मुख्य वजहों का खुलकर खुलासा किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस राजनीतिक दल में भगवान श्री राम के पावन अस्तित्व पर ही लगातार सवाल खड़े किए जाएं, जहां खुलेआम रामचरितमानस को फाड़ने और जलाने जैसी निंदनीय घटनाएं घटित हों, और जहां राष्ट्रहित व समाजहित के बजाय केवल एक जाति और एक परिवार को ही सर्वोपरि माना जाए, वहां आत्मसम्मान के साथ टिके रहना मुमकिन नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व भी उन्होंने गौरीगंज के एक सार्वजनिक धार्मिक मंच से यह बात स्पष्ट कर दी थी कि चाहे उनका विधायक पद रहे या ना रहे, पार्टी का टिकट मिले या ना मिले, वे सनातन धर्म, तुलसीदास की लेखनी और हिंदू संस्कृति के अपमान पर हमेशा कड़ा विरोध दर्ज कराते रहेंगे।
14 अक्टूबर को दिग्गजों की मौजूदगी में ज्वाइन करेंगे बीजेपी
भारतीय जनता पार्टी में अपनी एंट्री को लेकर उन्होंने जानकारी दी कि आगामी 14 अक्टूबर को वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी, राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी, प्रदेश सरकार की मंत्री प्रतिभा शुक्ला, कृष्णा पासवान, दारा सिंह चौहान, मयंकेश्वर शरण सिंह समेत कई प्रमुख राजनीतिक दिग्गजों की उपस्थिति में विधिवत रूप से भगवा परिवार का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके साथ व्यक्तिगत जुड़ाव रखने वाले करीब 90 प्रतिशत समर्थक, कार्यकर्ता तथा बूथ व पोलिंग स्तर पर मेहनत करने वाले लोग भी उनके साथ ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि सपा के बागी विधायक अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भी उनके साथ ही भाजपा का दामन थामेंगे।
सपा के ‘PDA’ नारे पर तीखा तंज और परिवारवाद का आरोप
समाजवादी पार्टी के बहुप्रचारित ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर कड़ा प्रहार करते हुए राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि सपा के इस नारे में न तो पिछड़ा (पी) है, न दलित (डी) और न ही अल्पसंख्यक (ए) के लिए कोई वास्तविक स्थान है, बल्कि इस पूरे समीकरण में केवल और केवल एक ही परिवार के लोग शामिल हैं। राज्यसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने हमेशा अपने परिवार और चुनिंदा उद्योगपति घरानों को ही प्राथमिकता दी है, जबकि इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा और अन्य मंचों पर समाज के हर वर्ग, विभिन्न जातियों और छोटे से छोटे तबके को यथोचित प्रतिनिधित्व प्रदान किया है।
बीजेपी प्रत्याशी की जीत के लिए झोंक देंगे अपनी पूरी ताकत
लगभग डेढ़ दशक तक समाजवादी पार्टी की मुख्यधारा की राजनीति का अहम हिस्सा रहने के बाद अब नया राजनीतिक कदम उठाने जा रहे राकेश प्रताप सिंह ने आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी भूमिका को लेकर कहा कि भविष्य में चुनाव लड़ने या न लड़ने का अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय और प्रांतीय संसदीय बोर्ड करेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपेगी, वे पूरी निष्ठा से उसका निर्वहन करेंगे और भाजपा से मैदान में उतरने वाले हर अधिकृत प्रत्याशी की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित करने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देंगे। उल्लेखनीय है कि राकेश प्रताप सिंह ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में पहली बार सपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी और इसके बाद 2017 तथा 2022 के चुनावों में भी गौरीगंज सीट पर अपना दबदबा बरकरार रखा था।





















































