उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर से बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा रामपुर जिला जेल में बंद वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान से मुलाकात किए जाने के बाद सूबे का सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, बल्कि सत्ता पक्ष और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं ने भी सपा प्रमुख की मंशा पर खुलकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच इस भेंट को उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए समीकरण और ध्रुवीकरण के रूप में देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य का हाल जानने पहुंचे या बुनी जा रही है चुनावी रणनीति?
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब पार्टी के सूत्रों से यह जानकारी मिली कि आजम खान की तबीयत ठीक नहीं चल रही है, जिसके बाद अखिलेश यादव उनका हाल-चाल जानने के लिए सीधे रामपुर जिला जेल पहुंचे। जेल के भीतर आजम खान से मुलाकात करने के बाद, सपा प्रमुख ने उनके आवास पर जाकर उनकी पत्नी और सपा सांसद तंजीन फातिमा के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों से भी मुलाकात की और ढांढस बंधाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस तरह की मुलाकातें महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं होतीं, बल्कि इनके गहरे राजनीतिक मायने होते हैं। इससे पहले भी मार्च 2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले अखिलेश यादव ने सीतापुर जेल जाकर आजम खान से लंबी मंत्रणा की थी, जिससे पार्टी की चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन को लेकर चर्चाएं गर्म हुई थीं। सपा नेताओं का दावा है कि वर्तमान सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना के तहत फर्जी और मनगढ़ंत मामलों में आजम खान को फंसाया है, और भविष्य में पार्टी की सरकार बनने पर इन सभी मुकदमों को वापस लिया जाएगा।
राजभर और बीजेपी का करारा हमला, बताया राजनीतिक अवसरवाद
अखिलेश यादव और आजम खान की इस मुलाकात पर विरोधी दलों ने तीखा प्रहार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने इस पूरी भेंट को एक ‘चुनावी हथकंडा’ करार दिया है। राजभर का कहना है कि समाजवादी पार्टी का एकमात्र उद्देश्य इस बहाने सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम वोटों को साधना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब सूबे का अल्पसंख्यक समाज पूरी तरह समझदार हो चुका है और वह केवल दिखावे के मेल-मिलाप से भ्रमित होने वाला नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसा कि संकट के लंबे दौर में जब आजम खान जेल में थे, तब पार्टी नेतृत्व ने खुलकर सुध नहीं ली और अब चुनाव नजदीक आते ही सियासी फायदे के लिए मुलाकातें की जा रही हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया है। भाजपा नेता नरेंद्र कश्यप ने सपा प्रमुख पर खुला राजनीतिक अवसरवाद अपनाने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जो नेता भ्रष्टाचार और दस्तावेजों में हेराफेरी जैसे लगभग 100 गंभीर आपराधिक मामलों का सामना करते हुए सलाखों के पीछे है, उससे मिलकर भला जनता का क्या भला हो सकता है। भाजपा का आरोप है कि सपा हमेशा से ही मुस्लिम चेहरों का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक हितों और वोट बैंक की खातिर करती आई है।
कानूनी शिकंजे में फंसे हैं आजम खान, ईडी और अदालती कार्रवाइयों का दौर
आपको बता दें कि रामपुर सदर विधानसभा सीट से रिकॉर्ड 10 बार विधायक चुने जा चुके आजम खान लंबे समय से कानूनी मुकदमों के घेरे में हैं। जालसाजी से जुड़े एक मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद वे पिछले साल नवंबर से लगातार रामपुर जिला जेल में बंद हैं। उनकी मुश्किलें यहीं समाप्त नहीं हुईं; हाल ही में बीते 13 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच के सिलसिले में जेल के भीतर ही उनसे लंबी पूछताछ की थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि निजी ठेकेदारों के माध्यम से सरकारी धन को अवैध रूप से डायवर्ट किया गया और उसका इस्तेमाल जौहर ट्रस्ट तथा विश्वविद्यालय की संपत्तियां खड़ी करने में किया गया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई ठिकानों पर छापेमारी भी की जा चुकी है। इसके अलावा 2019 के चुनाव के दौरान अधिकारियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में भी उन्हें सजा मिल चुकी है। इन तमाम कानूनी मुश्किलों के बीच अखिलेश यादव की यह मुलाकात उत्तर प्रदेश की सियासत में नए समीकरणों को जन्म दे रही है।














































