उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे के ऐतिहासिक कायाकल्प को रेखांकित करते हुए कहा कि एक दौर था जब जापानी इंसेफेलाइटिस मासूम जिंदगियों को निगल रहा था और बेबस अभिभावक खौफ के साए में जीने को मजबूर थे। बुधवार को गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह भयावह दौर पूरी तरह बीत चुका है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि प्रदेश से जिस प्रकार माफियाराज को जड़ से उखाड़ फेंका गया है, ठीक उसी तरह मच्छरों और जानलेवा इंसेफेलाइटिस के प्रकोप को भी समाप्त कर दिया गया है। आज का उत्तर प्रदेश और बदलता गोरखपुर एक नए विश्वास और आधुनिक विकास के युग में प्रवेश कर चुका है।
स्वैच्छिक रक्तदान जीवन रक्षा की पहली कड़ी, व्यावसायिक डोनर्स पर लगे रोक
गोरखपुर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के चैरिटेबल ब्लड सेंटर के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री ने रक्तदान की महत्ता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक तकनीक ने चाहे कितनी भी तरक्की क्यों न कर ली हो, लेकिन मानव रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प तैयार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों के लिए स्वैच्छिक रक्तदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता का सर्वोच्च प्रमाण है। उन्होंने डॉक्टरों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया और अन्य मंचों के जरिए लोगों को नियमित रक्तदान के लिए जागरूक करें ताकि आपूर्ति और मांग के अंतर को पाटा जा सके। साथ ही, उन्होंने पेशेवर रक्तदाताओं की कुप्रथा पर गहरी चिंता जताते हुए डॉक्टरों से इसे पूरी तरह खत्म कराने में सहयोग मांगा। उन्होंने आगाह किया कि गंभीर बीमारियों से ग्रसित पेशेवर डोनर्स के जरिए रक्त चढ़ाने से घातक संक्रमणों का प्रसार हो सकता है, जिससे पूरी रक्तदान प्रणाली पर आम जनता का विश्वास डगमगा जाएगा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बदहाल अतीत से एम्स के सुनहरे दौर तक
समारोह में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पुराने स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली का स्मरण कराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े नौ साल पहले तक पूरे संभाग का एकमात्र सहारा बीआरडी मेडिकल कॉलेज हुआ करता था। उस वक्त हालात इतने त्रासद थे कि एक ही बेड पर तीन से चार मासूम मरीज भर्ती किए जाते थे। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित इंसेफेलाइटिस वार्ड में बुनियादी पंखे, स्वच्छ शौचालय और जीवनरक्षक सुविधाओं तक का घोर अभाव था। खुद लाचारगी के दौर से गुजरने वाला वह संस्थान आज एक अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी केंद्र में तब्दील हो चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में न केवल गोरखपुर में एम्स पूरी क्षमता से सेवाएं दे रहा है, बल्कि महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर जैसे जनपदों में भी नए मेडिकल कॉलेज स्थापित होकर जनता को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। राज्य के हर जिले के सरकारी अस्पताल में दस-दस बिस्तरों की डायलिसिस यूनिट भी तेजी से शुरू की जा रही है।
चिकित्सा शिक्षा का विस्तार: 75 जिलों में 85 मेडिकल कॉलेज
राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के आंकड़े साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कुल 75 जिलों के सापेक्ष अब 85 मेडिकल कॉलेज तैयार हो चुके हैं, जबकि राज्य में दो एम्स सफलतापूर्वक संचालित हैं। चिकित्सा शिक्षा में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है; जहां पहले एमबीबीएस की मात्र 4600 सीटें उपलब्ध थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 13,500 से अधिक हो चुका है और पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) की सीटें भी पहले की तुलना में दोगुनी हो गई हैं।
माफिया के आतंक से मुक्त हुआ माहौल, सुरक्षित हुए डॉक्टर और नागरिक
अतीत के आपराधिक माहौल पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश के जिलों की पहचान कुख्यात माफिया गिरोहों से हुआ करती थी। उस दौर में चिकित्सक सीधे तौर पर अपराधियों के निशाने पर रहते थे। गोरखपुर समेत कई शहरों में डॉक्टरों का सरेआम अपहरण, रंगदारी की मांग, धमकी भरे फोन और क्लिनिक में घुसकर मारपीट आम बात हो गई थी, जिसके विरोध में उन्हें स्वयं चिकित्सकों के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ता था। आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। कानून-व्यवस्था सुदृढ़ होने से डॉक्टर, कारोबारी और आम नागरिक खुद को पूरी तरह महफूज महसूस कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज उत्तर प्रदेश की असली पहचान अपराध और माफिया से नहीं, बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ के विजन से हो रही है।





















































