उत्तर प्रदेश के चिकित्सा जगत में अनुशासन और सुरक्षा मानकों को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया गया है। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य के समस्त मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के भीतर ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’ (Anti-Conversion Cell) की स्थापना को अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए हैं। राजभवन द्वारा लिया गया यह निर्णय राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में हाल के दिनों में सामने आई कुछ विवादास्पद घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिसका मुख्य ध्येय परिसरों की गरिमा को सुरक्षित रखना और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
इन घटनाओं ने सरकार को किया सतर्क
राजभवन के इस आदेश के पीछे दो मुख्य मामले रहे हैं, जिन्होंने मेडिकल संस्थानों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। पहला मामला राजधानी के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़ा है, जहाँ एक पूर्व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर अपनी महिला सहकर्मियों का कथित शोषण करने और उन्हें जबरन धर्म परिवर्तन के लिए विवश करने के गंभीर आरोप लगे हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
दूसरी घटना संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) के एक कर्मचारी की 21 वर्षीय बेटी के रहस्यमयी तरीके से लापता होने की है। 21 मई से गायब युवती के परिजनों ने इरशाद अली नामक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें पीछा करने, ब्लैकमेलिंग और युवती को देश से बाहर ले जाने की आशंका जताई गई है। इन घटनाओं के बाद से मेडिकल कैंपस में तनाव की स्थिति देखी गई थी, जिसके परिणामस्वरूप अब निगरानी तंत्र को और अधिक सख्त बनाया जा रहा है।
कैसे काम करेगा यह नया सेल?
अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी ने राज्यपाल के इन निर्देशों का संज्ञान लेते हुए अपने सभी संबद्ध संस्थानों को तुरंत प्रभाव से सेल गठित करने के आदेश दिए हैं। इस सेल की कार्यप्रणाली के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- जागरूकता और शिक्षा: सेल का मुख्य कार्य छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों और पैरामेडिकल स्टाफ को देश के धर्मांतरण विरोधी कानूनों और उनकी संस्थागत जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित करना होगा।
- सतर्कता और निगरानी: परिसरों के भीतर किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने की जिम्मेदारी इस सेल की होगी ताकि अप्रिय घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।
- शिकायत निवारण प्रणाली: यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो यह सेल उसे त्वरित जांच के लिए उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और उस पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
- नियमित शैक्षणिक कार्यक्रम: संस्थानों को नियमित रूप से कार्यशालाएं और जागरूकता सेमिनार आयोजित करने होंगे, ताकि युवा छात्र अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह सजग रहें।
अनुपालन और जवाबदेही
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी संबद्ध कॉलेजों को एक स्पष्ट समय-सीमा दी है। प्रत्येक संस्थान को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके यहां उक्त सेल का गठन तत्काल हो और उसकी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट विश्वविद्यालय मुख्यालय को सौंपी जाए। शिकायतों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए प्रशासन ने यह निर्देश भी दिए हैं कि किसी भी सूचना या शिकायत पर विलंब किए बिना तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
धार्मिक जगत से मिली प्रतिक्रिया
इस प्रशासनिक पहल का विभिन्न धर्मगुरुओं ने सकारात्मक रुख के साथ स्वागत किया है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के इस निर्देश पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि जबरन धर्म परिवर्तन किसी भी धर्म की शिक्षाओं के विरुद्ध है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि हर मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि न्याय हो सके।





















































