आगरा। विश्व के सात आश्चर्यों में शुमार और देश के सबसे संवेदनशील ऐतिहासिक स्मारकों में गिने जाने वाले ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से सुरक्षा बलों ने एक व्यापक संयुक्त युद्धाभ्यास (मॉक ड्रिल) को अंजाम दिया। यमुना नदी की ओर स्थित ताजमहल के रिवरसाइड क्षेत्र में हथियारों से लैस आतंकवादियों के संभावित हमले का एक काल्पनिक परिदृश्य रचकर विभिन्न सुरक्षा बलों और प्रशासनिक इकाइयों की ऑपरेशनल कार्यकुशलता की वास्तविक परीक्षा ली गई। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की अगुवाई में संचालित इस सघन ऑपरेशन में सभी संबद्ध एजेंसियों ने अत्यंत सटीक समन्वय और त्वरित कार्रवाई का प्रदर्शन करते हुए स्मारक की सुरक्षा का पुख्ता संदेश दिया।
कई सुरक्षा एजेंसियों का साझा एक्शन, एक्स हैंडल पर साझा की गई जानकारी
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस विशेष अभ्यास की विस्तृत जानकारी साझा की। बल ने स्पष्ट किया कि विश्व धरोहर ताजमहल के सुरक्षा तंत्र को हर प्रकार की आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रखने के क्रम में इस बहु-एजेंसी अभ्यास का आयोजन किया गया था। इस व्यापक सुरक्षा परीक्षण में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश पुलिस, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का स्थानीय प्रबंधन, दमकल विभाग (फायर सर्विस), बम निरोधक दस्ता (BDDS), श्वान दस्ता (डॉग स्क्वॉड), स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) और विशेष स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमों ने सम्मिलित रूप से सक्रिय भागीदारी निभाई।
भारी हथियारों से लैस दो आतंकियों की एंट्री, कुछ ही मिनटों में लागू हुआ SOP
मॉक ड्रिल की रूपरेखा के तहत अचानक यह काल्पनिक आपात स्थिति उत्पन्न की गई कि दो आधुनिक हथियारों से लैस आतंकवादी नदी किनारे से ताजमहल परिसर में दाखिल हो चुके हैं। हमले का अलार्म बजते ही पूर्वनिर्धारित ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) तत्काल प्रभाव से सक्रिय कर दी गई। सूचना मिलते ही सीआईएसएफ की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) ने बिजली की तेजी से मोर्चा संभाला और घुसपैठियों की बढ़त को तुरंत रोक दिया। इसके तुरंत बाद रणनीतिक रूप से आगे बढ़ी असॉल्ट पार्टी ने आक्रामक जवाबी मोर्चा लेते हुए दोनों काल्पनिक आतंकियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों ने बाहरी परिधि में मजबूत घेराबंदी कर रखी थी, जिससे किसी भी संदिग्ध के बाहर भागने या बाहरी तत्वों के अंदर आने की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो गई।
आतंकियों के खात्मे के बाद चप्पे-चप्पे पर चला गहन तलाशी अभियान
जैसे ही असॉल्ट टीम ने ‘आतंकियों’ को निष्प्रभावी घोषित किया, प्रोटोकॉल के तहत तुरंत दूसरा चरण शुरू किया गया। सीआईएसएफ, यूपी पुलिस, बीडीडीएस और खोजी कुत्तों के दस्ते ने संयुक्त रूप से पूरे स्मारक परिसर और आसपास के संवेदनशील हिस्सों में सघन कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया। इस तलाशी अभियान का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना था कि आतंकियों द्वारा कहीं कोई आईईडी, विस्फोटक सामग्री या संदिग्ध वस्तु तो नहीं छोड़ी गई है। तकनीकी उपकरणों और स्निफर डॉग्स की मदद से परिसर के सुरक्षित होने की अंतिम पुष्टि के बाद ही अभ्यास के इस चरण को संपन्न किया गया।
कमांडेंट की निगरानी में परखा गया त्वरित रिस्पॉन्स और रणनीतिक तालमेल
सीआईएसएफ से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह समग्र संयुक्त युद्धाभ्यास आगरा स्थित सीआईएसएफ यूनिट (ताजमहल) के कमांडेंट ऋषि कौशिक के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण और कुशल मार्गदर्शन में संचालित हुआ। इस अभ्यास का प्राथमिक उद्देश्य विपरीत परिस्थितियों में विभिन्न सुरक्षा शाखाओं के मध्य सूचनाओं के आदान-प्रदान, रणनीतिक तालमेल, संकट मोचन की गति और त्वरित जवाबी कार्रवाई की क्षमता का वास्तविक मूल्यांकन करना था।
ताजमहल भारत के सबसे प्रतिष्ठित, संवेदनशील और ‘अति-सुरक्षित’ स्मारकों की सूची में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों की तादाद में घरेलू व अंतरराष्ट्रीय सैलानी दीदार के लिए पहुंचते हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की भारी आवाजाही और वैश्विक महत्व को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ती हैं। यही कारण है कि किसी भी संभावित खतरे या नापाक साजिश को समय रहते नाकाम करने के लिए समय-समय पर ऐसे उच्चस्तरीय सुरक्षा अभ्यास आयोजित किए जाते हैं।



















































